आरबीआई ने कहा- अर्थव्यवस्था उम्मीद से ज्यादा बेहतर

  • -7.5 फीसदी रह सकती है जीडीपी ग्रोथ

नई दिल्लीः  भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के नतीजों का ऐलान हो गया है। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आम लोगों को ईएमआई से कोई राहत नहीं दी है। आरबीआई ने ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया और लगातार तीसरी बार प्रमुख नीतिगत दर रेपो को 4 प्रतिशत पर बरकरार रखा है। आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक में रेपो रेट और रिवर्स रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं करने का फैसला किया गया है। रेपो रेट कम होने का सीधा असर आपकी होम लोन, कार लोन, एजुकेशन लोन की ईएमआई पर पड़ता है। गवर्नर शक्तिकांत दास ने चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में -7.5 प्रतिशत गिरावट का अनुमान जताया। दास ने कहा कि रिजर्व बैंक वित्तीय प्रणाली में जमाकर्ताओं का हित सुरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है और वित्तीय बाजार व्यवस्थित तरीके से काम कर रहे हैं। वाणिज्यिक बैंक 2019-20 के लिये लाभांश का भुगतान नहीं करेंगे।

बैठक की मुख्य बातों पर एक नजर

  • प्रमुख नीतिगत दर रेपो को चार प्रतिशत पर बरकरार रखा। रिवर्स रेपो 3.35 प्रतिशत और स्थायी सीमांत सुविधा (एमएसएफ), बैंक दर 4.25 प्रतिशत पर बनी रहेगी। आरबीआई ने मौद्रिक नीति में नरम रुख बरकरार रखा, सर्दियों में महंगाई दर में कमी आने की उम्मीद जताई।
  • वाणिज्यिक व सहकारी बैंक 2019- 20 का मुनाफा अपने पास ही रखेंगे और वित्त वर्ष के लिये किसी लाभांश का भुगतान नहीं करेंगे।
  • मौद्रिक नीति समिति के सभी सदस्यों ने मुद्रास्फीति के उच्च स्तर को देखते हुए नीतिगत दर को यथावत रखने के पक्ष में निर्णय किया।
  • चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में दिखे आर्थिक पुनरूद्धार के शुरूआती संकेत। चालू वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था में 7.5 प्रतिशत गिरावट का अनुमान।
  • आरटीजीएस प्रणाली अगले कुछ दिन में सप्ताह के सातों दिन 24 घंटे काम करने लगेगी। कार्ड से संपर्करहित लेन-देन की सीमा जनवरी 2021 से दो हजार रुपये से बढ़ाकर पांच हजार रुपये कर दी जायेगी।
  • उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति तीसरी तिमाही में 6.8 प्रतिशत, चौथी तिमाही में 5.8 प्रतिशत रहने का अनुमान।
  • रिजर्व बैंक वित्तीय प्रणाली में जमाकर्ताओं का हित सुरक्षित रखने के लिये प्रतिबद्ध।
  • अर्थव्यवस्था में तेजी से सुधार दिख रहा है और नित नये क्षेत्र भी सुधार की राह पर लौट रहे हैं।
  • वित्तीय बाजार व्यवस्थित तरीके से काम कर रहे हैं।
  • जीडीपी वृद्धि दर तीसरी तिमाही में 0.1 प्रतिशत के साथ सकारात्मक दायरे में लौट आयेगी, चौथी तिमाही में 0.7 प्रतिशत की वृद्धि और पूरे वित्त वर्ष में कुल मिलाकर 7.5 प्रतिशत की गिरावट रहने का अनुमान है।

 

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