आरबीआई ने रेपो रेट एवं रिवर्स रेपो रेट में नहीं किया कोई बदलाव

नई दिल्ली : आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष की आखिरी द्विमासिक समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में बदलाव ना करने की घोषणा किया है। आरबीआई की नीतिगत ब्याज दर 5.15 फीसद ही रहेगी। लगातार दूसरा मौका है, जब आरबीआई ने रेपो रेट एवं रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अगुवाई वाली मौद्रिक नीति समिति ने नीतिगत दरों को लेकर यह ऐलान किया है।

उम्मीद की जा रही थी कि देश में जीडीपी ग्रोथ को मजबूती देने के लिए केंद्रीय बैंक रेपो रेट में बढ़ोत्तरी को कुछ समय के लिए टाल सकता है। बैंक ने महंगाई दर के अनुमान को मौजूदा वित्त वर्ष की चौथी तिमाही के लिए बढ़ाकर 6.5 फीसद कर दिया है और वित्त वर्ष 2020-21 की तीसरी तिमाही के लिए 3.2 फीसद बताया है। बैंक ने वित्त वर्ष 2020-21 की पहली छमाही के लिए महंगाई दर का अनुमान 5.4 से 5 फीसद बताया है। इसके साथ ही केंद्रीय बैंक ने चालू वित्त वर्ष में अक्टूबर से दिसंबर के बीच देश की जीडीपी वृद्धि दर के 6.2 फीसद रहने का अनुमान बताया है। रिजर्व बैंक ने अगले वित्त वर्ष के लिए विकास दर का अनुमान 6 फीसद कर दिया गया है। केंद्रीय बैंक ने अगले वित्त वर्ष की पहली छमाही में जीडीपी ग्रोथ के 5.5 से 6 फीसद के बीच और तीसरी तिमाही में 6.2 फीसद रहने का अनुमान बताया है।

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रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा है कि रेपो रेट में आगे गिरावट की जा सकती है। इसके अलावा केंद्रीय बैंक ने छोटी बचत योजनाओं की ब्याज दरों में बदलाव की जरूरत भी बताई। आरबीआई ने मध्यम उद्यमों को दिये जाने वाले लोन की ब्याज दर को भी अप्रैल से लिंक करने का फैसला लिया गया है।

सुस्त चल रहे रियल एस्टेट को मिली राहत
भारतीय रिजर्व बैंक ने कॉमर्शियल रियल्टी लोन लेने वालों को रहा देते हुए अब उचित कारणों से देरी पर लोन डाउनग्रेड नहीं करने का फैसला लिया है। अगर कोई डेवलपर किसी वजह से बैंकों का लोन निर्धारित समय पर नहीं चुका पाता हैं, तो उसे एक साल तक एनपीए घोषित नहीं किया जाएगा। आरबीआई के इस फैसले से रियल्टी सेक्टर की कंपनियों को काफी राहत मिलेगी। बैंक ने देश में आर्थिक सुस्ती के माहौल के बीच खपत बढ़ाने के लिए अपनी तरफ से हरसंभव प्रयास करते हुए फरवरी 2019 से अबतक कुल मिलाकर रेपो रेट में 1.35 फीसद की कटौती की थी।

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बैंक ने यह सुनिश्चित किया है कि इस कटौती का अधिक-से-अधिक लाभ लोगों को मिले। केंद्रीय बैंक ने बैंकों को बेंचमार्क रेट पर आधारित लोन प्रोडक्ट शुरू करने का निर्देश दिया था। इसके बाद अधिकतर बैंकों ने रेपो रेट आधारित लोन उत्पाद लांच किए। आपको बता दें कि दिसंबर में खुदरा मुद्रास्फीति पांच साल के उच्चतम स्तर 7.35 फीसद पर पहुंच गई थी, जो चार फीसद के मध्यम अवधि के लक्ष्य से ज्यादा है। ग्रोथ को बढ़ावा देने के लिए केंद्रीय बैंक रेपो रेट में लगातार बदलाव नहीं कर रही है।

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