नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया बना विश्व का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज

नई दिल्ली : नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनएसई), वायदा कारोबार से जुड़ी एक संस्था फ्यूचर इंडस्ट्री एसोसिएशन (एफआईए) द्वारा आंकड़ों के मुताबिक अनुबंधों की संख्या के लिहाज से सीएमई समूह को 2019 में पीछे छोड़कर विश्व की सबसे बड़ा डेरिवेटिव (वायदा) एक्सचेंज बन गई। वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंज (डब्ल्यूईएफ) द्वारा जारी आंकड़ों के मुताबिक नकदी इक्विटी खंड में कारोबार की संख्या के लिहाजसे भी एनएसई वैश्विक स्तर पर तीसरे स्थान पर रही।

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इस मौके पर एनएसई के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्यकारी विक्रम लिमये ने कहा कि यह हम सबके लिए और हमारे देश के लिए सचमुच फ़ख़्र का क्षण है कि एनएसई वैश्विक स्तर पर अग्रणी एक्सचेंज बनकर उभरी है और इसने सबसे बड़े वायदा एक्सचेंज और नकदी इक्विटी कारोबार के लिहाज़ से तीसरे सबसे बड़े एक्सचेंज होने का गौरव हासिल किया है। हम सरकार, नियामकों और अपने सम्बद्ध पक्षों से मिल रहे सहयोग के आभारी हैं। हमारी उपलब्धियां सरकार और नियामक की सहयोगी नीतियों, आधुनिकतम प्रौद्योगिकी बुनियादी ढांचा, मज़बूत जोखिम प्रबंधन ढांचा, व्यापक विश्वसनीयता और वैश्विक एवं घरेलू निवेशकों की भागीदारी की बदौलत संभव हुईं।

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उन्होंने कहा कि भारत की वृद्धि और 2024 -25 तक पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने का लक्ष्य हासिल करने के लिए बाजार का विकास महत्वपूर्ण है। मज़बूत पूँजी बाज़ार न सिर्फ वृद्धि की संभावना के लिए बल्कि हमारे युवाओं के लिए रोज़गार पैदा करने के लिए भी महत्वपूर्ण है। एनएसई सभी परिसंपत्ति वर्ग के लिए मज़बूत बाज़ार बनाने पर केंद्रित है। पिछले पांच साल में नकदी इक्विटी खंड में 90 प्रतिशत से अधिक वृद्धि हुई है। साल 2015 में जो रोज़ाना औसत कारोबार क़रीब 17,572 करोड़ रूपये था वह साल 2019 में बढ़कर करीब 34,264 करोड़ रूपये हो गया। इसी अवधि में इक्विटी डेरिवेटिव औसत कारोबार साल 70 प्रतिशत बढ़ा और साल 2019 में यह 88,772 करोड़ रूपये हो गया जो 2015 में करीब 52,371 करोड़ रूपये था।

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वायदा और नकदी बाज़ार कारोबार का अनुपात निरंतर करीब तीन गुना बना रहा। इसके अलावा इस अवधि में एनएसई में नकदी बाज़ार में हुए कारोबार का आपूर्ति प्रतिशत करीब 60 प्रतिशत रहा। वैश्विक स्तर और भारत में हुए अनुसन्धान से साबित होता है कि वायदा बाज़ार का नकदी बाजार के कारोबार पर लाभकारी असर होता है। नकदी इक्विटी और वायदा के आकार में वृद्धि भारत में इक्विटी बाज़ार के विस्तार के मद्देनज़र हो रही है। एनएसई में पिछले पांच साल के दौरान नकदी इक्विटी खंड में 1.2 करोड़ नए निवेशकों का पंजीकरण हुआ है जिसमें से करीब 87 लाख पंजीकरण पिछले तीन साल में हुए हैं। यह भी स्पष्ट हुआ कि एक तिहाई निवेशक नए निवेशक छोटे शहरों और कस्बों से आये हैं जो मोबाइल और इंटरनेट ट्रेडिंग के ज़रिये जुड़े।

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