पीएम की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य ने कहा, पर्याप्त नहीं है सरकार द्वारा दिया गया राहत पैकेज

मानव पूंजी बरकरार रहे तो आपदा के बाद भी अर्थव्यवस्था में सुधार हो सकता है

नई दिल्ली : कोरोना वायरस महामारी से हुए नुकसान के बाद अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया 20.97 लाख करोड़ रुपये का राहत पैकेज पर्याप्त नहीं है। ये बातें पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री की वर्चुअल आयोजन में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य आशिमा गोयल ने कही।

प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद की सदस्य गोयल ने कहा कि राहत पैकेज का अधिकतर हिस्सा वित्तीय क्षेत्र से जुड़ा है, जबकि अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने के लिए मांग और आपूर्ति में तालमेल लाना बहुत जरूरी है। गोयल ने कहा कि कोरोना वायरस महामारी भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अस्थायी झटका है। मानव पूंजी बरकरार रहती है, तो झटके के बाद तेजी से सुधार देखने को मिलता है।

भारतीय अर्थव्यवस्था वित्त वर्ष 2019-20 में 4.2 फीसद की दर से बढ़ी है, जो पिछले 11 वर्षों में सबसे धीमी ग्रोथ है। वहीं, देश के विदेशी मुद्रा भंडार के 500 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गई है, इस बारे में गोयल ने कहा कि हमारा विदेशी मुद्रा भंडार उधार का भंडार हैं। विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने का सबसे अच्छा तरीका निवेश को आकर्षित करना है।

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