मार्च में सुस्त पड़ीं विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां

नयी दिल्लीः मार्च में देश के विनिर्माण क्षेत्र की गतिविधियां सुस्त पड़ीं जिससे इसका सूचकांक घटकर छह माह के निचले स्तर 52.6 पर आ गया। इससे पहले फरवरी में सूचकांक तेज छलांग लगाकर 14 माह के उच्चतम स्तर 54.3 पर रहा था। विनिर्माण कंपनियों के खरीद प्रबंधकों के बीच किये जाने वाले मासिक सर्वेक्षण ‘निक्केई इंडिया मैन्यूफैक्चरिंग पर्चेजिंग मैनेजर इंडेक्स’ (पीएमआई सूचकांक) लगातार 20वें माह 50 के ऊपर रहा है। सूचकांक का 50 से ऊपर रहना कारोबारी गतिविधियों में तेजी और 50 से नीचे रहना गिरावट का सूचक है।
क्या रहा कारण
इस वर्ष पहली बार मार्च में विनिर्माण गतिविधियां सुस्त पड़ी हैं। ऑर्डर में कमी से विनिर्माण क्षेत्र में रोजगार सृजन की दर मार्च में आठ माह के निचले स्तर पर आ गयी। इस दौरान क्षेत्र में संचालन स्थिति में सुधार हुआ है लेकिन नये ऑर्डर में छह माह के बाद इतनी गिरावट आयी है। कंपनियों के मुताबिक विपणन के सफल प्रयास से तथा थोक मांग आने से बिक्री की उम्मीदें बढ़ीं लेकिन प्रतिस्पर्धात्मक माहौल और आगामी लोकसभा चुनाव के कारण नये ऑर्डर में कमी आयी। हालांकि, अंतरराष्ट्रीय बाजारों में बिक्री बढ़ने से विदेशों से निर्यात के नये ऑर्डर मिलने में मदद मिली।
लागत दर व बिक्री
मार्च में कंपनियों की लागत दर और बिक्री मूल्य में मामूली तेजी दर्ज की गयी। कारोबारी धारणा सात माह के उच्चतम स्तर पर रही। भारतीय विनिर्माताओं ने आने वाले 12 महीने में बाजार की बेहतर स्थिति का अनुमान जताया है। उनके मुताबिक विपणन संबंधी पहलों, क्षमता विस्तार योजनाओं और चुनाव के बाद अनुकूल नीतियों से उत्पादन की दर बढ़ेगी। रिपोर्ट की लेखिका पॉलियाना डी लिमा ने कहा,‘सूचकांक से पता चलता है कि मार्च में विनिर्माण क्षेत्र का विस्तार घटा है। हालांकि, मजबूत कारोबारी धारणा के कारण आने वाले समय में रोजगार सृजन बढ़ेगा और विस्तारवादी सार्वजनिक नीतियों से विनिर्माण क्षेत्र जल्द ही पटरी पर लौट आयेगा।’

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