फंसा कर्ज निपटान नीति जल्द

नयी दिल्लीः सरकार जल्द बैंकों के फंसे कर्ज से निपटने के लिए गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) के तेजी से निपटान के लिए उपायों के सेट की घोषणा कर सकती है। इन उपायों घोषणा एक पखवाड़े में हो सकती है। वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने  कहा ‘नीति को अंतिम रूप दिया जा रहा है। इसकी घोषणा इस महीने के अंत या अगले महीने के शुरू में हो सकती है।’व्यापक रूप से इस नीति में एकबारगी निपटान की प्रक्रिया के बारे में उपाय होंगे। ऊंचे मूल्य के मामलों में  बैंकों को  तेजी से इससे  निपटान में मदद मिलेगी। कुल एनपीए में 70 प्रतिशत बड़े ऋण चूक के मामले हैं। इससे एनपीए के मोर्चे पर इससे स्पष्ट दिशा मिलेगी और सरकार दोषियों को सीधे घेरे में ला सकेगी।
सिर्फ 50 कंपनियां
फंसे कर्ज की यह राशि काफी बड़ी है। लेकिन एक सीमा में है। सैंकड़ों या हजारों कंपनियों ने यह समस्या पैदा की है। मुख्य रूप से बड़े एनपीए की समस्या 30 से 40 या अधिक से अधिक 50 कंपनियों तक सीमित है। इन 40-50 खातों का निपटान किया जाना है।’ तेज निर्णय प्रक्रिया के लिए संयुक्त ऋणदाता मंच (जेएलएफ) में बदलाव किया जा सकता है। मौजूदा जेएलएफ दिशानिर्देशों के अनुसार यदि पुनर्गठन पैकेज को मूल्य के हिसाब से 75 प्रतिशत बैंक और संख्या के हिसाब से 60 प्रतिशत ऋणदाता मंजूरी देते हैं, तो अन्य बैंकों को भी उसे मानना होगा। वित्त मंत्री अरुण जेटली ने पिछले सप्ताह कहा था कि रिजर्व बैंक के साथ  एनपीए निपटान व्यवस्था पर काम चल रहा है।
बैंकिंग कानून में संशोधन की सिफारिश
नयी दिल्लीः ऋण चूककर्ताओं के नाम सार्वजनिक करने के लिए भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम  समेत अन्य बैंकिंग कानूनों में संशोधन किया जाए ताकि बैंकों को एनपीए से निपटने में मदद मिल सके। वित्त मंत्रालय से एक संसदीय समिति ने यह सिफारिश की है। भारतीय स्टेट बैंक अधिनियम-1955 की धारा-44 और कुछ अन्य प्रावधान बैंकों को ऐसे व्यक्तियों के नाम सार्वजनिक करने से रोकते हैं जो बैंकों का पैसा रख लेते हैं या बैंक के फंसे कर्ज के लिए जिम्मेदार हैं। समिति ने वित्त मंत्रालय (वित्तीय सेवा विभाग) के उन दृढ़ कथनों पर भी  टिप्पणी की है जिसमें मंत्रालय ने कहा कि ऋण चूककर्ताओं के नाम सार्वजनिक  करने को लेकर संबंधित नियमों को संशोधित करने का कोई प्रस्ताव नहीं है। चूककर्ताओं के नाम भारतीय रिजर्व बैंक और क्रेडिट इंफोर्मेशन ब्यूरो लिमिटेड (सिबिल) के साथ साझा किया जाता है।
क्या कहा है समिति नेः  संसद की याचिका समिति ने कहा कि बुरे कर्ज की गंभीर स्थिति को देखते हुए जानबूझ कर ऋण चूक करने वालों से कड़ाई से निपटना चाहिए और उन पर बकाया राशि को एक निश्चित समयसीमा में वसूल किया जाना चाहिए।

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