देशभर में प्याज की कीमतें बढ़ी, सरकार ने की समीक्षा बैठक

नई दिल्ली : इस सीजन में प्याज की पैदावार में आई है, भारी गिरावट के चलते इसके कीमत 80 रुपये प्रति किलो हो गया है। महंगाई को रोकने के लिए सरकार ने हर संभव कदम उठाने की तैयारी की है। आयात नियमों में पर्याप्त ढील दी गई है, जिससे प्याज की क्वालिटी समेत अन्य कई तरह की जांच-परख में अतिरिक्त समय न लगे।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले व खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने आज प्याज की आपूर्ति बढ़ाने के लिए समीक्षा बैठक की। पासवान ने माना कि खरीफ सीजन के प्याज के उत्पादन में 30 से 40 फीसद तक की कमी आने की आशंका है। दरअसल, बेमौसम बारिश की वजह से खेतों में खड़ी फसल को ज्यादा नुकसान हुआ है। इसके चलते घरेलू बाजार में कीमतें चढ़ गई हैं। पासवान के मुताबिक विदेश से प्याज आयात करने की प्रक्रिया को आसान बनाया गया है। अफगानिस्तान, मिस्र, तुर्की और ईरान के दूतावासों को प्याज आयात में तत्काल मदद करने का निर्देश दिया गया है।

पासवान ने बताया कि इस महीने के आखिर तक प्याज का भाव नीचे आएगा। आपको बता दें कि व्यापारियों व जमाखोरों पर लगाम कसने के लिए स्टॉक सीमा तय कर दी गई है, जबकि सरकारी गोदामों में पड़े प्याज के स्टॉक को 23.90 रुपये प्रति किलो की दर से उपभोक्ताओं को बेचा जा रहा है। पासवान ने कहा कि बफर स्टॉक में 57 हजार टन प्याज था, जो रियायती दरों पर बेचा जा रहा है। इस स्टॉक का 25 फीसद हिस्सा खराब हो गया।

केंद्रीय बफर स्टॉक में अभी भी 1,525 टन प्याज बचा हुआ है। उपभोक्ता मामले विभाग के सचिव अविनाश कुमार श्रीवास्तव ने कहा कि वर्ष 2019 के खरीफ सीजन में प्याज के उत्पादन में 20 लाख टन की कमी आई है और महाराष्ट्र में बारिश के चलते उत्पादन में गिरावट आई है।

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