कैट ने व्यापारियों को एमएसएमई सेक्टर में शामिल करने का किया आग्रह

नई दिल्ली : कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने देश में व्यापारिक समुदाय के वित्तीय संकट से निपटने के लिए एक आर्थिक पैकेज देने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मांग की है। कैट ने कहा कि 7 करोड़ व्यापारियों को आर्थिक पैकेज की व्यापक घोषणाओं में शामिल नहीं किया गया है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया ने कहा कि देश भर के व्यापारियों का यह मानना है कि यह एक बड़ी चूक है, जानबूझकर की गई उपेक्षा नहीं है। केंद्र सरकार ने घरेलू व्यापार के महत्व को सदैव आगे रखा है और पीएम ने ‘लोकल पर वोकल’ की बात की है। कैट का कहना है कि देश में आवश्यक वस्तुओं की निर्बाध आपूर्ति श्रृंखला सुनिश्चित करने में भारत के व्यापारियों ने जी जान से प्रयास किया है, जिन्होंने अक्सर अपने स्वयं के जीवन को खतरे में डालते हुए लॉकडाउन अवधि के दौरान सभी जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति को जारी रखा और प्रधानमंत्री ने स्वयं व्यापारियों की इस भूमिका को गत 15 दिन पहले अपने तीन ट्वीट द्वारा प्रशंसा भी की है। भारतीय व्यापारी सरकार की हर प्रगतिशील नीति, जिसमें जीएसटी कार्यान्वयन, डिजिटल भुगतान, प्लास्टिक और नोटबंदी पर प्रतिबंध आदि पर सदैव क्रियाशील रहे हैं।

कैट ने कहा कि सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम के एक ऑफिस मेमोरेंडम ‘परिपत्र एफ.न. यूएएम /एमसी / 01/2017-एसएमई) दिनांक 27 जून 2017 द्वारा एनआईसी कोड 46, 47 से व्यापारियों को एमएसएमई से बाहर कर दिया। वित्त मंत्री द्वारा एमएसएमई की परिभाषा के तहत सेवा क्षेत्र को शामिल करना व्यापारियों को ऐसे पैकेज देने के लिए सरकार की मंशा को स्पष्ट रूप से दर्शाता है, क्योंकि व्यापारियों को सेवा क्षेत्र का हिस्सा माना जाता है, लेकिन किसी भी स्पष्टीकरण के अभाव में इसका कोई लाभ व्यापारियों को नहीं मिलेगा। भरतिया ने आर्थिक पैकेज में व्यापारियों न शामिल किये जाने को अन्यायपूर्ण बताया। उन्होंने कहा की देश के लगभग 45% व्यापारी ग्रामीण और अर्ध ग्रामीण क्षेत्रों में अपनी व्यावसायिक गतिविधियाँ संचालित कर रहे हैं और उन्हें ‘सीमांत व्यापारी’ कहा जा सकता है, जबकि 55% अन्य व्यापारी शहरी क्षेत्रों में अपने व्यवसाय का संचालन कर रहे हैं जो बहुत ही विषम वित्तीय परिस्थियों से ग्रस्त हैं।

कैट ने राहत पैकेज में व्यापारियों के एक विशिष्ट पैकेज देने का आग्रह करते हुए कहा की लॉकडाउन की अवधि में व्यापारियों को कर्मचारियों को वेतन के भुगतान जैसे विभिन्न वित्तीय दायित्वों को पूरा करना होगा, जीएसटी का भुगतान, आयकर और अन्य सरकारी भुगतान, ईएमआई, व्यापारियों द्वारा लिए गए ऋण और अन्य आकस्मिक खर्चों पर बैंक ब्याज सहित अन्य अनेक वित्तीय दायित्व पूरे करने बोझ भी है, वहीँ दूसरी ओर व्यापारिक लेनदेन में व्यापारियों द्वारा दिए गए उधार माल की राशि बाजारों के खुलने के दिन से 45-60 दिनों के अंदर वापिसी की शुरुआत होने की सम्भावना है। ये हालात वित्तीय संकट के इन समय में व्यापारियों के लिए बहुत भारी होंगे और सरकार के पर्याप्त समर्थन के अभाव में सम्भावना इस बात कि है की लगभग 20% सीमांत व्यापारियों के पास व्यापार बंद करने के अलावा और कोई अन्य विकल्प नहीं होगा, लेकिन और व्यापारियों को अपनी व्यावसायिक गतिविधियों को पुनर्जीवित करने के लिए महत्वपूर्ण वित्तीय कठिनाइयों का सामना करना पड़ेगा।

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