इस क्षेत्र में चीन से बहुत पीछे है भारत

नई दिल्ली : बेहतर उपज के लिए फसलों की सुरक्षा करना महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे किसानों को बढ़िया रिटर्न्स मिलेंगे। हालांकि किसानों की आमदनी को दोगुना करने की सरकारी समिति के अनुसार में कृषि की समूची प्रक्रिया में एग्रोकेमिकल्स की लागत के रूप में सरकारी समिति का योगदान सिर्फ 0. 4% है, फिर भी ऐसे में अगर घटिया या मिलावटी कीटनाशकों का प्रयोग होता है, तो कृषि में बाकी 99. 6% का निवेश व्यर्थ हो जाएगा। इसलिए किसानों को उत्तम कीटनाशकों की आपूर्ति सुनिश्चित करने पर फोकस होना चाहिए, जिनसे इंडस्ट्री को किसानों के लिए नवीनतम एवं सर्वश्रेष्ठं उत्पािदों को पेश करने में मदद मिलेगी। ये बातें फिक्की द्वारा कृषि पर आयोजित एक चर्चा के दौरान सामने आई।

भारत सरकार में सेक्रटरी (केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल ), केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल राघवेंद्र राव ने कहा कि दुनिया के रासायनिक क्षेत्र में भारत की स्थिति 6 वीं है, लेकिन योगदान दुनिया के समग्र रासायनिक बाजार में सिर्फ 3% है, जबकि चीन का योगदान 39% है। पिछले 15 वर्षों में हमारे देश में रसायनों काआयात 100 गुना बढ़ा है। अब यह महत्वपूर्ण है कि हमें इस क्षेत्र में काम करना चाहिए, आयात पर निर्भरता कम करनी चाहिए और इस क्षेत्र में दुनिया के लिए अपनेयोगदान को सुधारना चाहिए। मुझे खुशी है कि इस उद्योग में चुनौतियों के बारे में अधिक तथ्य लाने के लिए इस तरह के आयोजन किए जाते हैं।

कृषि रसायन उपसमिति, फेडरेशन ऑफ इंडियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने संवहनीय खेती में कृषि रसायन की भूमिका पर आयोजित इस सम्मेलन का उद्घाटन राघवेंद्र राओ, सेक्रटरी (केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल ), केमिकल एंड पेट्रोकेमिकल, भारत सरकार ने किया।  इसमें एग्रोकेमिकल कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रमुखों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, तकनीकी विशेषज्ञों, कॉर्पोरेट्स, नीति निर्माताओं और किसानों ने भाग लिया। नीति आयोग के सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद ने भी सम्मेलन में भाग लिया। एग्रोकेमिकल इंडस्ट्री के प्रतिनिधियों ने भारत में खेती के तरीकों को अधिक जलवायु प्रतिरोधी एवं किसानों के लिए लाभदायक बनाने पर अपने विचार व्यक्त किए। सम्मेलन में नए मॉलीक्युल्सक (भारत में पहली बार) के‍ लिए पंजीकरण की समयावधि में कमी, रेगुलेटरी डेटा की सुरक्षा (पीआरडी) और अंतरराष्ट्रीय स्तर के सर्वश्रेष्ठ तरीकों को लागू करना।

इस मौके पर धानुका एग्रीटेक के चेयरमैन आर. जी. अग्रवाल ने कहा कि भारतीय किसानों की मदद के लिए नई तकनीकें लाने के तरीकों, फसलों की सुरक्षा करने वाले केमिकल्स पर जीएसटी को कम करने और नकली एग्रोकेमिकल्स के प्रसार को रोकने पर भी विचार किया जाना चाहिए । विशेषज्ञों ने कहा कि इस क्षेत्र की वृद्धि के लिए हमें ग्राहकों के विश्वास, प्रौद्योगिकी के रूपांतरण और सभी हितधारकों के साथ सहयोग पर ध्यान देने की आवश्यकता है। नवाचार स्थायी कृषि का जवाब है। एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय कंपनी के रूप में हम भारत के लिए सर्वश्रेष्ठ प्रौद्योगिकियों को लाने के लिए सरकार के साथ काम कर सकते हैं। केवल सरकार गैर सरकारी संगठन, हमारे उद्योग की अन्य कंपनियों और गैर विश्वासियों के साथ बातचीत करके, हम कृषि क्षेत्र के विकास में आवश्यक पहुंच प्रदान कर सकते हैं।

धानुका एग्रीटेक लंबेसमय से नकली कीटनाशकों के मुद्दे पर प्रकाश डाल रहे हैं, अब हम इस मुद्दे को जल्द हल करने के लिए कृषि अधिकारी के साथ एक बैठक आयोजित करने का आश्वासन दे सकते हैं। इस कॉन्फ्रेंस में आरएंडडी, इनोवेशन एवं नये जमाने के समाधानों के इस्तेमाल तथा नई तकनीकों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर भारत में आधुनिक कृषि प्रबंधनपर जोर दिया गया।

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