बजट : किसानों के लिए सरकार कर सकती है बड़े ऐलान

नई दिल्ली : बजट 5 जुलाई को संसद में पेश किया जाएगा। इस बजट से किसानों को काफी उम्मीदें हैं। सरकार किसानों के लिए बड़ी योजनाओं का ऐलान कर सकती है। बजट सत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा था कि दलहन में हमने कामयाबी हासिल की है, अब तिलहन के ऊपर सरकार का फोकस बढ़ने वाला है, ताकि तिलहन के आयात पर हमारी निर्भरता कम हो सके।

कृषि बजट को लेकर पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन का कहना है कि बीजेपी ने अपने घोषणा पत्र में कृषि और ग्रामीण क्षेत्र में 25 लाख करोड़ रुपये निवेश करने की बात कही थी। इस निवेश पर बजट में घोषणा हो सकती है। सिराज हुसैन ने कहा कि वे चाहते हैं कि सरकार इस बजट अपनी योजना के बारे में विस्तार से बताए कि 25 लाख करोड़ निवेश का क्या रोडमैप है। इसके अलावा किसानों के लिए क्रेडिट पॉलिसी में कुछ नया देखने को मिल सकता है, क्योंकि यह कहा गया है कि क्रॉप लोन पर जो 4 फीसदी की ब्याज दर है, उसको भी घटा कर जीरो प्रतिशत कर दिया जाएगा।

पूर्व कृषि सचिव सिराज हुसैन का कहना है कि हम करीब 70 फीसदी खाद्य तेल इंपोर्ट कर रहे हैं। सस्ता पाम ऑयल मलेशिया और इंडोनेशिया से खरीदा जाता है। इस वजह से हमारे किसानों को तिलहनी फसलों का सही दाम नहीं मिल पाता है। खाद्य तेल के आयात से हमारी बड़ी विदेशी मुद्रा भी खर्च हो रही है। पंजाब, हरियाणा और पश्चिम उत्तर प्रदेश के किसान पहले गेहूं के साथ सरसों का खूब उत्पादन करते थे, लेकिन अब उन्होंने सरसों की खेती कम कर दी है। इसलिए सरकार को सरसों उत्पादन पर ध्यान देना चाहिए।

वेयरहाउस सिस्टम का विकास जरूरी
सिराज हुसैन का कहना है कि सरकार ने 2007 में वेयरहाउसिंग डेवलपमेंट एंड रेगुलेटरी अथॉरिटी (डब्ल्यूडीआरए ) बनाई थी। 2010 ने इस अथॉरिटी ने काम करना शुरू किया था, लेकिन अभी तक वेयरहाउस के रजिस्ट्रेशन को अनिवार्य नहीं किया गया। पूरे देश में केवल 1,000 गोदाम ही रजिस्टर्ड हैं। इलेक्ट्रिकल रसीद की सिस्टम बनाया गया, लेकिन उस पर कोई ध्यान नहीं है।

वहीँ कृषि विशेषज्ञ देवेंद्र शर्मा कहते हैं कि कृषि क्षेत्र में बड़े निवेश की जरूरत है, क्योंकि आरबीआई ने कहा है कि 2001 और 2007 के बीच में जीडीपी में कृषि का योगदान आधे प्रतिशत से भी कम रहा है, जबकि देश की 50 फीसदी आबादी कृषि से जुड़ी हुई है।  शर्मा का कहना है कि ईज ऑफ डूइंग बिजनेस से संबंधित 7000 छोटे-बड़े फैसले लिए गए हैं। ऐसे ही ईज ऑफ डूइंग फार्मिंग की जरूरत है। इससे किसानों की बड़ी समस्या का हल हो सकता है। इसके अलावा पीएम किसान सम्मान योजना में कृषि मजदूरों को भी शामिल किया जाए तथा किसान की आय सुनिश्चित करने के ठोस कदम उठाने चाहिए।

कृषि मामलों के जानकार विजय सरदाना कहते हैं कि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिले, इसके लिए बाजार स्तर पर बड़े पैमाने पर काम करने की जरूरत है। पशुपालन का नया मंत्रालय बना है, पशुपालन पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।

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