कुछ देर में चंद्रयान 2 होगा लॉन्च, पहली चंद्रमा के साऊथ पोल पर पहुंचेगा कोई देश

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नई दिल्ली : भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने चंद्रमा मिशन चंद्रयान-2 की लॉन्चिंग रविवार शाम को 6. 43 बजे से शुरू कर दी है। इसकी लांचिंग आज दोपहर 2. 43 बजे की जानी है। ऐसे पहली बार होगा जब चंद्रमा के साउथ पोल पर कोई देश पहुंच सकेगा। इसरो ने लॉन्च से जुड़ी सभी तैयारियां कर ली है।

ये होंगी मिशन चंद्रयान-2 की उपलब्धियां
इस मिशन से चांद पर बर्फ की खोज हो पाती है तो भविष्य में यहां इंसानों के रहने की संभावना बढ़ जाएगी। इस अभियान के सफल होने से शोधकार्य के साथ ही अंतरिक्ष विज्ञान में भी नई खोज का रास्ता खुलेगा। लांचिंग के 53 से 54 दिन के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव पर चंद्रयान 2 की लैंडिंग होगी और अगले 14 दिनों तक यह डेटा जुटाएगा ।

क्या होगा फायदा
इसरो का चंद्रयान 2 अभियान 2008 में प्रक्षेपित चंद्रयान-1 की अगली कड़ी है। अभियान का उद्देश्य चंद्रमा की उत्पत्ति और क्रमिक विकास को समझना है। चंद्रयान-2 सौर मंडल के बारे में कुछ बुनियादी सवालों के सुराग उपलब्ध कराएगा, जो कि चंद्रमा के क्रेटरों, पहाड़ियों और घाटियों में छिपे हैं। चंद्रयान 2 के जरिए प्राप्त आंकड़ों से ब्रह्मांड के रहस्यों को जानने में मदद मिलेगी।

चंद्रयान-2 को 44 मीटर लंबे और 640 टन वजनी जियोसिंक्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल-मार्क 3 (जीएसएलवी-एमके 3) से लॉन्च किया जाना था। धरती और चंद्रमा के बीच की दूरी लगभग 3.844 लाख किलोमीटर है। अपनी उड़ान के लगभग 16 मिनट बाद 375 करोड़ रुपये का जीएसएलवी-मार्क 3 रॉकेट 603 करोड़ रुपये के चंद्रयान-2 अंतरिक्ष यान को पृथ्वी पार्किंग में 170 गुणा 40400 किलोमीटर की कक्षा में रखना था। चंद्रयान-2 में लैंडर-विक्रम और रोवर-प्रज्ञान चंद्रमा तक जाएंगे। लैंडर-विक्रम 6 सितंबर को चांद पर पहुंचना था।

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