आर्थिक हालत को सुधारने के लिए मोदी सरकार के सामने होगी ये चार चुनौतियां

नई दिल्ली : मोदी सरकार दूसरी पारी की शुरुआत करने जा रही है, और अब सरकार को के सामने चार प्रमुख आर्थिक समस्याएं होंगी, वर्तमान में देश के सामने आर्थिक सुस्ती, उपभोग और निवेश में कमी जैसी समस्या बनी हुई है। नई सरकार के सामने चार प्रमुख मसले सकल केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय से जारी होने वाले सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी), महालेखा नियंत्रक द्वारा जारी राजकोषीय घाटा के आंकड़े, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अधिशेष को लेकर जालान समिति की रिपोर्ट और एनपीए (गैर-निष्पादित परिसंपत्ति) के संबंध में आरबीआई का सर्कुलर जैसी समस्या सामने आएगी।

आर्थिक जानकारों का कहना है कि गंभीर सुस्ती के दौर से गुजर रही भारतीय अर्थव्यवस्था की विकास दर वित्त वर्ष 2018-19 की चौथी तिमाही में 6. 3 फीसदी रहने की उम्मीद की जा रही है, जो पिछली छह तिमाहियों में सबसे कम होगी। अर्थव्यवस्था में सुस्ती वित्त वर्ष 2020 में भी बनी रह सकती है और चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इसका अनुभव तत्काल होगा।

आपको बता दें कि वित्त वर्ष 2019 की दूसरी तिमाही से जीडीपी विकास दर लगातार घटती जा रही है, जबकि वित्त वर्ष 2018-19 की पहली तिमाही में जीडीपी विकास दर आठ फीसदी थी जो दूसरी तिमाही में घटकर सात फीसदी और तीसरी में 6. 6 फीसदी पर आ गई। वित्त वर्ष 2018-19 में सरकार ने राजकोषीय घाटा 3.4 फीसदी रखने का लक्ष्य रखा था, जिसे बाद में 3. 3 फीसदी कर दिया गया। फरवरी के अंत में राजकोषीय घाटा बढ़कर 8,51,499 करोड़ रुपये हो गया जो बजटीय अनुमान को पार करने के साथ-साथ जीडीपी का 4.52 फीसदी हो गया।

हालाँकि अभी सीजीए द्वारा वित्त वर्ष 2019 के राजकोषीय घाटे के आंकड़े और आरबीआई का संशोधित सर्कुलर आने वाला है। जानकारों का कहना है आरबीआई दबाव वाली संपत्तियों के समाधान की दिशा में कुछ दृष्टिकोण अपनाएगा।

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