जीएसटी के दायरे में आ सकता है पेट्रोल डीजल

नई दिल्ली : केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र प्रधान ने फाइनेंस मिनिस्टमर निर्मला सीतारमण से पेट्रोल, डीजल समेत सभी पेट्रो उत्पा्दों को जीएसटी के दायरे में लाने के लिए कहा है। एक समारोह प्रधान ने कहा कि एविएशन टरबाइन फ्यूल (एटीएफ) और प्राकृतिक गैस पर जीएसटी लगाने के साथ पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी दायरे में लाया जाए।

उन्होंने इस मौके पर कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में 2 साल पहले ऐतिहासिक कर सुधार के रूप में जीएसटी लागू की गई थी, लेकिन पेट्रोलियम क्षेत्र की जटिलता और इस क्षेत्र में राज्य सरकारों की राजस्व निर्भरता को देखते हुए पेट्रोलियम उत्पादों को जीएसटी के दायरे से बाहर रखा गया। पेट्रोलियम उद्योग की ओर से इसे अब जीएसटी के दायरे में लाने की मांग हो रही है। प्रधान ने कहा कि खुला क्षेत्रफल लाइसेंसिंग नीति (ओएएलपी) के तहत सरकार बोली लगा चुकी है और इन बोलियों के जरिए देश में तेल और प्राकृतिक गैस के खनन और उत्पादन के क्षेत्र में 2023 तक 58 अरब डॉलर के अनुमानित निवेश की उम्मीद है।

महंगाई दर में राहत, सितंबर में रही 0.33 फीसदी

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में गैस आधारित अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए जोर दिया जा रहा है और गैस पाइप लाइन, टर्मिनलों और शहरों में गैस बुनियादी ढांचे के निर्माण क्षेत्र में 60 अरब डॉलर का अनुमानित निवेश होने जा रहा है। शहरी क्षेत्र में गैस वितरण नेटवर्क से आने वाले समय में देश की 70 फीसदी आबादी को अल्प कार्बन उत्सर्जन वाली प्राकृतिक गैस मुहैया होगी। वहीं तेल आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए 2022 तक पेट्रोल में 10 प्रतिशत इथनॉल मिलाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे जहां कृषि क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा, वहीं पर्यावरण अनुकूल ईंधन के इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलेगा।

निवेशको के लिए आकर्षक स्थल बना भारत

वित्त मंत्री निर्मला सीतारामण ने कहा कि भारत विदेशी निवेशकों का आकर्षक स्थल बनता जा रहा है। कॉर्पोरेट टैक्स घटाने को लेकर वित्त मंत्री का कहना है कि निवेश के लिए अब अनुकूल माहौल है। कंपनी ने कानून और आईबीसी कोड में किए गए बदलाव को लेकर कहा कि अब नियमों के अनुपालन पर ज्यादा जोर दिया जा रहा है। सरकार के लिए ऊर्जा क्षेत्र सर्वोच्च प्राथमिकता है और इस क्षेत्र में निवेशकों से किए वादे पूरे किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि तीन दिवसीय इस सम्मेलन में 15 देशों और 300 कंपनियों के 1200 प्रतिनिधि हिस्सा ले रहे हैं।

 

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