जीएसटी पंजीकरण में भूल? ऐसे करें सुधार

जीएसटी लागू होने में दो दिन शेष

नई दिल्ली: व्यापारियों में जीएसटी को लेकर गलतफहमी है कि अगर उन्होंने एक रजिस्ट्रेशन कर दिया है और इसमें कोई भूल हो गई है तो इसमें कोई बदलाव नहीं हो सकता और पूरा जीएसटी रजिस्ट्रेशन दोबारा करना होगा। लेकिन विशेषज्ञों ने सन्मार्ग को बताया कि रजिस्ट्रेशन के समय या उसके बाद भी आवेदन में दिए किसी भी विवरण में बदलाव कर सकते हैं या उसमें हुई भूल का सुधार कर सकते हैं। व्यवसाय का नाम, मुख्य कार्यालय का पता, व्यवसाय का एक अतिरिक्त स्थान, पार्टनर या डायरेक्टर, प्रबंधन कमेटी, सीईओ  या वे लोग जो व्यवसाय के रोजमर्रा के मामलों के लिए जिम्मेदार हैं, में जोड़ना, हटाना या रिटायरमेंट जैसी स्थितियों में बदलाव करने से रजिस्ट्रेशन रद्द नहीं होगा। क्लियरटैक्स डॉट कॉम के संस्थापक व सीईओ अर्चित गुप्ता ने बताया ​िक इन बदलावों के अलावा  अन्य बदलाव कॉमन पोर्टल पर फॉर्म जीएसटी (आरईजी) – 14 के जमा कराते ही कर दिए जाएंगे। जीएसटी अधिकारी द्वारा किसी जांच की कोई जरूरत नहीं होगी। अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता के मोबाइल नम्बर और ई-मेल ठिकाने में बदलाव फॉर्म जीएसटी (आरईजी) -14 में आवेदन करने के बाद कॉमन पोर्टल के द्वारा ऑनलाइन जांच के बाद कर दिया जाएगा।

यह प्रक्रिया अपनानी होगी

इसके लिए आवेदक को अन्य दस्तावेजों के साथ फॉर्म जीएसटी (आरईजी) – 14 जमा कराना होगा। जीएसटी अधिकारी 15 दिनों में जांच कर फॉर्म जीएसटी (आरईजी) -15 में मंजूरी दे देंगे। जैसे एबीसी एक पार्टनरशिप फर्म है, जिसमें 3 पार्टनर हैं। 1 सितंबर 2017 से डी पार्टनर के रूप में फर्म से जुड़ता है। फर्म अन्य दस्तावेजों के साथ 5 सितंबर को फॉर्म जीएसटी (आरईजी) -14 जमा करा देती है। अधिकारी 15 दिनों में, यानि 20 सितंबर तक मंजूरी देंगे। संशोधन या बदलाव 1 सितंबर से प्रभावी होगा यानि जिस दिन डी फर्म से जुड़ा था। यदि अधिकारी दस्तावेजों से संतुष्ट नहीं होता है तो वह फॉर्म जीएसटी (आरईजी)-03 के रूप में कारण बताओ नोटिस जारी कर देगा कि आवेदन को रद्द क्यों न किया जाए। आवेदक को 7 दिनों के अंदर फॉर्म जीएसटी (आरईजी) -04 भरकर जवाब देना होगा। यदि अधिकारी जवाब से संतुष्ट नहीं होता है तो वह आवेदन को रद्द कर सकता है तथा  फॉर्म जीएसटी (आरईजी) -03 के रूप में एक आदेश जारी कर सकता है। यदि संबंधित अधिकारी अन्य कोई कार्यवाही नहीं करता है तो यह मान लिया जाएगा कि बदलाव कर दिया गया है।

मैं तो चाहता था रीयल एस्टेट भी जीएसटी में शामिल रहेः जेटली

वित्त  मंत्री अरुण जेटली  चाहते थे कि रीयल एस्टेट जीएसटी के दायरे में रहे। मंगलवार को जेटली ने कहा ‘ व्यक्तिगत रूप से मैं दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया द्वारा रीयल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने के प्रस्ताव के पक्ष में था लेकिन कुछ अन्य राज्य इसके पक्ष में नहीं थे। ‘ उन्होंने कहा, ‘ तब यह तय किया गया कि पहले जीएसटी लागू होने दिया जाए और फिर एक साल बाद हम इसकी समीक्षा करेंगे। ‘
खुद सहज होगी
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा कि जीएसटी में छोटे-छोटे मुद्दे कभी भी उठ सकते हैं, पूरी प्रणाली तैयार है और यह खुद सहज हो जाएगी।
बुधवार को एक समाचार चैनल के साथ साक्षात्कार में जेटली ने पुनः दोहराया कि उन्हें उम्मीद है कि सभी राज्य जल्द ही पेट्रोलियम उत्पादों और रीयल एस्टेट को जीएसटी के दायरे में लाने पर सहमत हो जाएंगे।

