फैक्टरिंग रेगुलेशन में बदलाव के लिए सरकार कर रही है विचार, जानिए क्या होंगे नए नियम

नई दिल्ली : अर्थव्यवस्था में सुस्ती और घटती नौकरियों के बीच केंद्र सरकार ने ढुलमुल विकास दर को तेज करने के लिए एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों) के क्षेत्र में नई जान फूँकने पर ध्यान लगा रही है। इसी क्रम में सरकार जल्द ही फैक्टरिंग विनियमन अधिनियम 2011 में संशोधन करेगी।

एमएसएमई को दो शुरुआती समस्याएं आती है, वो है समय पर ऋण की उपलब्धता और समय पर पेमेंट्स इकठ्ठा करना। देश की 6.34 करोड़ एमएसएमई में से केवल 8 प्रतिशत को ही औपचारिक क्रेडिट चैनलों द्वारा सेवा प्रदान की जाती है। अर्थव्यवस्था की जीवनरेखा, एमएसएमईज को सहयोग प्रदान करने के लिए सरकार ने ट्रेड रिसीवेबल्स डिस्काउंटिंग सिस्टम प्लेटफार्म (टीआरईडीएस) के इस्तेमाल पर जोर दिया है। एम1एक्सचेंज के सीईओ सुदीप मोहिंद्रू ने कहा कि रिसीवेबल्स के एमएसएमईज की एक सबसे बड़ी समस्या होने के कारण आरबीआई द्वारा अनुमोदित टीआरईडीएस प्लैटफॉर्म्स ने 12000 करोड़ रुपये का कारोबार किया है। लगभग 7,000 एमएसएमई विक्रेताओं ने टीआरईडीएस प्लैटफॉर्म्स के अस्तित्व में आने के बहुत ही कम समय में लगभग पूरे बैंकिंग क्षेत्र से प्रतिस्पर्धी दरों पर ऋण प्राप्त किया है।

टीआर1डीएस प्लैटफॉर्म जैसे एम1एक्सचेंज एमएसएमईज के लिए अपने बिलों में छूट देने और अपने ऑर्डर्स को पूरा करने के लिए वित्त उपलब्द्ध करा रही हैं। ऋण देने वालों के लिए भी यह प्लैटफॉर्म एमएसएमई को ऋण देने का एक सुरक्षित विकल्प प्रदान करता है, क्योंकि बिलों को एक सशक्त क्रेडिट रेटिंग के साथ बड़े कॉर्पोरेट्स को आकर्षित किया जाता है। इस पारदर्शी प्रक्रिया में बैंकों के लिए एक बड़ी समस्या, संदिग्ध लेन-देन के वित्त पोषित होने की संभावना दूर हो जाती है।  मोहिंद्रू ने कहा कि टीआरईडीएस प्लैटफॉर्म अपने शुरुआत के काफी कम समय में एमएसएमईज के लिए ऋण जुटाने में सहायक हुआ है। दो से अधिक वर्षों से कम समय में इन प्लेटफॉर्म्स ने कई गुना तरक्की की है, 12,000 करोड़ रुपये के लेन-देन के आंकडें को पार किया है। एम1एक्सचेंज इंडियन ऑइल, एचपीसीएल, बीपीसीएल, ओएनजीसी विदेश, एनटीपीसी, गेल जैसे कुल 36 सार्वजनिक उपक्रमों और बड़े सार्वजनिक उपक्रमों को शामिल करने में सफल रहा है और पिछली तिमाही में लगभग 9 एम1एक्सचेंज शामिल हो गए हैं। इसमें 31 बैंकों के साथ देशभर की कई बड़ी एमएसएमईज भी शामिल हो गईं हैं।

टीआरईडीएस प्लैटफॉर्म के उपयोग को लोकप्रिय बनाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं। हाल ही में सरकार ने एनबीएफसीज (गैर-बैंकिंग वित्त कंपनियां) के लिए प्लैटफॉर्म में भाग लेने के लिए मानदंडों में छूट दी है। बाजार की अंतर्दृष्टि से पता चलता है कि पिछले एक दशक में विशेष रूप से कम आखिरी कुछ महीनों में एमएसएमईज को क्रेडिट प्रदान करने में एनबीएफसीज महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं और साथ ही ये टीयर 1 और 2 शहरों में भी विस्तार कर रही है। टीआरईडीएस पर अधिक नकदी पाने के लिए एनबीएफसीज को इस प्लैटफॉर्म पर अनुमति दी जानी चाहिए। इसके लिए फैक्टरिंग रेगुलेशन एक्ट, 2011 में संशोधन आवश्यक है। इससे पहले सरकार ने 500 करोड़ रुपये या उससे अधिक के टर्नओवर वाली सभी कंपनियों को टीआरडीएस प्लैटफॉर्म में शामिल होने का निर्देश दिया ताकि बड़े कॉर्पोरेट्स को माल-सामान और सेवाओं की आपूर्ति करने वाले एमएसएमईज प्लैटफॉर्म के माध्यम से तुरंत और आसान धन का लाभ प्राप्त कर सकें।

मोहिंद्रू ने बताया कि टीआरईडीएस प्लेटफॉर्म नौकरियां उत्पन्न करने के मामले में एमएसएमईज के क्षेत्र का भविष्य है और आर्थिक मूल्यवर्धन के मामले में यह पैसे की कमी से जूझ रहे व्यवसायों के लिए तेजी से बढ़ने के लिए एक अमूल्य जीवनरेखा हो सकती है। बड़े कॉर्पोरेट्स भी टेक्नोलॉजी के लाभ को मानते हैं और इस प्लैटफॉर्म को अपनाते हैं, क्योंकि यह उनके आपूर्तिकर्ता के लिए व्यवसाय करने की लागत को कम करने में मदद करता है और बदले में बड़े कॉर्पोरेट के लिए दक्षता प्रदान करता है।

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