कोरोना के कारण बदल जाएगा बिजनेस का तरीका, व्यवसाय को आगे बढ़ाने के लिए फेसबुक ने दिए ये सुझाव

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नई दिल्ली: फेसबुक इंडिया ने बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप के साथ मिलकर आज ‘टर्न द टाइड’ नामक एक नई रिपोर्ट जारी की है। इसमें बताया गया है कि कोविड-19 ने उपभोक्ताओं को किस कदर से बदल दिया है और उनके खरीदारी करने के तरीकों (पाथ-टू-परचेज) में यह किस तरह बदलाव लेकर आया है। इस रिपोर्ट में ब्रांडों को गाइडेंस भी दिया गया है, जिसे अपनाकर वे कोविड-19 के दौरान और इसके बाद भी खरीदारी के नए अंदाज के अनुरूप खुद को ढाल सकते हैं।

कोविड-19 महामारी के कारण पूरे देश में लॉकडाउन है। इससे लोगों को और बिजनेस को बहुत परेशानियां हो रही हैं। फेसबुक इंडिया में ग्लोबल मार्केटिंग सॉल्यूशंस विभाग के निदेशक और प्रमुख, संदीप भूषण ने कहा कि सभी बिजनेस कोविड-19 के चलते उपभोक्ता की मानसिकता और व्यवहार दोनों में हुए बदलावों को समझने की कोशिश कर रहे हैं। इसे देखते हुए हमने बड़े और छोटे दोनों तरह के व्यवसायों के लिए विकास को मुमकिन बनाने और खरीदारी के नए तरीकों के अध्ययन में निवेश किया है। ‘टर्न द टाइड’ रिपोर्ट उपभोक्ताओं के नए सफर और उनकी कैटेगरी संबंधी जरूरतों के लिहाज से व्यावसायों द्वारा अपनाये जाने वाले अवसरों पर जोर देती है। जिस तरह उपभोक्ता डिजिटल माध्यम को अपना रहे हैं, उसे देखते हुए ब्रांडों को ऐसे समाधानों पर ध्यान देने की जरूरत है, जो ‘न्यू नॉर्मल’ के अनुरूप हों। इन समाधानों में हाइपर-लोकलाइज़ेशन, वर्चुअल अनुभव का निर्माण, कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए मीडिया-मिक्स पर दोबारा विचार करना या खुद करके देखने (डीआईवाय) जैसी नई आदतों के अनुसार मैसेज तैयार करना और स्वास्थ्य और हाईजीन पर अधिक ध्यान शामिल हैं।

आज यह रिपोर्ट जारी की गई है, वहीं आने वाले हफ्तों में फेसबुक और बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप विभिन्न वर्टिकल्स के लिए विशिष्ट जानकारियां साझा करेंगे, ताकि व्यवसायों को लगभग रियल टाइम की गहरी समझ मिले और वे ‘टर्न द टाइड’ यानी नकारात्मंक असर को दूर कर सकें। यह रिपोर्ट महामारी के कारण उभरे तीन चलन – सोशल डिस्टेंसिंग, स्वास्थ्य व हाईजीन पर बढ़ता ध्यान और आय के मामले में गहराती अनिश्चितता पर आधारित प्रमुख उपभोक्ता-बदलावों पर आधारित है। रिपोर्ट में पता चला है कि इनमें से हर बदलाव में व्यवहार संबंधी तीन प्रकार के बदलाव देखे गए हैं। ये हैं – पिछले रुझानों का पलटना, मौजूदा रुझानों की रफ्तार में तेजी, और नई आदतों का बनना।

बोस्टन कंसल्टिंग ग्रुप की मैनेजिंग डायरेक्टर और पार्टनर निमिषा जैन ने कहा कि हम उपभोक्ता के नज़रिए और बर्ताव में अभूतपूर्व बदलाव देख रहे हैं। 80% से ज्यादा उपभोक्ता सोशल डिस्टेंसिंग जारी रखने वाले हैं और बाहर के काम घर से ही निपटा रहे हैं, 40 फीसदी से ज्यादा उपभोक्ता स्वास्थ्य और वेलनेस पर खर्च बढ़ा रहे हैं और अगले 2-3 सालों में ई-कॉमर्स को अपनाए जाने में जो बढ़ोतरी होनी थी, वह पहले ही हो चुकी है- ये बदलावों के कुछ उदाहरण हैं। ये अस्थायी नहीं हैं, बल्कि इनमें से ज्यादातर तो लंबे समय तक बने रहेंगे। हमारे विश्लेषण से पता चलता है कि पिछले संकटों में 6 में से केवल 1 कंपनी ही मजबूत बनकर उभरी है। मांगों में आए इन बदलावों से निपटने के लिए अपने मूल्य प्रस्तावों, गो-टू-मार्केट प्लान और बिजनेस मॉडल को नए सिरे से तैयार करने में फुर्ती दिखाने वाले खिलाड़ी ही खुद को भीड़ से अलग कर पाएंगे।