अहमदाबादः गुजरात के पतंग निर्माताओं ने इसे जीएसटी के दायरे  में लाने के विरोध में 1 जुलाई से पतंग निर्माण का काम पूरी तरह बंद कर देने की चेतावनी दी है। देश में पतंग निर्माण और बिक्री के कुल करीब 100 करोड़ के सालाना कारोबार के 40 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा रखने वाले गुजरात में पतंग कारोबारियों की प्रमुख संस्था गुजरात काइट मैन्युफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव मुकेश छतरीवाला ने बताया कि अब तक पतंग बिक्री पर कोई सीधा कर नहीं था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में 2005 में भी इस धंधे को मूल्य वर्धित कर यानी वैट के दायरे से बाहर रखा गया था पर अब इस पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाने से इससे जुड़े हजारों गरीब कारीगर तबाह हो जाएंगे।

कपड़ा व्यवसाय दूसरे दिन भी बंद

72 घंटे टेक्सटाइल ट्रेड बंद के दूसरे दिन कोलकाता में सम्पूर्ण वस्त्र बाजार बंद रहा। कपड़े के प्रमुख होलसेल बाजार बड़ाबाजार में सन्नाटा साफ नजर आ रहा था।  सुबह 11 बजे सभी व्यापारी एकत्रित हुए और जमुनालाल बजाज स्ट्रीट, पगैयापट्टी, महात्मा गांधी रोड, मल्लिक स्ट्रीट, कलाकार स्ट्रीट होते हुए चेम्बर ऑफ टेक्सटाइल ट्रेड एण्ड इंडस्ट्री कार्यालय तक जुलूस निकाला। बड़ाबाजार में सभी प्रमुख कटरों, सदासुख कटरा, पारख कोठी, बिलासराय कटरा, लोहिया कटरा, मनोहरदास कटरा, गीता कटरा आदि के व्यापारी जुलूस में शामिल थे। वहीं, गुजरात के कपड़ा व्यापारियों ने कपड़े पर 5% जीएसटी के खिलाफ बुधवार को दूसरे दिन भी अपनी दुकानें बंद रखीं।  सूरत, अहमदाबाद और राजकोट समेत गुजरात के बड़े शहरों में कपड़ा बाजार बंद रहे।

पतंग निर्माण बंद करने की चेतावनी

गुजरात के पतंग निर्माताओं ने इसे जीएसटी के दायरे  में लाने के विरोध में 1 जुलाई से पतंग निर्माण का काम पूरी तरह बंद कर देने की चेतावनी दी है। देश में पतंग निर्माण और बिक्री के कुल करीब 100 करोड़ के सालाना कारोबार के 40 प्रतिशत हिस्से पर कब्जा रखने वाले गुजरात में पतंग कारोबारियों की प्रमुख संस्था गुजरात काइट मैन्युफैक्चरर्स एंड ट्रेडर्स एसोसिएशन के सचिव मुकेश छतरीवाला ने बताया कि अब तक पतंग बिक्री पर कोई सीधा कर नहीं था। तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के शासन में 2005 में भी इस धंधे को मूल्य वर्धित कर यानी वैट के दायरे से बाहर रखा गया था पर अब इस पर 5 प्रतिशत जीएसटी लगाने से इससे जुड़े हजारों गरीब कारीगर तबाह हो जाएंगे। पतंग के कागज पर 12 प्रतिशत जीएसटी देने से हमे कोई गुरेज नहीं है। उन्होंने कहा कि उनके संगठन ने प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को इस संबंध में पहले ही पत्र लिखा था पर अब तक कोई हल नहीं निकला है। अगर कुछ भी नहीं हुआ तो पतंग कारोबारी उत्पादन बंद कर देंगे।

सेज से घरेलू बाजार को बिक्री पर आईजीएसटी

घरेलू बाजार को विशेष आर्थिक क्षेत्रों से बिक्री पर आगामी एक जुलाई से एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) लगेगा। केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीईसी) ने यह जानकारी दी। सेज क्षेत्र को व्यापार परिचालन और शुल्कों के लिए विदेशी क्षेत्र माना जाता है और मुख्य रूप से इनकी स्थापना निर्यात प्रोत्साहन के लिए है। फिलहाल सेज इकाई से डीटीए (घरेलू दर क्षेत्र या सेज के बाहर) को वस्तुओं की आपूर्ति  पर सीमा शुल्क लगता है क्योंकि इन क्षेत्रों से आने वाले उत्पादों को देश में आयात माना जाता है। उसने कहा है कि जीएसटी कानून के तहत निर्यात शून्य दर की आपर्ति है। निर्यातक निर्यात पर किए गए आईजीएसटी के भुगतान को वापस लेने या निर्यात के लिए तैयार वस्तुओं पर लगने वाले कर को वापस लेने के पात्र होंगे। निर्यात पर आईजीएसटी का रिफंड भेजी गई खेप पर घोषित जीएसटीआईएन (पहचान नंबर) पर आधारित होगी। सीबीईसी ने आगे कहा कि ड्राबैक योजना जारी रहेगी और इसकी समयसारिणी एक जुलाई को जारी की जाएगी। शुल्क ड्राबैक निर्यात के उत्पादों पर आयातित कच्चे माल पर किए गए शुल्क भुगतान का रिफंड होता है। जीएसटी की ओर बदलाव के मद्देनजर मौजूदा ड्यूटी ड्राबैक योजना एक जुलाई से तीन महीने के लिए जारी रहेगी।

