तीसरी सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी, कीमत 65 हजार करोड़

मुंबईः ‌अरबपति अनिल अंबानी के स्वामित्व वाली कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) और मैक्‍सिस ग्रुप की एयरसेल के विलय को आरकॉम के बोर्ड ने बुधवार को मंजूरी दे दी है। विलय के साथ ही दोनों कंपनीयों के बीच एक महागठबंधन का आगाज हो गया है। दूरसंचार क्षेत्र के विश्लेषकों के मुताबिक ग्राहकों के आधार के लिहाज के मद्देनजर विलय के बाद अब यह कंपनी देश की तीसरी सबसे बड़ी कंपनी बन जाएगी तथा टेलिकॉम सेक्‍टर में स्थिरता आने के कारण अन्य कंपनियों के बीच प्रतिस्‍पर्धा बढ़ेगी।

काॅरपोरेट जगत में शीर्ष स्‍थान

इससे पूर्व अगस्त में दोनों कंपनियों (आरकॉम- एयरसेल) के बीच विलय की शर्तों के बारे में दस्तावेज को अंतिम रूप दिया जा चुका था। तकनीकी तौर पर कारोबारी विलय के पूरे होने में चार से छह महीना का समय लगने की संभावना है। रिलायंस कम्‍युनिकेशंस तथा मैक्सिस कम्‍युनिकेशंस नई कंपनी में 50-50 फीसदी हिस्सेदारी रहेगी, दोनों की कंपनी के बोर्डों और समितियों में बराबर ‌की हिस्‍सेदारी होगी। नई कंपनी के पास देश में 850, 900, 1800 तथा 2,100 मेगाहर्ट्ज के बैंड में दूसरा सबसे बड़ा स्‍पेक्‍ट्रम होगा। इसके अलावा कंपनी की कुल संपत्ति 65 हजार करोड़ रुपये हो जाएगी तथा कॉरपोरेट जगत में भी यह शीर्ष स्‍थान हासिल कर लेगी।

कंपनी की कर्ज में भी रिहाई

रिलायंस कम्युनिकेशंस के मुताबिक विलय के बाद कंपनी के कर्ज में 20000 करोड़ रुपये की कमी आएगी। जो कुल कर्ज के 40 फीसदी से अधिक है। इसके अलावा एयरसेल के कर्ज में भी 4000 करोड़ की कमी होगी। दोनों कंपनियां इंटरनैशनल प्लेयर्स से भी निवेश को लेकर बातचीत कर रही हैं।

उपभोक्ताओं के मामले में तीसरे स्‍थान पर

वर्तमान में रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के 9.87 करोड़ उपभोक्‍ताओं है, वहीं एयरसेल के 8.8 करोड़ उपभोक्ता हैं तथा वह देश का आठवां सबसे बड़ा टेलिकॉम ऑपरेटर है। दोनों कंपनियों के कारोबार के विलय होने के कारण कंपनी देश की तीसरी सबसे बड़ी टेलिकॉम कंपनी बन जाएगी। वर्तमान में देेश में भारती एयरटेल के उपभोक्ता सबसे अधिक हैं जिसके बाद वोडाफोन ने अपना स्‍थान दर्ज किया है। दोनों कंपनियों को बोर्ड और समितियों में बराबर का प्रतिनिधित्व होगा।

इंटरनेट सेवाओं का विस्तार

एयरसेल के साथ विलय के सौदे का बहुस्वामित्व मलेशिया की मैक्सिस कम्युनिकेशंस के पास होगा, जो रिलायंस कम्युनिकेशंस की पहुंच को 3जी एयरवेव्स तक विस्तारित करने की योजना बना रही है। इसके अलावा कंपनी अपने पोर्टफोलियो में 4जी क्षमता को भी शामिल करेगी।

दूरसंचार क्षेत्र में भारत दूसरा सबसे बड़ा

पिछले वर्ष दिसंबर में दोनों कंपनियों ने विलय के लिए 90 दिनों के ‘एक्‍सक्‍लूसिविटी पीरियड’ में प्रवेश की घोषणा की थी जिससे रिलायंस कम्‍युनिकेशंस के टॉवर और ऑप्टिकल फाइबर संपत्तियां बाहर रहेंगी। मोबाइल कनेक्‍शंस की संख्‍या के मामले में भारत, चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा टेलिकॉम बाजार है।

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