दिवालिया कानून संशोधन में बदलाव को मिली मंजूरी, ये होगा नया नियम

नई दिल्ली : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इन्सॉल्वेंसी एंड बैंक्रप्सी कानून (आइबीसी) में संशोधन के एक प्रस्ताव को स्वीकृति दे दी है। कैबिनेट ने सरकारी बैंकों को एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस बैंकों के ऊंची रेटिंग वाली संपत्तियां खरीदने के अधिकार को भी मंजूरी दी है। आइबीसी में इस बदलाव की लंबे समय से मांग चल रही थी। अब दिवालिया होने वाली कंपनियों के नए प्रमोटर्स को पुरानी कंपनी या उसके प्रमोटर्स पर चल रहे आपराधिक मामलों से मुक्त रखा जाएगा।

इन्सॉल्वेंसी मामलों के जानकार और आइसीएआइ के पूर्व काउंसिल सदस्य व सीए विजय कुमार गुप्ता का कहना है कि इससे मामलों को निपटाने की रफ्तार बढ़ेगी और नए प्रमोटर्स की रुचि भी बढ़ेगी। कैबिनेट ने सरकारी बैंकों को मजबूत वित्तीय स्थिति वाली एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनेंस कंपनियों की उच्च रेटिंग वाली संपत्तियां खरीदने का अधिकार देने वाली स्कीम को भी स्वीकृति प्रदान कर दी। इस पार्शियल क्रेडिट गारंटी स्कीम के दायरे में पहली अगस्त, 2018 से एक वर्ष पहले तक एसएमए-0 केटेगरी में शामिल एनबीएफसी और एचएफसी आएंगी।

दरअसल सरकार के इस प्रस्ताव का आशय दिवालिया कंपनियों के निपटाने में आ रही दिक्कतों को दूर करने पर था। सरकार का साफ कहना है कि इसी वजह से आइबीसी (द्वितीय संशोधन) विधेयक, 2019 का प्रस्ताव किया गया था और यह कदम कॉरपोरेट इन्सॉल्वेंसी के प्रस्तावों के निपटारों में आ रही दिक्कतों को दूर करेगा। जानकारों के मुताबिक दिवालिया प्रक्रिया के लिए प्रस्तावित कंपनियों में खरीदार इसलिए दिलचस्पी नहीं ले रहे थे, क्योंकि वे कंपनी के पुराने मामलों की जिम्मेदारी नहीं लेना चाहते थे।

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