यह रिपोर्ट जिन बिंदुओं का विशेष उल्लेख करती है, उनमें शामिल हैं – सोशल मीडिया की बदौलत डिजिटल में जबरदस्त बढ़ोतरी, माइक्रो-मार्केट से जुड़े अवसरों का सामने आना, वैल्यू संबंधी जागरूकता में वृद्धि होने के कारण उपयोगिता आधारित खरीदारी में बढ़ोतरी, उपभोक्ताओं द्वारा शिक्षा, स्वास्थ्य और फिटनेस जैसी ऐतिहासिक रूप से ऑफलाइन श्रेणियों में भी डिजिटल को अपनाया जाना, पारंपरिक तौर पर ऑफलाइन श्रेणियों में भी आने वाले महीनों में ई-कॉमर्स पर खर्च में वृद्धि, स्वास्थ्य, स्वच्छता व वेलनेस पर खर्चों में सुनिश्चित बढ़ोतरी और खुद-करें (डीआईवाय) ट्रेंड्स में उछाल।

रिपोर्ट के आधार पर कुछ कदम ब्रांड तत्काल उठा सकते हैं –

1 सोशल डिस्टेंसिंग में बनाएं सामाजिक जुड़ाव
उपभोक्ताओं के साथ उनके संदर्भ में बनाएं जुड़ाव लोग, रचनाकार और मशहूर हस्तियां एक अभूतपूर्व तरीके से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर मौजूद हैं और ब्रांडों के पास उपयोगकर्ताओं के साथ मजबूत संवाद और गहरा जुड़ाव बनाने के लिए इसका लाभ उठाने का अच्छा मौका है।

2 हाइपर-लोकलाइज़ेशन पर ध्यान दें
उपभोक्ता जहां हैं, वहीं उनसे जुड़ना अलग-अलग तरह के प्रतिबंधों के जरिए देश को अलग-अलग ज़ोन्स में बांटे जाने के बीच, माइक्रो-टार्गेटिंग से ब्रांडों को सबसे पहले पहल करने के लाभ (फर्स्ट-मूवर एडवांटेज) मिल सकते हैं।

3 डिजिटल एक्सेस के जरिए जीवंत अनुभव लाएं
वर्चुअल लॉन्च और प्रॉडक्ट डेमो लोग अपने जीवन के हर पहलू के लिए आभासी अनुभवों का रुख कर रहे हैं, ऐसे में ब्रांड्स के लिए इस नई ग्राहक यात्रा की खातिर खुद को बदलना महत्वपूर्ण हो जाता है। हम देख रहे हैं कि ज्यादा से ज्यादा ब्रांड्स अपने फॉलोअर्स और ग्राहकों से जुड़ने के लिए फेसबुक और इंस्टाग्राम ‘लाइव’ को आजमा रहे हैं। अब ब्रांड नए उत्पादों की लॉन्चिंग के लिए भी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का उपयोग करने के बारे में सोच रहे हैं।

4 मूल्य-निर्माण (वैल्यू-क्रिएशन) के लिए पोर्टफोलियो में सुधार करें
तरह-तरह के मूल्य को बढ़ावा देने के लिए ग्राहकों को वर्गीकृत करना उपभोक्ता मूल्य् को लेकर अधिक सचेत हो रहे हैं, ऐसे में ब्रांडों के लिए यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि सेगमेंट को ऑप्टिमाइज करें और वो ऑफर करें जो सेगमेंट के लिए प्रासंगिक है।

5 विकास को गति देने के लिए मीडिया मिक्स मॉडल्स पर नए सिरे से नजर डालें
नए मीडिया परिदृश्य के अनुरूप बनना जैसा कि ब्रांड्स और खासतौर पर पारंपरिक उत्पाद श्रेणियों वाले ब्रांड्स ज्यादा ऑनलाइन खर्च की शुरुआत कर रहे हैं, उन्हें प्लेटफॉर्म के द्वारा वास्तविक वृद्धिगत नतीजों को समझने के साथ ही अंतर-प्लेटफॉर्म दक्षता की तत्काल जरूरत महसूस होगी। यह नील्सन द्वारा तैयार कस्टम-मिक्स मॉडलिंग (सीएमएम) सरीखे उद्योग-अग्रणी डिजिटल माप मानकों की जरूरत बढ़ाएगा, जिसका फेसबुक ने पिछले साल पायलट परीक्षण किया था।

6 अपनी ऑनलाइन मौजूदगी बनाएं
अध्ययन से पता चला है कि भारतीय उपभोक्ता ई-कॉमर्स पर अधिक खर्च कर सकते हैं। चीन, ब्राजील, इंडोनेशिया, थाईलैंड, फिलीपींस की तुलना में भारत में ऑनलाइन चैनल को तरजीह देने में आया उछाल तेज है। अपनी ऑनलाइन उपस्थिति बनाने का यह सही समय है।

7 सीआरएम समाधानों को दें मजबूती
बिक्री-बाद के संवाद के लिए मैसेजिंग और अन्य डिजिटल सीआरएम साधन खरीदारी की राह की अड़चनों को खत्म करने के लिए ग्राहकों की जरूरतों को सहज रूप से हल करना बेहद जरूरी है। मैसेंजर/चैट बॉट जैसे परस्पर संवाद वाले डिजिटल समाधान और अन्य डिजिटल सीआरएम साधन अभी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

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