चीनी कंपनियों को बड़ा ‘धक्का’

गेल की 3000 करोड़ की परियोजना के लिए खरीद में ‘भारत पहले’ नीति

नई दिल्लीः सरकारी खरीद में ‘भारत पहले’ अर्थात् भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता देने की सरकार की नीति से गेल पाइपलाइन में चीन की कंपनियों को ‘धक्का’ लगेगा। सरकार की इस नीति से गेल इंडिया लि. द्वारा तैयार की जाने वाली 3000 करोड़ रुपये की पाइपलाइन परियोजना में घरेलू कंपनियों को मौका मिलेगा। घरेलू स्टील कंपनियों को इससे करोड़ों रुपये के आर्डर मिलेंगे, जो सस्ते उत्पादों की वजह से चीनी कंपनियों के खाते में जा सकते थे। इस नीति से भारतीय कंपनियों की चीनी कंपनियों को व्यवसाय खोने की आशंका कम हुई है। कुछ सप्ताह पहले विद्युत मंत्री पीयूष गोयल ने कहा था कि भविष्य की परियोजनाओं में भारत में उन देशों की कंपनियों को बोली लगाने की अनुमति नहीं देगा जिन देशों में भारतीय कंपनियों को बोली लगाने की अनुमति नहीं होगी। हाल में इस्पात मंत्री चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि 50 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं में तकनीक और गुणवत्ता उपलब्ध होने पर भारतीय कंपनियों को प्राथमिकता दी जाएगी। भविष्य की निविदाओं में इन शर्तों को शामिल किया जाएगा।
अन्य क्षेत्रों में भी लागू
यह नियम सिर्फ कोयला और स्टील क्षेत्र तक सीमित नहीं रहेगा। अंतरराष्ट्रीय नियमों को बाधित किए बिना सरकार हर परियोजना में घरेलू खरीद के नियमों को लागू करेगी। इस संबंध में उपलब्ध उपायों का अध्ययन हो रहा है। गेल क पाइप परियोजना की शुरुआत 1000 करोड़ रुपये के आर्डर जारी होने के साथ होगी। घरेलू प्राथमिकता की शर्तों को इसके टेंडर में शामिल किया जाएगा।

बिदका चीन का मीडिया

भारत सरकार की इस पहल से चीन का सरकारी मीडिया बिदक गया है। उसने कहा- विद्युत क्षेत्र में चीन की कंपनियों को व्यवसाय से वंचित करने से स्पष्ट है कि भारत का चीन के प्रति किस तरह का संदिग्ध रवैया है। भारत पर इसका असर होगा क्योंकि वह विद्युत की कमी से जूझ रहा है। इधर, भारतीय विद्युत मंत्री का कहना है कि व्यावसायिक संबंध पारस्परिक सहयोग के आधार पर होने चाहिए। इस्पात मंत्री का कहना है कि विदेशी कंपनियों का  टेक्नोलॉजी ट्रांसफर के मामले में हम उनका स्वागत करेंगे। नयी तकनीक से भारत में कोई स्टील प्लांट स्थापित करना चाहता है तो हम उसका स्वागत करते हैं।

देश में कच्चे स्टील का उत्पादन बढ़ा

कच्चे स्टील का उत्पादन देश में चालू वित्त वर्ष के पहले दो महीने में  1.64 करोड़ टन रहा। यह पिछले वर्ष के इसी अवधि के मुकाबले 4.5 प्रतिशत अधिक है। 2016-17 की इसी अवधि में 1.57 करोड़ टन कच्चे इस्पात का उत्पादन हुआ था। ज्वाइंट प्लांट कमेटी की ताजा रिपोर्ट के अनुसार मई में उत्पादन 81.63 लाख टन रहा। यह एक साल पहले इसी महीने के 79.89 लाख टन के मुकाबले 2.2 प्रतिशत अधिक है।  मासिक आधार पर अप्रैल के मुकाबले यह 0.8 प्रतिशत कम है। इस माह में 82.28 लाख टन का उत्पादन हुआ था।

भारतीय रेल पर टिकी चीन की नजर

चीन की नजर भारतीय रेल पर है। उसने हादसों के कारण ​गिनाते हुए भारतीय रेल के विकास और आधुनिकीकरण की प्रक्रिया से जुड़ने की इच्छा दिखाई है। चीन के सरकारी अखबार ने लिखा है कि भारत दुनिया के सबसे सघन रेलवे तंत्र और विकसित टेक्नोलॉजी वाले देश चीन का सहयोग लेकर अपने रेलवे तंत्र का तेजी से विकास कर सकता है।
जनवरी में दक्षिण भारत में ट्रेन के पटरी से उतर जाने से कम-से-कम 36 लोगों की जान चली गई थी। उसके दो महीने पहले उत्तर भारत में ट्रेन दुर्घटना में 150 लोगों की जान  गई थी। ग्लोबल टाइम्स के अनुसार जीर्ण-शीर्ण बुनियादी ढांचा और खराब प्रबंधन इन हादसों की मुख्य वजह हैं। भारत सरकार ने अगले पांच सालों में रेल तंत्र के विकास के लिए 137 अरब डॉलर का निवेश करने वाली है।
भारत ने कहा है कि उसे चीन की बराबरी के लिए अगले 30 सालों में रेल क्षेत्र में बड़ा निवेश करने की जरूरत है। चीनी अखबार ने सुझाव दिया है कि बढ़ते की चिंता नहीं होनी चाहिए क्योंकि बुनियादी ढांचे के विकास यह अभिन्न हिस्सा है। पिछले दशक में टेक्नोलॉजी और मानकों के स्तर पर पश्चिम के देशों को पीछे छोड़ते हुए चीन ने नया हाई स्पीड रेल तंत्र तैयार किया है।

चीन, जापान, कोरिया से आयातित रसायन पर डंपिंग रोधी शुल्क

राजस्व विभाग ने चीन, जापान और दक्षिण कोरिया से आयातित रसायन पर डंपिंग रोधी शुल्क लगाया है। इस रसायन का उपयोग गद्दे और वाहनों की सीट में होता है। इससे रसायन बनाने वाले घरेलू विनिर्माताओं को लाभ होगा। रसायन ‘टोलुएन डी आइसोसाइनेट’ (टीडीआई) पर 0.14-0.40 डालर प्रति किलो की दर से शुल्क छह महीने के लिए लगाया गया है। गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स एंड केमिकल्स ने डीजीएडी से शुल्क लगाने का अनुरोध किया था।

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