मालवेयर हमले से जीएसटीएन सुरक्षित

जीएसटी नेटवर्क (जीएसटीएन) ने वैश्विक साइबर हमले के मद्देनजर चिंताओं को दूर करने का प्रयास करते हुए कहा कि उसका परिचालन इससे प्रभावित नहीं हुआ है और पंजीकरण का काम सुगमता से चल रहा है। जीएसटीएन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी प्रकाश कुमार ने कहा कि आईटी कंपनी ने सभी एहतियाती कदम उठाए हैं जिससे इस तरह के रैन्समवेयर के हमले से बचाव किया जा सके। सभी डेटा सुरक्षित हैं। ऐसे में कुमार ने अंशधारकों को आश्वस्त किया है कि सभी आंकड़े सुरक्षित हैं और किसी तरह की चिंता की बात नहीं है।नई अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था के तहत जीएसटीएन पूरा आईटी ढांचा संभाल रही है। साथ ही वह प्रति माह तीन अरब इन्वाइस के डेटा को भी स्टोर करेगी। कुमार ने कहा, चिंता की कोई बात नहीं है। हमारा सिस्टम लाइनक्स के साफ्टवेयर पर चलता है। सभी आंकड़े सुरक्षित हैं। परिचालन सुगमता से चल रहा है। वैश्विक मालवेयर हमला पेटया ने मंगलवार की रात यूरोप में कई केंद्रीय बैंकों और बड़ी कंपनियों के परिचालन को प्रभावित किया है।

बंगाल के लिए घातक होगा जीएसटी : पार्थ 

जीएसटी को राज्य के शिक्षा मंत्री व तृणमूल कांग्रेस के महासचिव पार्थ चटर्जी ने बंगाल के लिए घातक बताया है। उन्होंने कहा कि अभी तक देश में जीएसटी लागू करने के लिए योग्य इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण नहीं हुआ है। इससे बंगाल का कपड़ा उद्योग, चमड़ा उद्योग, फिल्म उद्योग यहां तक कि छोटे-छोटे उद्योग भी बुरी तरह प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा कि जीएसटी के आने से छोटे असंगठित श्रमिक के लिए भुखमरी की स्थिति उत्पन्न होने वाली है। इसलिए राज्य सरकार यह महसूस करती है कि केंद्र सरकार जल्द से जल्द जीएसटी पर रोक लगाये।

जीएसटी में एकमुश्त कर योजना का विकल्प

एकमुश्त शुल्क योजना यानी कंपोजीशन स्कीम के तहत 75 लाख लाख रुपये तक  के कारोबार वाले विनिर्माताओं को कुल कारोबार का एक प्रतिशत जीएसटी के रूप  में देना होगा। व्यापारियों को 2.5 प्रतिशत तथा अन्य आपूर्तिकर्ताओं के  मामले में कारोबार का 0.5 प्रतिशत शुल्क देना होगा। हालांकि इस योजना का लाभ लेने के लिये आठ पूर्वोत्तर राज्यों  तथा पहाड़ी राज्य हिमाचल प्रदेश के लिये कारोबार सीमा 50 लाख रुपये होगी। बीस लाख रुपये तक के कारोबार वालों को जीएसटी से छूट दी गयी है। पूर्वात्तर  राज्यों तथा विशेष श्रेणी के राज्यों के मामले में यह सीमा 10 लाख रुपये  है। जिन कंपनियों का एक वित्त वर्ष में कारोबार 75 लाख रुपये से कम है, वे  सरलीकृत एक मुश्त कर योजना का विकल्प चुन सकते हैं।
इन्हें नहीं मिलेगा विकल्प  वित्त मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार कानून के तहत आइसक्रीम, कोकोया  शामिल या बिना शामिल वाले खाने योग्य बर्फ एक मुश्त कर योजना के विकल्प  नहीं चुन सकते। साथ ही तंबाकू और तंबाकू के विकल्प के रूप में उत्पाद  विनिर्माताओं को भी यह योजना अपनाने की सुविधा नहीं होगी। आइसक्रीम, पान मसाला और तंबाकू विनिर्माता जीएसटी के तहत एकमुश्त कर योजना का विकल्प नहीं चुन सकते हैं। इस योजना के तहत उन कंपनियों को कम कर देने की अनुमति दी गयी है जिनका कारोबार 75 लाख रुपये से अधिक नहीं है।

 

 

 

 

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