प्लास्टिक कचरे से खादी ने तैयार किए थैले

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नयी दिल्लीः पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक और कदम बढ़ाते हुए खादी ग्रामोद्योग आयोग ने प्लास्टिक के कचरे और कागज की लुगदी को मिलाकर एक थैला विकसित किया है। आयोग के चेयरमैन विनय कुमार सक्सेना ने बताया कि इसके लिए एक विशेष प्रक्रिया अपनायी गई है। प्लास्टिक के कचरे को नालियों से इकट्ठा किया गया और उसकी सफाई करके उन्हें प्रसंस्कृत किया गया। थैलों के निर्माण में 20% प्लास्टिक के कचरे और शेष कागज की लुगदी का उपयोग किया गया है। थैलों के लिए पहले सफेद कपास के रेशों से हाथ का कागज बनाने की लागत एक लाख रुपये प्रति टन आती थी। इसमें प्लास्टिक के कचरे का सम्मिश्रण करने से अब इसकी लागत 34% घटकर 66,000 रुपये प्रति टन रह गई है। पहले एक थैले की लागत साढ़े पंद्रह रुपये पड़ती थी जो अब घटकर 12 रुपये 10 पैसे रह गई है। इन थैलों का निर्माण जयुपर स्थित कुमारप्पा हैंडमेड पेपर इंस्टीटूट (केएनएचपीआई) कर रहा है। थैलों में प्लास्टिक का कचरा मिलाए जाने से उनकी मजबूती भी सात प्रतिशत बढ़ी है। केएनएचपीआई को अब तक 75,000 थैलों के निर्माण का ऑर्डर मिल चुका है, जो इसके लागत प्रभावी होने के चलते आगे और बढ़ सकता है। इस नयी पहल को ‘रीप्लान’ (रीमूव प्लास्टिक फ्रॉम नेचर) नाम दिया गया है। इस प्रयोग को मात्र 28 दिन के भीतर पूरा कर इसका वाणिज्यिक उत्पादन शुरू कर दिया गया।

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