कमजोर आर्थिक स्थिति को सुधारने के लिए मोदी सरकार उठाएगी यह कदम!

नई दिल्ली : देश की कमजोर आर्थिक स्थिति को दुरुस्त करने के लिए सार्वजनिक व्यय में वृद्धि को ध्यान में रखते हुए आगामी बजट में राजकोषीय घाटा लक्ष्य में संशोधन करते हुए इसे 3. 4 फीसदी से बढ़ाया जा सकता है। सरकार की कुल कमाई और खर्च के अंतर को राजकोषीय घाटा कहा जाता है और कुल कमाई से अधिक खर्च होने पर सरकार आरबीआई या बाजार से कर्ज लेती है। वहीं, सरकार की राजस्व प्राप्ति और राजस्व व्यय के बीच के अंतर को राजस्व घाटा कहते हैं।

आर्थिक क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि उपभोग, मांग, निवेश और पूंजी निर्माण को प्रोत्साहन की जरूरत है, ऐसे में राजकोषीय घाटे पर विचार किया जा सकता है। फिजूल खर्ची को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और राजकोषीय घाटे में संशोधन सुनियंत्रित होगा। वित्त वर्ष 2018-19 में राजकोषीय घाटा लक्ष्य 3.4 फीसदी रखा गया था, हालांकि वित्त वर्ष का अंतिम आंकड़ा आना अभी बाकी है।

उपभोग में कभी कमी की  समस्या से जूझ रही भारतीय अर्थव्यवस्था के सामने व्यापार घाटा में वृद्धि समस्या बनती जा रही है। भारत में 1988 के बाद से व्यापार घाटे लगातार बढ़ रहा है, इसकी वजह यह है कि भारत में इसके पड़ोसी पूर्वी एशियाई देशों के विपरीत आर्थिक विकास आंतरिक उपभोग पर ज्यादा निर्भर है। व्यापार घाटा बढ़ने से इस बार अर्थव्यवस्था पर दोहरा असर पड़ेगा, क्योंकि आंतरिक उपभोग पहले से सुस्त पड़ा है। यह आंकड़ा और बढ़ेगा।

1988 से लेकर 2018 के आंकड़ों से पता चलता है कि कुल मिलाकर व्यापार संतुलन जीडीपी के प्रतिशत के रूप में काफी कम हुआ है। भारतीय निर्यात संवर्धन परिषद के अध्यक्ष मोहित सिंगला ने बताया कि आंकड़ों से जाहिर है कि व्यापार घाटा मुख्य रूप से मध्यवर्ती उत्पादों व कच्चे माल के आयात के कारण बढ़ा है।
अप्रैल में भारत का निर्यात पिछले साल से 0.64 फीसदी बढ़कर 25. 91 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात पिछले साल से 4.48 फीसदी बढ़कर 41.40 अरब डॉलर हो गया है। राजकोषीय घाटे से पता चलता है कि सरकार को कामकाज चलाने के लिए कितनी उधारी की जरूरत होगी।

राजकोषीय घाटा राजस्व में कमी या पूंजीगत व्यय में वृद्धि के कारण होता है। पूंजीगत व्यय लंबे समय तक इस्तेमाल में आने वाली संपत्तियों जैसे-फैक्टरी, इमारतों के निर्माण और अन्य विकास कार्यों पर होता है। राजकोषीय घाटे की भरपाई आमतौर पर केंद्रीय बैंक (रिजर्व बैंक) से उधार लेकर की जाती है या इसके लिए छोटी और लंबी अवधि के बॉन्ड के जरिए पूंजी बाजार से फंड जुटाया जाता है। सरकार की अनुमानित राजस्व प्राप्ति और व्यय में अंतर होने से राजस्व घाटा होता है। यह अनुमान से कम राजस्व प्राप्ति की वजह से होता है।

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