टेलीकॉम क्षेत्र को कोई मारना नहीं चाहता, सरकार से अभी नहीं मिला है कोई निर्देश: कुमार

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नई दिल्ली :  टेलीकॉम क्षेत्र को कोई मारना नहीं चाहता। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक को इस मुद्दे पर अभी सरकार से कुछ भी सुनने को नहीं मिला है। ये बातें स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने एक बयान में कही। कुमार ने कहा कि इस महीने की शुरुआत में कहा था कि दूरसंचार क्षेत्र पर एसबीआई का 29,000 करोड़ रुपये बकाया है। इसके अलावा इस क्षेत्र की बैंक गारंटी में इस बैंक के 14,000 करोड़ रुपये लगे हुए हैं।
दूरसंचार कंपनियां बकाये का भुगतान नहीं करती हैं, तो सरकार बैंक गारंटी भुना सकती है। इस मामले पर पिछले सप्ता ह दूरसंचार कंपनियों और सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों के बीच कई बैठकें हुई।

आपको बता दें कि कर्ज के बोझ से दबी दूरसंचार कंपनियों पर सुप्रीम कोर्ट के हालिया निर्णय के बाद 1.47 लाख करोड़ रुपये सरकारी बकाए के भुगतान का दबाव बढ़ गया है। कुमार ने कहा कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने इसी महीने दूरसंचार कंपनियों से स्पेक्ट्रम शुल्क और सकल समायोजित राजस्व के मद का कुल 1.47 लाख करोड़ रुपये का सांविधिक बकाया 17 मार्च तक जमा करने को कहा है।

इतनी बड़ी राशि के बकाए के भुगतान का असर कंपनियों के हालत पर पड़ सकता है। अकेले वोडाफोन-आइडिया पर, दूरसंचार विभाग के अनुमान के अनुसार 53,000 करोड़ रुपये का बकाया है। सरकार ने टेलीकॉम कंपनियों से एजीआर के स्व-मूल्यांकन का समर्थन करने वाले दस्तावेज जमा करने के लिए कहा है, जिसके आधार पर उन्होंने अपने ऊपर सांविधिक बकायों की गणना की है।

वहीँ टेलिकॉम इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इससे दूरसंचार विभाग को टेलीकॉम कंपनियों द्वारा एजीआर की गणना की जांच में मदद मिलेगी। भारती एयरटेल, वोडाफोन आइडिया और टाटा टेलीसर्विसेज को एजीआर की गणना के दावे के समर्थन में उचित दस्ताभवेज उपलब्ध् कराने को कहा गया है।

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