जीएसटी के विरोध में उतरीं ई -कॉमर्स कंपनियां

फ्लिपकार्ट, स्नैपडील और अमेजॉन ने टैक्स कलेक्शन एट सोर्स पर जताया एतराज

सन्मार्ग संवाददाता, नई दिल्ली

केंद्र सरकार 1 जुलाई से जीएसटी लागू करने जा रही है। जीएसटी को लेकर तीन बड़ी ई-कॉमर्स कंपनियां स्नैपडील, फ्लिपकार्ट और अमेजॉन विरोध में उतर आई हैं। इन कंपनियों को जीएसटी लागू होने के बाद उन पर लगने वाले (टैक्स कलेक्शन एट सोर्स) टीसीएस को लेकर ऐतराज है। इनके साथ पेटीएम, गूफर्स, जोमैटो ने भी अपनी समस्या उद्योग संगठनों के सामने रखी है। उद्योग संगठनों ने ई- कॉमर्स कंपनियों की समस्या को साथ मिलकर सरकार के समक्ष रखने की बात कही है।
ई-कॉमर्स कंपनियों का पक्ष
फ्लिपकार्ट के सह-संस्थापक सचिन बंसल का कहना है कि हमने पूरे तंत्र में कई बदलाव किये हैं, जिसमें लंबा समय लगा है। हजारों- लाखों ऑनलाइन विक्रेता, उद्यमी और कई ऑफलाइन रिटेलर्स हैं। नए नियम से सालाना लगभग 400 करोड़ रुपये की पूंजी फंस जाएगी और विक्रेताओं के पास नहीं पहुंच पाएगी। इससे उनके काम में रुकावट आएगी और वे हमसे नहीं जुड़ पाएंगे। अमेजॉन इंडिया के प्रमुख अमित अग्रवाल का कहना है कि हम निर्धारित पैमाने से आगे निवेश कर रहे हैं। बुनियादी ढांचे, तंत्र को विकसित करने, विक्रेताओं को जागरूक करने और उन्हें ऑनलाइन लाने के साथ ही ग्राहक को आकर्षित करने में काफी निवेश हो रहा है। स्नैपडील के सह-संस्थापक कुनाल बहल का कहना है कि ई-कॉमर्स डिजिटल इंडिया, मेक इन इंडिया और स्टार्टअप इंडिया एक दिलचस्प मोड़ पर है। सरकार को गंभीरतापूर्वक टीसीएस को देखना चाहिए, क्योंकि यह हमारे उद्योग के लिए बड़ी बाधा बनेगा।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ
विशेषज्ञों का कहना है कि टीसीएस से ऑनलाइन विक्रेताओं की समस्या बढ़ेगी। इससे करीब 1 लाख 80 हजार नौकरियों में कमी आने की आशंका है। उद्योग में निवेश और विकास में रुकावट भी आ सकती है। ई- कॉमर्स व्यवसाय अभी भारत में प्रारंभिक दौर में है, जिसमें लाखों करोड़ों लोगों को रोजगार भी मिला हुआ है। ऐसे में  टीसीएस को लेकर सरकार को विचार करना चाहिए।  ई-कॉमर्स स्टार्टअप्स को भी बड़ा नुकसान हो सकता है। जीएसटी गाइडलाइंस के मुताबिक ई- कॉमर्स पोर्टल से होने वाली बिक्री पर टैक्स कलेक्ट करना होगा और मासिक व तिमाही रिटर्न फाइल करना होगा। इससे ई कॉमर्स कंपनियों पर बोझ बढ़ेगा और इससे उत्पादों के दाम भी बढ़ेंगे। फ्री गिफ्ट, ऑफर्स और एक्सचेंज ऑफर्स जो इनका मुख्य आकर्षण है, टैक्स दायरे में आ जाएंगे और ऑनलाइन खरीदारी महंगी हो सकती है। ऑनलाइन ट्रैवल साइट्स पर अभी 15 फीसदी टैक्स लगता है, जीएसटी के बाद 22 फीसदी तक हो है।

भारत में ई-कॉमर्स कारोबार  
ई-कॉमर्स कारोबार देश में सबसे तेजी से बढ़ने वाले सेक्टरों में से एक है। 2020 तक भारतीय ई–कॉमर्स कारोबार अनुमानत: 60 अरब डॉलर का हो सकता है। यह संगठित खुदरा बाजार में 25 फीसदी का योगदान देगा। वहीं गूगल- एटी कीर्ने की डिजिटल रिटेल 2020 की रिपोर्ट के मुताबिक 2020 तक ऑनलाइन दुकानदारों की संख्या बढ़कर 17.5 करोड़ होने की उम्मीद है और जीडीपी में इसकी हिस्सेदारी 4 फीसदी तक हो जाएगी।

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