फिच ने आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान घटाया

नयी दिल्लीः वित्त वर्ष 2019-20 के लिये क्रेडिट रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने देश की आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान सात प्रतिशत से कम करके 6.8 प्रतिशत कर दिया। चालू वित्त वर्ष के लिये आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान भी एजेंसी ने 7.2 प्रतिशत से घटाकर 6.9 प्रतिशत किया है। उसने पिछले साल दिसंबर में इसे 7.8 प्रतिशत से कम करके 7.2 प्रतिशत किया था। 2017-18 में देश की आर्थिक वृद्धि दर 7.20 प्रतिशत थी।

क्या है कारण

एजेंसी ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र में और कुछ हद तक कृषि क्षेत्र में गतिविधियां नरम पड़ने से वृद्धि की रफ्तार सुस्त पड़ी है। यह सुस्ती मूलत: घरेलू कारकों के कारण है। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों पर काफी हद तक निर्भर क्षेत्रों जैसे वाहन एवं दोपहिया क्षेत्र में बिक्री गिरी है और इन्हें वित्त की उपलब्धता में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पिछले साल के अंतिम महीनों में खाद्य मुद्रास्फीति के नकारात्मक हो जाने से भी किसानों की आय पर दबाव बना है।

कच्चा तेल

एजेंसी ने कच्चा तेल में भी नरमी का पूर्वानुमान व्यक्त किया है। कच्चा तेल 2018 के 71.60 डॉलर प्रति बैरल की तुलना में गिरकर 2019 में करीब 65 डॉलर प्रति बैरल और 2020 में 62.50 डॉलर प्रति बैरल पर आ सकता है।

रुपये की स्थित‌ि

फिच ने कहा है कि दिसंबर 2019 तक रुपये के गिरकर 72 रुपये प्रति डॉलर पर और दिसंबर 2020 तक गिरकर 73 रुपये प्रति डॉलर होने की आशंका है। दिसंबर 2018 में यह 69.82 रुपये प्रति डॉलर पर था। एजेंसी ने वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर का पूर्वानुमान 2018 के लिये 3.3 प्रतिशत से घटाकर 3.2 प्रतिशत और 2019 के लिये 3.1 प्रतिशत से घटाकर 2.8 प्रतिशत किया है। उसने चीन के लिये पूर्वानुमान 2018 में 6.6 प्रतिशत और 2019 में 6.1 प्रतिशत पर बनाये रखा।

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