जवाबी शुल्क को ट्रंप प्रशासन ने कहा पाखंड

कहा-बिना औच‌ित्य लगाया गया है

वॉशिंगटनः व्यापार मोर्चे पर अमेरिका और अन्य प्रमुख देशों के बीच खींचतान के बीच ट्रंप प्रशासन को जवाबी शुल्क का कोई औच‌ित्य नहीं नजर आ रहा है। ट्रंप प्रशासन ने कहा है कि यूरोपीय संघ, चीन, भारत, तुर्की और अन्य देशों द्वारा अमेरिकी निर्यात पर जवाबी शुल्क अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत ‘ बिना किसी वाजिब कारण के ‘ लगाया गया है। जवाबी शुल्क पूरी तरह से पाखंड को रेखांकित करता है। इस संबंध में अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि रॉबर्ट लाइटहाइजर का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप ने राष्ट्रीय सुरक्षा हितों को ध्यान में रखते हुए इस्पात और एल्युमीनियम के व्यापार पर कार्रवाई की। यह कार्रवाई पूरी तरह से अमेरिकी कानूनों और विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) दोनों के मामलों में वैध और उचित है। इसके विपरीत यूरोपीय संघ ने अमेरिकी निर्यात पर तत्काल शुल्क को न्यायसंगत बनाने के लिए एक आधारहीन कानूनी सिद्धात तैयार किया है। चीन समेत डब्ल्यूटीओ के अन्य सदस्य देशों ने ऐसा ही किया है। शुल्क एवं व्यापार पर सामान्य समझौते के अनुच्छेद 21 का उन्होंने हवाला दिया है, जो डब्ल्यूटीओ सदस्यों को आवश्यक सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का व्यापक अधिकार देता है।

क्या है मामला

अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा इस्पात पर 25 प्रतिशत और एल्युमीनियम पर 10 प्रतिशत का शुल्क लगाने के बाद चीन ने (2 अप्रैल), मैक्सिको ने (पांच जून), तुर्की ने (21 जून) और यूरोपीय संघ ने (22 जून) को जवाबी शुल्क लगाए हैं।

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