जैविक खेती में भारत दुनिया का नौवां सबसे बड़ा देश, फिर भी निर्यात में सबसे पीछे

नई दिल्ली : एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में सर्वाधिक ऑर्गेनिक खेती का रकबा होने के बावजूद वैश्विक बाजार में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है। एक्सपोर्ट ऑफ ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स : चैलेंजेज एंड अपॉच्र्युनिटीज’ की रिपोर्ट के मुताबिक कृषि क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने और किसानों की आमदनी को बढ़ाने में ऑर्गेनिक उपज का निर्यात मददगार साबित होगी।

ऑर्गेनिक प्रोडक्शन जोन और ई-ऑर्गेनिक बाजार स्थापित किए जाएं

कृषि क्षेत्र के इन परस्पर विरोधी आंकड़ों पर संसदीय समिति ने चिंता जताते हुए इन उत्पादों के निर्यात को प्रोत्साहित करने के लिए ऑर्गेनिक प्रोडक्शन जोन और ई-ऑर्गेनिक बाजार स्थापित करने का सुझाव दिया है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय की स्थायी संसदीय समिति ने राज्यसभा में अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करते हुए रासायनिक खाद पर दी जाने वाली सब्सिडी ऑर्गेनिक खेती करने वाले किसानों को भी मुहैया कराने का सुझाव दिया है, जिससे उनकी लागत घट सके।

अंतरराष्ट्रीय बाजार में जैविक उत्पादों की सर्वाधिक मांग 

समिति ने यह भी सुझाव दिया कि पूर्वोत्तर के राज्यों के साथ पहाड़ी और आदिवासी क्षेत्रों में ऑर्गेनिक खेती के लिए बुनियादी सुविधाएं दी जाएं और ऑर्गेनिक उत्पादों का निर्यात बढ़ाने के लिए वैश्विक बाजार में ब्रांड वैल्यू स्थापित की जाएं। जैविक खेती के की उपज के मामले में भारत दुनिया का नौवां सबसे बड़ा देश है। यहां सर्वाधिक लघु व सीमांत किसान हैं, जिनके लिए इस तरह की खेती काफी लाभप्रद हो सकती है, लेकिन वैश्विक बाजार में जगह बनाने के लिए उत्पादों की गुणवत्ता का बेहद महत्वपूर्ण स्थान होता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जैविक उत्पादों की सर्वाधिक मांग है।

ऑर्गेनिक खेती में ये है बाधा 

राज्यसभा सदस्य वी. विजयदेसाई रेड्डी की अध्यक्षता वाली 31 सदस्यीय स्थायी संसदीय समिति ने टएक्सपोर्ट ऑफ ऑर्गेनिक प्रोडक्ट्स : चैलेंजेज एंड अपॉच्र्युनिटीज’ विषय पर अपनी सिफारिशें पेश करते हुए कहा कि लगभग सवा साल में कुल सात बैठकें कीं और इस दौरान उन्होंने कॉमर्स, कृषि व किसान कल्याण, फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्रीज, टेक्सटाइल्स, राज्य सरकारें, जैविक किसान संगठनों और एजेंसियों के साथ रिसर्च, ट्रेड और निर्यात संगठनों से लंबी चर्चा की है। पहले ऑर्गेनिक राज्य सिक्किम का दौरा भी किया और जैविक खेती की चुनौतियों को चिन्हित किया है। इनमें छोटी जोत, अधिक लागत, बायो फर्टिलाइजर, बायो पेस्टिसाइड व अन्य बायो खाद का महंगा होना और उपज के लिए उचित बाजार न होना प्रमुख हैं और खेती के लिए सर्टिफिकेट मिलना बहुत महंगा होने के साथ नीतिगत समर्थन का न मिलना भी इसमें बाधा है।

पूर्वोत्तर के राज्यों में हैं संभावनाएं

समिति के रिपोर्ट के मुताबिक विश्व बाजार में जैविक उत्पादों की जबर्दस्त मांग है और इसके लिए ऑर्गेनिक प्रोडक्शन जोन (ओपीजेड) बनाया जाना चाहिए। समिति ने बताया कि पूर्वोत्तर के राज्यों में जैविक खेती की पर्याप्त संभावनाएं हैं।जैविक उत्पादों के लिए बाजार मुहैया कराया जाए और तत्काल ई-बाजार स्थापित किया जाएं। इससे जैविक खेती के लिए किसान जुड़ेंगे।

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