डिजिटल इंडिया के साथ बढ़ेगा रोजगार :रिसर्च रिपोर्ट

नई दिल्ली : मोदी सरकार के वापसी के बाद डिजिटल स्पेस ने गति पकड़ ली है। लोगों ने माना है मौजूदा सरकार के अगले पांच साल के कार्यकाल के दौरान डिजिटल इंडिया सभी क्षेत्रों में रोजगार बढ़ाकर, बेरोजगारी को कम करने में महत्वलपूर्ण योगदान देगा। विवोकी इंडिया, रिसर्च एनालिटिक्स और नॉलेज प्रोसेसिंग स्टार्टअप द्वारा महानगरों में रहने वाले 5000 लोगों के बीच किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय द्वारा किए गए आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण में रोजगार बाजार में चिंताजनक रुझानों को उजागर करते हुए कहा गया था कि शहर में नौकरी चाहने वालों युवाओं के बीच बेरोजगारी की दर बढ़ रही है। सर्वेक्षण में सबसे अधिक प्रतिक्रिया सामाजिक सुरक्षा और सुरक्षा के संबंध में आई क्योंकि 82% लोगों ने महसूस किया कि यह दोनों चार्ट में सबसे ऊपर होने चाहिए।

यह सर्वेक्षण डिजिटल इंडिया-युवा-वर्तमान सरकार की मांग और अपेक्षा को उजागर करने के लिए किया गया था। दीपा सयाल, कार्यकारी निदेशक, विवोकी इंडिया और निदेशक और सह-संस्थापक, एडीजी ऑनलाइन सॉल्यूशंस के अनुसार ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में सुधार लाने के अथक प्रयास किए जाने के बावजूद संयुक्त राष्ट्र ई-गवर्नेंस इंडेक्स के अनुसार, भारत ई-गवर्नेंस में दुनिया में 107 वें स्थान पर है। स्वास्थ्य, शिक्षा, श्रम और रोजगार, वाणिज्य, आदि से संबंधित क्षेत्रों में लोगों को सशक्त बनाने के लिए सूचना प्रौद्योगिकी की शुरुआत की दिशा में पूर्व में अनेक पहल की गई हैं। हम इंटरनेट उपयोगकर्ताओं की संख्या और बेहतर ई-गवर्नेंस में स्पष्ट रूप से अंतर देख सकते हैं। फिर भी भारत के कई हिस्सों में डिजिटल इल्लिटरेसी निरक्षरता कायम है। ‘डिजिटल इंडिया’ तभी एक सफलता होगी, जब इसका लाभ भारत के प्रत्येक नागरिक को मिलेगा।

इसके अलावा, 74% रेस्पोंडेंट (प्रतिक्रियादाताओं) का मानना है कि यदि वर्तमान सरकार डिजिटल साक्षरता के माध्यम से नागरिकों के सशक्तिकरण और डिजिटल स्किलसेट (कौशल) को सार्वभौमिक पहुंच (यूनिवर्सल एक्सेस) दिलाने का कार्य करती है तो रोजगार कम होने के डर को संभाला जा सकता है। डिजिटल इंडिया, भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान अर्थव्यवस्था में बदलने का कार्यक्रम है। डिजिटल इंडिया प्रोग्राम को 1 जुलाई, 2015 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा लॉन्च किया गया था। यह अभियान भारत सरकार की अन्य प्रमुख योजनाओं जैसे कि मेक इन इंडिया और स्टार्ट-अप इंडिया और इस प्रकार की अनेक महत्व पूर्ण योजनाओं के लिए हिताधिकारी और लाभार्थी दोनों है। सत्तर प्रतिशत शहरी रेस्पोंडेंट(प्रतिक्रियादाता) को लगता है कि मौजूदा सरकार को भविष्य में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में योगदान देने और अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए ग्रामीण इंटरनेट भागीदारी को और अधिक बढ़ावा देना चाहिए।

सर्वे में लोगों ने बताया कि वर्तमान सरकार को समग्र सीएजीआर में सुधार करने के लिए भारत की इकोनॉमी को कैशलेस बनाने की दिशा में काम करना चाहिए, तो केवल 53% लोगों ने कैशलेस इकॉनोमी का समर्थन किया, जबकि 44% इसके खिलाफ थे। नई सरकार को इसके लिए सर्वोच्च प्राथमिकता देने के संबंध में टेली मेडिसिन और मोबाइल हेल्थकेयर सुविधाओं की प्रतिक्रिया भी उदासीन थी, क्योंकि केवल 52% उत्तरदाताओं ने हाँ कहा और 38% ने नहीं कहा।

शेयर करें

मुख्य समाचार

नीम का तेल है बहुत उपयोगी, इन समस्याओं में है कारगर

नई दिल्ली : नीम एंटी बैक्टीरियल गुणों से भरपूर होता है, जिसके कारण यह कई स्वास्थ समस्याओं के लिए अचूक दवा मानी जाती है। सर्दियों आगे पढ़ें »

International Film Festival of India

भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का जल्द होगा आगाज,यह वर्ष है कुछ खास

नई दिल्ली : गोवा में आयोजित होने वाले भारतीय अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव (आईएफएफआई) का समय आ गया है। इस वर्ष का महोत्सव कुछ खास है आगे पढ़ें »

ऊपर