नौकरियां और छोटे उद्योग बचाने के लिए सरकार ने निकाला ये रास्ता

कर्मचारियों के जमा पीएफ के बदले में कंपनियां ले सकेंगी लोन!

विशेष संवाददाता,कोलकाता : कोरोना वायरस कोविड-19 महामारी और लॉकडाउन के चलते काम-धंधे ठप हैं, लेकिन सरकार कंपनियों को कह रही है कि न कर्मचारियों की छंटनी करें और न ही वेतन में कटौती करें। काम बंद होने से उद्योगों के सामने धन का संकट आ गया है कि बिना कमाई वेतन कैसे दें। अब सरकार ने इसका रास्ता निकाल लिया है। इसके तहत उद्योगों को अपने कर्मचारियों के भविष्य निधि कोष के एवज में लोन लेने की अनुमति दी जाएगी ताकि वे कर्मचारियों का वेतन दे पाएं।
27 अप्रैल से शुरू होगी योजना
उच्चस्तरीय सूत्रों के अनुसार, कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) में पंजीकृत उद्योगों व प्रतिष्ठानों को यह ​सुविधा मिलेगी। योजना यह है कि 27 अप्रैल से 30 सिंतबर 2020 तक ये संस्थान अपने कर्मचारियों को वेतन देने के लिए उस कुल रकम के 50 फीसदी के बराबर लोन ले पाएंगे, जितनी रकम उसके कर्मचारियों के भविष्य निधि खाते में जमा होगी। उनको 5 महीने तक इस पर कोई ब्याज नहीं देना होगा और अक्टूबर से 10.5 प्रतिशत की दर से ब्याज देना पड़ेगा। वे यह भुगतान 31 मार्च, 2022 तक किस्तों में कर सकते हैं, साथ ही प्री-पेमेंट का विकल्प भी मिलेगा।
कितना पैसा है ईपीएफओ के पास
वर्तमान में लगभग 5.50 करोड़ श्रमिकों ने ईपीएफओ की सदस्यता ली है। 15 हजार या ज्यादा वेतन वाले कर्मचारियों की बेसिक पे का 24 प्रतिशत भाग पीएफ योगदान के रूप में जमा कराया जाता है। 30 जून, 2018 तक ईपीएफ के पास लगभग 10.5 ट्रिलियन रुपये यानी दस लाख करोड़ रुपये से अधिक का धन जमा था। इसमें से लगभग 85% राशि डेट फंड्स में और शेष 15% राशि एसबीआई सब्सिडियरीज के माध्यम से इक्विटी लिंक्ड म्यूचुअल फंड्स में निवेश की जाती है। कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ने के एक महीने बाद खाते को सक्रिय रखते हुए संचित कोष की 50% राशि निकाल सकता है जबकि 2 महीने बाद 100% राशि निकाल सकता है।
इसलिए लाई जा रही स्कीम
काम-धंधा बंद होने के कारण छोटे उद्योगों के पास व्यवसाय आराम से चलाने के लिए ही पर्याप्त कैश फ्लो नहीं है, ऐसे में कर्मचारियों के वेतन का बोझ उठाना मुश्किल हो जाता है और कुछ कर्मचारियों पर छंटनी की तलवार लटक रही है। ऐसे में ईपीएफओ से लोन लेकर वे काम चला सकते हैं और कर्मचारियों को वेतन दे सकते हैं। लोन के भुगतान की जिम्मेदारी कर्मचारी नहीं, नियोक्ता पर ही रहेगी। जितने दिन यह लोन ब्याज मुक्त रहेगा, उसकी भरपाई बाद में ज्यादा ब्याज दर से हो जाएगी। यूं समझिए – कर्मचारी को पीएफ पर 8.5 प्रतिशत की दर से ब्याज मिलता है, जबकि अक्टूबर से लोन लेने वाले उद्यमों से 10.5 प्रतिशत की दर से ब्याज लिया जाएगा। यानी कर्मचारियों को ब्याज मिलना जारी रहेगा।
तीनों को फायदा
सरकार कर्मचारी पीएफ खाते में उपलब्ध राशि के एवज में नियोक्ता की गारंटी पर ऋण देगी; नियोक्ता को बैंक दर पर ही आसानी से ऋण मिल जाएगा, और कर्मचारी को उस समय भी वेतन के रूप में धन मिलता रहेगा, जब उसे सबसे ज्यादा जरूरत है, वह भी बिना किसी दायित्व के।
ये शर्तें माननी होंगी
1. नियोक्ता और कर्मचारी को पहले की तरह मासिक पीएफ योगदान जमा कराना होगा।2. 30 सितंबर 2020 तक किसी भी कर्मचारी को नौकरी से नहीं हटा पाएंगे नियोक्ता। 3. पीएफ में 31 मार्च तक कर्मचारियों की कुल रकम का 50% तक ही लोन मिलेगा। 4. ऋण की कुल राशि कर्मचारियों के 6 महीने के वेतन से अधिक नहीं हो सकती।5. ऐसे लोन 30 सितंबर, 2020 तक 3 से 4 किस्तों में लिए जा सकते हैं।6. 30 सितंबर तब ब्याज मुक्त, 1 अक्टूबर से नियोक्ता पर 10.5% ब्याज लगेगा। 7. कर्ज नियोक्ता को चुकाना होगा। 1 अक्टूबर से लोन की रकम और 10.5% ब्याज की पूरी राशि को अक्टूबर 2020 से मार्च 2022 तक की ईएमआई में बांट दिया जाएगा। बिना किसी शर्त के प्रीपेमेंट की अनुमति रहेगी।

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