केंद्र सरकार ने निकम्मे और भ्रष्ट अफसरों की सेवाएं समाप्त की, अब ये राज्य भी हैं तैयारी में

नई दिल्ली : मोदी सरकार ने ब्यूरोक्रेसी पर कठोरता दिखाते हुए ग्रुप ए और ग्रुप बी के कुल 312 अफसरों को जबरन रिटायर कर दिया है। सरकार ने ग्रुप ए के 36000 कर्मचारियों और ग्रुप बी के 82000 कर्मचारियों के काम का रिव्यू किया। इनमें से 312 अफसर नकारा मिले, जिनमें ग्रुप ए के 125 अफसर और ग्रुप बी के 187 अफसर हैं।

केंद्र सरकार की कार्रवाई के बाद उत्तराखंड और एमपी की राज्य सरकारों ने भी अपने शासन के नकारा अफसरों पर कार्रवाई करने की तैयारी कर ली है। यूपी में 600 अधिकारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। सरकार ने मौजूदा साक्ष्यों के आधार पर भ्रष्ट अफसरों के खिलाफ कार्रवाई की और उन्हें रिटायर कर दिया है। यह कार्रवाई फंडामेंटल रूल्स (एफआर ) 56 (जे)( आई ), सेंट्रल सिविल सर्विसेज (सीसीएस) पेंशन रूल्स 1972 और आल इंडिया सर्विसेज के संशोधित रूल 16(3) को ध्यान में रखकर की गई है। इसके तहत सरकार को अधिकार है कि वह किसी भी अफसर के काम का कुछ अंतराल पर रिव्यू कर सकती है और उन्हें प्रीमैच्योर रिटारमेंट दे सकती है।

योगी सरकार ने 600 अधिकारियों पर की सख्ती
केंद्र सरकार की तर्ज पर यूपी में भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ सरकार ने कड़े कदम उठाते हुए 600 अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की है। इनमें 200 अधिकारी ऐसे हैं, जिन्हें पिछले 2 साल में जबरन रिटायरमेंट दे दिया गया। यूपी सरकार के मंत्री एवं प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने बताया कि हमारी सरकार की भ्रष्ट और ढीले-ढाले अफसरों के खिलाफ ‘जीरो टालरेंस’ की नीति है। पिछले 2 साल में अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। उन्हें समय पूर्व अनिवार्य रिटायरमेंट दिया गया है और कई अधिकारियों को चेतावनी दी गई है और उनके प्रमोशन रोक दिए गए हैं।

उत्तराखंड सरकार भी सख्त 

उत्तराखंड में भी नकारा अफसरों पर कार्रवाई की तैयारी उत्तराखंड सरकार भी भ्रष्ट और नाकारा अफसरों को समय पूर्व अनिवार्य सेवानिवृत्ति देने की तयारी कर रही है। विभागों से सूची बनाने को कहा गया है। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, पहले चरण में इस सूची में 50 वर्ष की आयु पार कर चुके अधिकारी शामिल हैं। अगले चरण में विभिन्न विभागों के भ्रष्ट कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

एमपी में निकम्मे अफसरों  पर संकट के बादल
मध्य प्रदेश सरकार भी अक्षम (निकम्मे) कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाने की तयारी कर रही है। इसके लिए विभागीय स्तर पर समीक्षा के बाद अक्षम कर्मचारियों को आवश्यक सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। इसके लिए सामान्य प्रशासन विभाग ने सभी विभागों को जारी एक निर्देश में कहा है कि सरकारी कामकाज को बेहतर बनाने के लिए जो कर्मचारी-अधिकारी अक्षम हैं, उन्हें सेवा से हटाया जाए। जिन कर्मचारियों-अधिकारियों की आयु 50 वर्ष हो गई है और सेवा काल के 20 वर्ष हो गए हैं, उनकी समीक्षा की जाए।

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