कोका कोला इंडिया ने एनजीओ और स्टार्टअप्स के साथ कचरा प्रबंधन प्रणाली लागू किया

नई दिल्ली : कोका कोला इंडिया फाउंडेशन आनंदना ने साहस, चिंतन और हसीरू दला जैसे एनजीओ और स्टार्टअप्स के साथ साझेदारी में एकीकृत कचरा प्रबंधन प्रणाली की स्थापना की घोषणा की है। इसके अंतर्गत कचरे को अलग-अलग करने के लिए मटीरियल रिकवरी और सेग्रिगेशन फैसिलिटीज (एमआरएफएस) की भी स्थापना की जाएगी। इस प्रकार की साझेदारी से सामाजिक स्तर पर अनेक नई पहलों की शुरूआत होगी, जिसके तहत व्यक्तिगत रूप से कचरा प्रबंधन की सेवाएं देने वाले अनौपचारिक क्षेत्र को औपचारिक क्षेत्र में शामिल कर लिया जाएगा।

कचरे को अलग-अलग करने की पर्याप्त सुविधाओं का नहीं होना कचरे की री साइक्लिंग के क्षेत्र में आने वाली प्रमुख बाधा है, जिससे री साइक्लिंग पर असर पड़ता है। अलग-अलग किए बिना ठोस कचरे को जलाने से भी वायु प्रदूषण बढ़ सकता है। आनंदना ने अपने कई एनजीओ पार्टनर के साथ मिलकर कचरे से ठोस पदार्थ बरामद करने के लिए नए आधारभूत ढांचे की स्थापना की घोषणा की है, जिसमें पीईटी और गीले कचरे से खाद बनाने की यूनिट शामिल हैं। कचरा प्रबंधन के ये संयंत्र भारत में कई जगहों दिल्ली, एनसीआर, चेन्नई, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक पर स्थापित किए जाएंगे। कोका-कोला इंडिया एवं दक्षिण पश्चिम एशिया वाइस प्रेसिडेंट -पब्लिक अफेयर्स, कम्यूनिकेशन्स एंड सस्टैनिबिलिटी इश्तेयाक अमजद ने कहा कि वर्ष 2025 तक भारत के शहरों में कचरा उत्पादन की दर दोगुने से भी ज्यादा बढ़ने की उम्मीद है। यह स्थिति आय में बढ़ोतरी ओर शहरी क्षेत्रों की आबादी बढ़ने के कारण आई है। आज हम अपने सहयोगियों के साथ कचरा प्रबंधन की विक्रेंद्रीयकृत व्यवस्था में शामिल अपने दम पर काम करने वाली संस्थाओं को प्रोत्साहित करना चाहते हैं। यह साझेदारी कंपनी के विजन वर्ल्ड विदाउट वेस्ट को साकार करने और वर्ष 2030 तक अपने संयंत्रों में आने वाले पूरे के पूरे कचरे की री-साइक्लिंग के लक्ष्य को हासिल करने के लिए बनाई गई है। साहस की दिव्या तिवारी ने कहा कि कचरे के निपटारे की समस्या के हल के लिए हम कोका-कोला से अपनी साझेदारी कायम रखकर हम काफी उत्साहित हैं। गीले और सूखे कचरे को अलग-अलग रखने, संसाधनों की तलाश और रिसाइक्लिंग से कचरे के निपटारे की समस्या का हल होगी। कचरा प्रबंधन की विकेंद्रीयकृत व्यवस्था इस सफर को आगे बढ़ाने का प्रमुख हिस्सा है। हम कचरा प्रबंधन की प्रणाली में सुधार के लिए नए-नए तरीके विकसित करेंगे।

एनजीओ चिंतन की संस्थापक और निदेशक भारती चतुर्वेदी ने कहा कि कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में विकास के लिए साझेदारी काफी महत्वपूर्ण है, जिसमें कचरा बिनने वाले भी शामिल हैं। यह साझेदारी तेजी से बढ़ते हुए कचरा प्रबंधन के संकट के समाधान के लिए काफी महत्वपूर्ण है। यह परियोजना कूड़ा-कचरा बीनने वाले लोगों को घरों से कचरा एकत्र करने तक पहुंच उपलब्ध कराती है। स्वच्छ भारत के तहत दिए गए दिशा-निर्देशों की पुष्टि में यह नगर निगम की मदद करने का अवसर देती है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने इस मुहिम का उदारता से समर्थन किया है और ठोस कचरे को अलग करने का संयंत्र स्थापित करने के लिए जगह मुहैया कराई है, जो इस समस्या का विकेंद्रीयकृत हल खोजने की दिशा में काफी महत्वपूर्ण साबित होगा। कचरा प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने वाले स्टार्टअप हसीरू दला की सहसंस्थापक मिस नलिनी शेखर ने बताया कि प्लास्टिक की रीसाइक्लिंग पर्यावरण की स्थिरता की दिशा में काफी महत्वपूर्ण है। हम प्लास्टिक वेस्ट के प्रबंधन की एकीकृत तकनीक के माध्यम से एक स्थिर समुदाय की स्थापना के लिए आनंदना के साथ गठबंधन कर काफी प्रसन्न है।

हम इस क्षेत्र में कूड़ा-कचरा एकत्र करने वाले लोगों को व्यावसायिक पहचान देने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। इसके अलावा हम इस समूह के लोगों को वित्तीय और सामाजिक लाभ लेने के लिए मदद भी मुहैया करा रहे हैं, जिसके वे हकदार हैं। हमारे प्रयास स्थायित्वपूर्ण सामुदायिक नजरिए से कचरा प्रबंधन के लिए आधारभूत ढांचा तैयार करने पर केंद्रित होंगे। कचरा प्रबंधन की दिशा में काम करने वाले कर्मचारियों, स्क्रैप डीलर्स और स्थानीय प्रशासन में पर्यावरण की स्वच्छता के लिए जागरूकता उत्पन्न करने पर ही हम कोशिश करेंगे।

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