ऑटोमोबाइल में मंदी सरकार से राहत पैकेज पाने के लिए नौटंकी : कैट

नई दिल्ली : कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) ने इस बात पर गहरा अफसोस जताया है कि ऐसे समय में जब भारत का बाजार प्रगतिशील अर्थव्यवस्था के एक चरण से दूसरे चरण में परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है, देश में कुछ ऑटोमोबाइल दिग्गजों ने भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग में गहरी मंदी की एक पूरी तरह से अतार्किक बड़ी एवं सत्यता से परे एक आवाज़ उठाई है, जिससे सरकार से कुछ प्रकार के राहत पैकेज और कर रियायतें ऑटोमोबाइल निर्माताओं के लिए प्राप्त की जा सके और एक ऐसा वातावरण बनाया गया है,  जिससे लगे की पूरी भारतीय अर्थव्यवस्था और विनिर्माण क्षेत्र में बड़ी मंदी है।

सरकार द्वारा अप्रैल 2020 से ऑटोमोबाइल वहिकल के लिए बीएस 6 मानदंडों को लागू करने की घोषणा इसके पीछे एक बड़ा कारण भी है, क्योंकि बहुत सी कंपनियों ने इसके लिए तैयारी शुरू ही नहीं की है, जबकि इन मानकों को अप्रैल 2020 से लागू होना है और इसीलिए ऑटोमोबाइल में मंदी का रोना रोया जा रहा है। कैट ने कहा की क्योंकि वर्तमान में ऑटोमोबाइल वाहन मे बीएस 4 मानक के अनुसार बने हैं जो अप्रैल, 2020 से पुराने हो जाएंगे इसलिए उपभोक्ता की इन वाहनों को खरीदने में कोई रुचि नहीं है, जिसके कारण बड़ी मात्रा में वाहन ऑटोमोबाइल कम्पनियों और उनके डीलरों के पास बड़े स्टॉक के रूप में मौजूद हैं । इसी कारण उनके कारोबार में बिक्री में गिरावट आई है, क्योंकि अब उपभोक्ता बीएस 6 मानदंडों वाले वाहनों के आने का इंतजार कर रहे हैं।

कैट के  राष्ट्रीय महामंत्री  प्रवीन खंडेलवाल ने अर्थव्यवस्था में किसी भी मंदी को खारिज करते हुए कहा कि यह सत्य है की देश भर के व्यापारियों के कारोबार में गिरावट है, लेकिन बैंकों और वित्तीय संस्थानों द्वारा वित्त देने मे कंजूसी,नकदी की कमी बाजार में, रियल इस्टेट में पूंजी का अवरुद्ध होना , ई कामर्स कंपनियों द्वारा लागत से भी कम मूल्य पर माल बेचना और भारी डिस्काउंट देने की वजह से उपभोक्ता का बाज़ार में न आने के कारण से बाज़ार में मंदी है। वहीं व्यापारियों की उधारी की बेहद लम्बी के कारण व्यापारियों पर मंदी की मार पड़ रही है।

खंडेलवाल ने कहा कि नए बीएस 6 उत्सर्जन मानदंड 1 अप्रैल 2020 से लागू किए जाएंगे। इस तिथि के बाद सभी वाहनों को उनका अनुपालन करना होगा । इन कड़े उत्सर्जन नियम का अनुमोदन सुप्रीम कोर्ट ने भी किया है । अप्रैल, 2020 के बाद प्रत्येक ऑटोमोबाइल निर्माता बीएस-6 मानदंडों वाले वाहनों का उत्पादन करने के लिए बाध्य है, जो उन्हें अपने विनिर्माण सुविधा में काफी निवेश के साथ बदलाव लाने के लिए मजबूर करते हैं और ऐसा प्रतीत होता है कि ऑटोमोबाइल निर्माता अपनी उत्पादन लाइन में बदलाव लाने के मूड में नहीं हैं, क्योंकि इस बदलाव के लिए एक बड़ी पूँजी अपने पास से  लगनी होगी। हालांकि कुछ निर्माताओं ने पहले ही प्रक्रिया शुरू कर दी है जो एक स्वागत योग्य कदम है। चूंकि निर्माताओं और डीलरों दोनों के पास पर्याप्त बीएस 4 वाहन उपलब्ध हैं, विनिर्माण इकाइयों में से कुछ ने शुद्ध रूप से उत्पादन बंद कर दिया है क्योंकि वे मार्च, 2020 तक बीएस 4 वाहनों को बेच कर अपना स्टॉक ख़त्म करना चाहते हैं। इलेक्ट्रिक वाहनों को लाने का सरकार का निर्णय भी एक अन्य प्रमुख कारक है ऑटोमोबाइल निर्माताओं को चिंता है क्योंकि वे इन बदलावों के लिए तैयार नहीं हैं। इन कारणों से, ऑटोमोबाइल निर्माताओं द्वारा उनके सेक्टर में गहरी मंदी का ज़ोरदार प्रचार कर सरकार पर नाहायज दबाव बनाया जा रहा है ।

भरतिया ने तर्क दिया कि अगर ऑटोमोबाइल क्षेत्र में मंदी है, तो एमजी हेक्टर की बुकिंग कुछ ही दिनों में 21000 पार कर गई और कंपनी को बुकिंग बंद करनी पड़ी, क्योंकि यह प्रति माह केवल 2000 वाहनों का उत्पादन कर सकती थी। टाटा मोटर्स ने अपनी कारों के प्रो संस्करण को लॉन्च किया डेमलर ने नई ऑनलाइन दुकान शुरू की, महिंद्रा एक्सयूवी 500 की कीमतें बढ़ गई हैं और इसी तरह ओला और उबर की बिक्री प्रति माह क्यों बढ़ रही है,  यदि  वास्तव में मंदी होती तो ऐसा नहीं हुआ होता।  नेताओं ने कहा कि यह नुक़सान निर्माताओं का नहीं बल्कि ऑटोमोबाइल कंपियों के डीलरों को यदि  सरकार कोई पैकेज देना चाहती है, तो उसरकार को ऑटोमोबाइल डीलरों को अपने स्टॉक को  निकालने के लिए पैकिज दिया जाना चाहिए।

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