कोल्हापुरी चप्पलों को मिला जीआई टैग,

नई दिल्ली : लंबे समय से हो रही मांग के बाद विश्व व्यापार संगठन ने देश और दुनिया भर मे मशहूर कोल्हापुरी चप्पल को जीआई टैग दे दिया है। इस टैग की मांग पिछले कई वर्षों से लगातर की जा रही थी। इस टैग के मिलने के बाद ये चप्पल बस उन्हीं इलाको में बनाई जा सकेगी, जिन इलाकों को इन्हें बनाने के लिए अधिकृत किया गया है।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर, शोलापुर, सांगली और सतारा के साथ ही कर्नाटक के चार जिलों को इस चप्पल को बनाने के लिए शामिल किया गया हैं। कोल्हापुरी चप्पल को पहचान मिली, अस्सी के दशक में फिल्म सुहाग के एक दृश्य से, जब सदी के महानायक अमिताभ बच्चन एक गुंडे को कोल्हापुरी चप्पल से पीटते नजर आए थे। महाराष्ट्र का कोल्हापुर अपनी खास चप्पलों की वजह से भी जाना जाता है।

कोल्हापुरी चप्पलों को जीआई टैग दिया गया है। जीआई टैग मुख्य रूप से कृषि, प्राकृतिक और निर्मित उत्पाद (हस्तशिल्प और औद्योगिक सामान) को दिया जाने वाला एक विशेष टैग है। यह विशेष गुणवत्ता और पहचान वाले उत्पाद को दिया जाता है, जो किसी विशिष्ट भौगोलिक क्षेत्र में उत्पन्न होता है। कोल्हापुरी चप्पल का इतिहास तकरीबन 1000 साल पुराना है। कोल्हापुर में शाहूजी महाराज ने इस चप्पल को बनाने के लिए ट्रेनिंग सेंटर शुरू किया, जिसके बाद यह काफी मशहूर हुआ। जीआई टैग मिल जाने के बाद जो चप्पल कोल्हापुर के नाम पर बेची जाती थी, उन पर रोक लगेगी। इससे कोल्हापुरी चप्पल बनाने वालों को रोजगार मिलेगा।

हालाँकि इस फैसले का कारीगर विरोध भी कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि कोल्हापुरी चप्पल की पहचान कोल्हापुर से जुड़ी है। ऐसे में उसमें कर्नाटक कहां से आ गया। इन लोगों का कहना है कि कर्नाटक में जो चप्पल बनती है, वो काफी खराब क्वालिटी की होती है। इससे कोल्हापुरी चप्पलों का मार्केट खराब होता है।

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Jagdip Dhankhar

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