निजी क्षेत्र और उपक्रमों को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार तेज करना चाहती है सरकार

नई दिल्ली : केंद्र सरकार निजी क्षेत्र और निजी उपक्रमों को बढ़ावा देकर आर्थिक वृद्धि की रफ्तार बढ़ाने पर जोर दे रही है। इस बारे में नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने ‘भारत निवेश संगोष्ठी’ को संबोधित करते हुए कहा कि भारत अगले पांच साल के दौरान ‘एक बड़े बदलाव के मुहाने’ पर खड़ा है।उन्होंने कहा कि 2011 से निजी निवेश काफी सुस्त हुआ है और सार्वजनिक निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल ठीक से काम नहीं कर रहा है।

बड़ी संख्या में पीपीपी उद्यम अब गैर निष्पादित आस्तियों (एनपीए) में बदल चुके हैं, जो कि निजी क्षेत्र के लिए काफी जोखिम है। परियोजनाओं से संबंधित कई जोखिम है और भूमि अधिग्रहण भी काफी महंगा हो चुका है और निवेश से जीडीपी अनुपात कम हुआ है।उन्होंने कहा कि सरकार निजी क्षेत्र के उपक्रम को बढ़ावा दे रही है, जिससे वे अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका निभा सके। सरकार का मानना है कि वह खुद देश में वृद्धि का प्रमुख ‘इंजन’ बने यह संभव नहीं है, ऐसे में मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में सात फीसद से अधिक वृद्धि पर ध्यान दे रही है। भारत ने आठ फीसद की वृद्धि भी हासिल की है। यह निजी क्षेत्र और निजी उपक्रमों की अगुवाई में हासिल हुई है।

कुमार ने कहा कि अगले पांच साल में भारत एक बड़े बदलाव की दिशा में आगे बढ़ेगा। ऐसा होने पर एक दशक से अधिक तक ऊंची वृद्धि देखने को मिलेगी। यह वृद्धि समावेशी और निरंतर होगी। नोटबंदी और जीएसटी जैसे पहलों से अर्थव्यवस्था पहले से अधिक व्यवस्थित हुई है। निजी क्षेत्र को अधिक जगह देने की जरूरत है। यही वजह है कि बजट में भी विनिवेश, संपत्ति मौद्रिकरण के लिए ऊंचा लक्ष्य रखा गया और साथ ही रेलवे में भी निजी क्षेत्र को प्रोत्साहित किया गया है।

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