बाहर खाना आपके स्वास्थ पर पड़ सकता है भारी

नई दिल्ली : हम सा सभी बाहर खाना खाते हैं। स्ट्रीट फूड हो या रेस्तरां का खाना। मोबाइल ऐप से खाना मंगवाना तो और आसान हो गया है। लेकिन सोचने वाली बात यह है कि हम जो खाना खा रहे हैं, क्या वह हाइजीनिक और हेल्दी है। सरकारी आंकड़े बताते हैं कि सिर्फ 2018-19 में जांच के लिए लिए गए खाने के एक तिहाई नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। यानी उनमें मिलावट थी। ऐसे में सवाल यह है कि हम अब कहां जाएं, कहां खाएं और कैसे पता करें कि खाना सुरक्षित है या नहीं।

खाने में भारी मिलावट

1. 2018-19 में जांच में खाने के 1/3 नमूने पास नहीं हुए।
2. सबसे ज्यादा मिलावटखोरी उत्तर प्रदेश, पंजाब और तमिलनाडु में देखने को मिली।
3. मध्यप्रदेश और जम्मू-कश्मीर भी ज्यादा पीछे नहीं हैं।
4. उत्तर प्रदेश में खाने के 19,173 नमूने में से 9,403 नमूने फेल हुए।
5. पंजाब में 11,920 नमूने में से 3,403 नमूने मानकों खरे नहीं उतरे।
6. तमिलनाडु में 5,730 नमूने में से 2,601 नमूने जांच में फेल हुए।
7. मध्यप्रदेश के 7,063 नमूने में से 1,352 नमूने गलत पाए गए।
8. जम्मू और कश्मीर 3,600 नमूने में से 701 नमूने मानकों के मुताबिक नहीं पाए गए।
9. 2017-18 में 99,000 नमूनों में 24,000 नमूने जांच में फेल हुए।
10. 2016-17 में 78,000 नमूनों में 18,000 नमूने जांच में फेल हुए।

क्या कहते हैं आंकडें…

1. उत्तर प्रदेश में 2017-18 में 8,375 नमूनों में मिलावट पाई गई, जबकी 2018-19 में ये आंकड़ा बढ़कर 9,403 पर पहुंच गया।
2. पंजाब में 2017-18 में 3,053 नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे, वहीं 2018-19 में 3,403 नमूने जांच में फेल हो गए।
3. तमिलनाडु में 2017-18 में 2,461 नमूनों में मिलावट पाई गई, जबकी 2018-19 में ये आंकड़ा बढ़कर 2,601 पर पहुंच गया।

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