पुरुषों के मुकाबले केवल आधी भारतीय महिलाएं ही निवेश को लेकर फैसले लेती हैं : रिपोर्ट

नई दिल्ली : डीएसपी म्यूचुअल फंड, शोध करने वाली एजेंसी नीलसन और डीएसपी विनवेस्टर पल्स 2019 के सर्वेक्षण के मुताबिक महिलाएं निवेश को लेकर स्वतंत्र फैसले नहीं ले पाती हैं।इस सर्वेक्षण में 4 महानगरों मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बैंगलोर, तथा 4 गैर-महानगरों इंदौर, कोच्चि, लुधियाना एवं गुवाहाटी को शामिल किया गया। इस अध्ययन में 25 से 60 वर्ष की आयु के 1853 पुरुषों और 2160 महिलाओं की प्रतिक्रियाओं को शामिल किया गया। अध्ययन में पाया गया कि 64% पुरुषों की तुलना में केवल 33% महिलाएं निवेश को लेकर स्वतंत्र निर्णय लेती हैं।

अपने निवेश के निर्णय स्वयं लेने वाली महिलाएं अपने पति (33%) या अपने माता-पिता (24%) के प्रोत्साहन के कारण ऐसा करती हैं। 13% महिलाओं ने बताया कि अपने पति की मृत्यु या तलाक के कारण उन्हें निवेश के संदर्भ में स्वयं निर्णय लेने के लिए विवश होना पड़ा। केवल 30% महिलाओं ने बताया कि उन्होंने निवेश से संबंधित निर्णय अपनी इच्छा के अनुसार स्वतंत्र रूप से लिए थे। सर्वेक्षण से यह भी पता चला है कि महिलाओं के पति (40%) उनके पिता (27%) की तुलना में उन्हें निवेश की शुरुआत हेतु प्रेरित करने में बड़ी भूमिका निभाते हैं। दूसरी ओर, 40% पुरुषों को उनके पिता द्वारा तथा 35% पुरुषों को उनके सहयोगियों द्वारा निवेश की शुरुआत करने के लिए प्रेरित किया जाता है।

अध्ययन के मुताबिक पुरुषों और महिलाओं के लिए सर्वाधिक महत्वपूर्ण लक्ष्य एक समान हैं, जिसमें बच्चों की शिक्षा, घर, बच्चों की शादी, कर्ज मुक्त जीवन तथा उच्च जीवन स्तर शामिल है। पुरुषों की तुलना में बच्चों से जुड़े लक्ष्यों की ओर महिलाओं का झुकाव थोड़ा अधिक होता है (उनके सर्वाधिक महत्वपूर्ण 3 लक्ष्यों में से 2 के तौर पर बच्चों की शिक्षा और बच्चों की शादी शामिल है, यह पुरुषों के लिए 31% और 26% की तुलना में महिलाओं के लिए 34% और 29% है)। महिलाओं की तुलना में पुरुष अपने उद्यम की शुरुआत करने तथा सेवानिवृत्ति की योजना बनाने के लक्ष्य को अधिक महत्व देते हैं यह पुरुषों के लिए क्रमशः 26% और 23% की तुलना में महिलाओं के लिए 23% और 20% है)। एक आश्चर्यजनक तथ्य भी सामने आया कि अविवाहित होते हुए भी महिलाएं अपने होने वाले के बच्चों के लक्ष्यों के लिए योजना बनाने पर विचार करती हैं (22% और 23% अविवाहित महिलाओं ने अपने बच्चे की शिक्षा और उसके विवाह की योजना बनाई थी। ये आंकड़े अविवाहित पुरुषों के लिए क्रमशः 16% और 12% थे)।

वहीं निवेश करने या कार या घर खरीदने के संबंध में निर्णय लेने की बात आने पर पुरुष हावी हो जाते हैं। दूसरी ओर सोने आभूषणों की खरीद, रोजमर्रा के घरेलू सामान तथा उपभोक्ता वस्तुओं की खरीद में महिलाओं की बड़ी भूमिका होती है। 31% पुरुषों की तुलना में केवल 12% महिलाओं ने बताया कि बाजार आधारित इंस्ट्रूमेंट्स (स्टॉक, इक्विटी म्यूच्यूअल फंड, आदि) में निवेश का निर्णय उन्होंने स्वय लिया, जो पुरुषों के मुकाबले 2.6 गुना कम है। दूसरी ओर 17% पुरुषों की तुलना में 28% महिलाओं ने कहा कि सोने आभूषणों की खरीद का निर्णय उन्होंने स्वयं लिया था। निवेश से संबंधित निर्णय लेने में किसी से सलाह लेने वाले लोगों की बात की जाए, तो केवल 42% महिलाओं ने एक पेशेवर वित्तीय सलाहकार से परामर्श किया (तुलनात्मक रूप से पुरुषों के लिए यह आंकड़ा 46% था)। अधिकांश पुरुषों (42%) और महिलाओं (50%) ने बताया कि, वित्तीय सलाहकारों के परामर्श लेने के बारे में विचार करते समय हुए लैंगिक दृष्टि से तटस्थ थे, जबकि पुरुषों (55%) और महिलाओं (31%), दोनों ने इस संदर्भ में पुरुष सलाहकारों से परामर्श लेने को इसके बाद प्राथमिकता दी। महिला वित्तीय सलाहकारों की बात की बात की जाए, तो पुरुषों की तुलना में 6 गुना अधिक महिलाओं ने उन्हें पसंद किया (19% महिला बनाम 3% पुरुष)।

इस अध्ययन का एक उत्साहजनक अवलोकन यह था कि 65% उत्तरदाताओं ने बताया कि उन्होंने 25 साल की उम्र से पहले ही निवेश करना शुरू कर दिया था। बड़ी संख्या में उत्तरदाताओं (76%) ने बताया कि 25 साल की उम्र से पहले निवेश की शुरुआत करना आदर्श है। जहां तक उनके बच्चों का संबंध था, ज्यादातर उत्तरदाताओं का मानना था कि बच्चों को कम उम्र में ही- अर्थात कॉलेज के दिनों में अथवा जब नौकरी की शुरुआत के तुरंत बाद निवेश के फैसले लेने शुरू कर देने चाहिए। वास्तव में, 65% उत्तरदाताओं ने माना कि बच्चों को 20 साल की उम्र से पहले ही निवेश के बारे में पढ़ाया जाना चाहिए। इस मौके पर अदिति कोठारी देसाई, निदेशक एवं प्रमुख- बिक्री, विपणन व ई-व्यवसाय, डीएसपी इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स प्राइवेट लिमिटेड ने कहा कि महिलाएं अपने निवेश संबंधी निर्णयों की जिम्मेदारी लेने को लेकर आशंकित महसूस कर सकती हैं, जो शायद प्रारंभिक वित्तीय शिक्षा की कमी, आत्मविश्वास की कमी या फिर इस बात को स्वीकार करने की वजह से है कि निवेश उनका कार्यक्षेत्र नहीं है। सर्वेक्षण के मुताबिक ज्यादातर महिलाओं को उनके पिता की तुलना में उनके पतियों द्वारा निवेश के लिए प्रेरित किया जाता है।

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