कोरोना के कारण वैश्विक जीडीपी में 1 से 1.25 फीसद क गिरावट का अनुमान : सीआईआई रिपोर्ट

नई दिल्ली : चीन में आई आपदा कोरोना अब चीन से निकलकर दुनिया के लिए बड़ी विपदा बनती जा रही है, इसके कारण वैश्विक तौर पर व्यवसायिक चुनौतियां बढ़ती जा रही हैं। यही नहीं चीन में संचालित भारतीय कंपनियों को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है और इन कंपनियों का राजस्व घट रहा है और खर्च बढ़ रहा है। चीन से कच्चा माल आयात करने वाली भारतीय कंपनियों को कर्मचारियों के किल्लत समेत कई तरह की कठिनाइयाँ आ रही है। चीन में कोरोना से अब तक हजारों लोग मर चुके हैं और लाखों लोग संक्रमित हैं। 

दुनिया के कुल निर्यात में चीन का 13 फीसद और कुल आयात में 11 फीसद हिस्सा है। चीन दुनिया का सबसे बड़ा निर्यातक और दूसरा बड़ा आयातक  है, कोरोना के कारण लॉकडाउन का असर चीन में 500 मिलियन लोगों पर असर पड़ा है, जिससे खपत बुरी तरह प्रभावित हुई है। कोरोना वायरस के कारण चीन में खपत के 30 फीसद तक गिरने का अनुमान है। कंफेडेरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री ने 16 फरवरी को ‘नोवल कोरोना वायरस इन इंडिया: एन इंपेक्ट एनालिसिस” रिपोर्ट जारी किया है, जिसके मुताबिक चीन में 130 भारतीय कंपनियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती कर्मचारियों की किल्लत है, चीन में अधिकतर लोग कहीं दूर जाकर काम नहीं करना चाहते, वे अपने घर के आस पास ही काम चाहते हैं, जिससे वे अपने परिवार के पास बने रहें। भारतीय आईटी कंपनियों को ज्यादा नुकसान हो रहा है।

सीआईआई रिपोर्ट के मुताबिक चीन में लूनर नववर्ष की छुट्टियों के विस्तार से चीन के बाहर काम करने वाली भारतीय आईटी कंपनियों के राजस्व और ग्रोथ पर बुरा असर पड़ा है। आईटी कंपनियां मैनपावर पर काफी हद तक निर्भर होती हैं और लोगों की आवाजाही पर रोक के कारण वे कामकाज नहीं कर पा रही हैं। सीआईआई  का कहना है कि भारतीय आईटी कंपनियां प्रोजेक्ट्स को समय पर पूरा नहीं कर पा रही हैं और नए प्रोटेक्स कम मिल रहे हैं,  जिससे अब चीन में स्थित भारतीय आईटी कंपनियों के वैश्विक ग्राहक मलेशिया और वियतनाम जैसी जगहों पर नए सर्विस प्रोवाइडर्स के पास जा रहे हैं। छुट्टियों के कारण उत्पादन घटा है और इसका असर राजस्व और ग्रोथ पर पड़ा है। चीन में अधिकतर व्यापार 24 जनवरी से बंद है।

चीन में काम कर रही भारतीय कंपनियां इंडस्ट्रियल मैन्युफैक्चरिंग, मैन्युफैक्चरिंग सर्विसेज, आईटी एंड बीपीओ, लॉजिस्टिक्स, केमिकल, एयरलाइन और टूरिज्म जैसे सेक्टर्स से जुड़ी हैं। कंपनियों का अनुमान है कि पहली और दूसरी तिमाही में उनके राजस्व में 15 से 20 फीसद की गिरावट आ सकती है।  व्यापार तीसरी तिमाही से ही सामान्य हो पाएगा। सीआईआई रिपोर्ट के मुताबिक उत्पादन में कमी के कारण खासतौर पर मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों पर फिक्स्ड कॉस्ट जैसे- वेतन, ऑफिस रेंट, ब्याज, वैधानिक ओवरहेड्स आदि का भार पड़ रहा है। 

चीन और भारत के बीच आयात निर्यात काफी प्रभावित हुआ है और भारत आयात के मामले में चीन पर काफी हद तक निर्भर है। भारत के कुल इलेक्ट्रॉनिक आयात का 45 फीसद हिस्सा चीन से आता है। मशीनरी का एक तिहाई और ऑर्गेनिक केमिकल्स का करीब 2/5 हिस्सा चीन से आयात होता है। ऑटोमोबाइल पार्ट्स और ऊर्वरक जैसे दूसरे उत्पादों का 25 फीसद से ज्यादा आयात चीन से ही होता है। 65-70 फीसद एक्टिव दवा सामग्री और करीब 90 फीसद मोबाइल फोन पार्ट्स भी चीन से ही आते हैं। ऑर्गेनिक केमिकल्स, प्लास्टिक्स, फिश प्रोडक्ट्स, कॉटन और अयस्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर असर पड़ा है। पांच फीसद हिस्से के साथ चीन भारत का तीसरा बड़ा साझेदार है।

सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रमुख उत्पादन केंद्रों में आर्थिक गतिविधियों के ठप पड़ जाने से साल 2020 में चीन की जीडीपी में 1 से 1.25 फीसद की गिरावट का अनुमान है, जबकि वैश्विक जीडीपी में 0.5 फीसद की गिरावट का अनुमान है।

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