जीएसटीआर-9 कंपनियां जल्द कर ले तैयार, 30 जून है अंतिम तिथि

नई दिल्ली : जीएसटी को तीन साल हो गए। अभी तक कंपनियां जीएसटी क्रियान्वयन के पहले साल यानी वित्त वर्ष 2017-18 के लिए ही अनुपालन में संघर्ष कर रहे हैं। वित्त वर्ष 2017-18 का वार्षिक रिटर्न, जिसे जीएसटीआर 9 कहा जाता है को भरने की अंतिम तारीख 30 जून 2019 है और यह एक बेहद जटिल फॉर्म है, जिसके लिए व्यापक स्तर पर आंकड़ों का मिलान करने की आवश्यकता है। यह बातें क्लियरटैक्स के संस्थापक और कार्यकारी अधिकारी अर्चित गुप्ता का कहना है।

जीएसटीआर-9 एक सालाना रिटर्न फॉर्म है, जो हर वैसे को भरना है जो जीएसटी के तहत पंजीकृत है। ऐसे में सभी नियमित करदाताओं के लिए जीएसटीआर-9 भरना आवश्यक है, वहीं कंपोजिशन योजना के करदाताओं तथा ई-वाणिज्य कंपनियों के लिए एक अलग फॉर्म है। वैसे करदाता, जिनका सालाना टर्नओवर दो करोड़ रुपये से अधिक है, उन्हें जीएसटीआर-9 के साथ में जीएसटीआर 9- सी भी भरना होगा। जीएसटीआर-9 सी सालाना जीएसटी रिटर्न यानी जीएसटीआर- 9 के तहत जीएसटी का मिलान है तथा ऑडिटेड वित्तीय खाताओं के तहत जीएसटी है। किसी भी कंपनी के हर जीएसटीआईएन एक लिए जीएसटीआर- 9 भरना अनिवार्य है।

जीएसटीआर9 की संख्या बढ़ाने का मुख्य स्रोत जीएसटीआर-1 और जीएसटीआर-3बी रिटर्न है। कंपनियां खुद के द्वारा की गई आपूर्ति की सूचना देने के लिए जीएसटीआर-1 भरती है तथा करों के भुगतान के लिए जीएसटीआर-3बी भरना होता है। जीएसटीआर-9 एक बार को इन दोनों रिटर्न का संयुक्त स्वरूप लग सकता है, लेकिन यह इतना सामान्य है नहीं। इसके लिए करदाताओं को आंकड़ों का गहराई से मिलान करना होता है। उन्हें यह मिलान आपूर्ति की सूचना देने के लिए दायर किए गए रिटर्न कर भुगतान करने के लिए भरे गए रिटर्न अपने वेंडरों द्वारा भरे गए रिटर्न और लेखा जोखा के खाताओं के साथ भी करना पड़ता है। जीएसटीआर-9 के तहत मांगी गई सूचनाएं कई खानों (टेबल) में बंटी होती हैं, इनमें से कुछ खाने पहले से दायर रिटर्न के आधार पर स्वतः ही भर जाते हैं, जबकि कुछ खानों को करदाताओं को खुद ही भरना होता है।

जिन कर करदाताओं ने एक वित्त वर्ष का आरसीएम कर अगले वित्त वर्ष के जीएसटीआर-3बी में भुगतान किया हो, उन्हें रिपोर्ट करने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। अगर वित्त वर्ष 2018-19 के जीएसटीआर-3बी के साथ आरसीएम कर का भुगतान किया गया है, लेकिन आपूर्ति (इनवार्ड आपूर्ति) वित्त वर्ष 2017-18 में प्राप्त हुई है। खानों में जिस तरह से सूचनाओं को व्यवस्थित किया गया है, उसके कारण इस तरह के कर का भुगतान यदि शामिल हो गया है तो यह जीएसटीआर-9 में टर्नओवर बढ़ा देता है, इससे भुगतान में अंतर उत्पन्न हो जाता है।

जीएसटीआर-1 फॉर्म से करदाताओं को की गई आपूर्ति में कुछ जोड़ने या सुधार करने की सुविधा मिलती है, जबकि वास्तव में कर का किया गया भुगतान जीएसटीआर-3बी के जरिये सालाना रिटर्न में शामिल रहता है। जीएसटीआर-9 के टेबल संख्या 10 और टेबल संख्या 11 का इस्तेमाल किए गए संशोधन की जानकारी देने के लिए किया जाता है और यह उपलब्ध कराई गई सूचना के आधार पर निश्चित ही जीएसटीआर-1 के अनुसार होना चाहिए। हालांकि टेबल संख्या 9 में जीएसटीआर-3बी के तहत भुगतान किए गए कर की जानकारी पहले से होती है, इससे इस बात का भ्रम पैदा होता है कि किये गए संशोधन को किस तरीके से सालाना रिटर्न में शामिल किया जाए। यह सूचनाओं के दो सेट के बीच असमानता उत्पन्न कर सकता है, जहां ठीक-ठाक मिलान है नहीं।

ऐसे कुछ मामले देखने को मिले हैं, जब कुछ छोटी कंपनियों ने ऑनलाइन कर का भुगतान किया, लेकिन संसाधन तथा समय की कमी के कारण गलत जीएसटीआर-3बी भर दिया। इस कारण वे ऐसी स्थिति में फंस जाती हैं, जहां करों का तो भुगतान किया जा चुका है, लेकिन जीएसटीआर-3बी के जरिये जीएसटीआर-9 के पहले से भरे जा चुके हिस्सों में गलत जानकारियां दिख रही हैं। ऐसे किसी स्मार्ट समाधान के बिना जो तुरंत खामियों की पहचान करता और उसे ठीक करता हो, हजारों सामग्रियों के आंकड़ों का मिलान नहीं किया जा सकता है। इस कारण, कंपनियों को बिना देर किए जीएसटीआर-9 को तैयार करने की शुरुआत कर देनी चाहिए।

 

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