नौकरीपेशा को टैक्स में राहत दे सकती है सरकार

नई दिल्ली : कॉरपोरेट टैक्स में कटौती के बाद अब केंद्र सरकार नौकरीपेशा लोगों को राहत देने जा रही है। वित्त मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक टैक्स टास्क फोर्स की सिफारिश को लेकर इन दिनों वित्त मंत्रालय में बैठक चल रही है और जल्द ही इस पर कोई अंतिम फैसला लिया जा सकता है। अक्टूबर के दूसरे हफ्ते में इनकम टैक्स में बड़ी छूट मिल सकती है।

सूत्रों के मुताबिक हाल ही में इस बात को लेकर वित्त मंत्रालय और सीबीडीटी अधिकारियों के बीच बैठक हुई, जिसमें टास्क फोर्स की सिफारिश को लेकर चर्चा की गई है, लेकिन इसपर आम सहमती क्या बनी अभी जानकारी नहीं मिली।  इस बैठक की रिपोर्ट वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को सौंपी गई है और जल्द ही इनकम टैक्स को लेकर बड़ी राहत सामने आ सकती है। डायरेक्ट टैक्स में बदलाव को लेकर टैक्स टास्क फोर्स ने पिछले महीने सिफारिशें वित्त मंत्रालय को सौंपी थी, इस पर इनकम टैक्स में बदलाव की समीक्षा हो रही है। सिफारिशों का मकसद छोटे और मझोले टैक्सपेयर्स को राहत पहुंचाना है। टैक्स में राहत मिलने से लोगों के हाथ में ज्यादा पैसा आएगा और खर्च करने की क्षमता में भी इजाफा होगा और इससे डिमांड और कंजम्पशन दोनों ही बढ़ेगी।

5 लाख तक सालाना इनकम होगी टैक्स फ्री
टास्क फोर्स की सिफारिशों के मुताबिक इनकम टैक्स का नया स्लैब बनाया जाए और जिसमें स्लैब की शुरुआत 5 लाख से हो सकती है। यानी 5 लाख तक की सालाना कमाई पर कोई टैक्स नहीं लगे। अभी 2.50 लाख रुपए तक की आय टैक्स फ्री है और 2.50 लाख से 5 लाख रुपए की इनकम पर टैक्स देना होता है। साथ ही सालाना 5-10 लाख की आय पर टैक्स की दर 10 फीसदी होनी चाहिए। फिलहाल इस स्लैब पर 20 फीसदी टैक्स लगता है और 10 से 20 लाख रुपए तक की आय पर 20 फीसदी टैक्स लगाया जाना चाहिए, जो अभी 30 फीसदी है।

35 फीसदी का नया टैक्स स्लैब आ सकता है
टास्क फोर्स की सिफारिश के मुताबिक 2 करोड़ रुपए से ज्यादा की सालाना आमदनी होती है तो 35 फीसदी का टैक्स लिया जाए और इनकम टैक्स के स्लैब में एक और नया स्लैब जोड़ दिया जाए। साथ ही टैक्स पर लगने वाले सभी तरह के सरचार्ज और सेस को भी हटाने की सिफारिश की गई है।

टैक्स में राहत
अगर सरकार कमेटी के सुझाव पर अमल करती है तो लोगों को टैक्स के बोझ से राहत मिलेगी और टैक्स कम होने से लोगों की बचत बढ़ेगी। नौकरीपेशा वर्ग के पास पैसा होगा तो खर्च करने की क्षमता बढ़ेगी और जिससे खपत और मांग बढ़ेगी। गौर करने वाली बात यह है कि दरों में कटौती से सरकारी खजाने पर असर पड़ेगा, लेकिन माना जा रहा है कि 2 से 3 साल में इसकी भरपाई हो जाएगी और स्थिति सामान्य होगी।

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