आरबीआई नए बैंकों को नहीं जारी करेगा लाइसेंस, जानिए क्या है वजह

नई दिल्ली : भारतीय रिजर्व बैंक ने कहा है कि नए बैंकों को फिलहाल लाइसेंस नहीं दिए जाएंगे, यह घोषणा मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के बाद लिया गया है। आरबीआई ने ब्याज दरों में कटौती करते हुए रेपो रेट 5. 75 फीसदी कर दिया है। रेपो रेट में 0. 25 फीसदी की कटौती गई।

रिजर्व बैंक के बोर्ड ऑफ फाइनेंशियल सुपरविजन में यह फैसला लिया गया है। आरबीआई बोर्ड ने अगले 2-3 सालों तक नए बैंकों को लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी है। अगले 2-3 सालों तक नए बैंकों को लाइसेंस जारी नहीं करने पर सहमति बनी है। फाइनेंशियल सुपरविजन बोर्ड ने बैंकों की वर्तमान हालत को देखते हुए यह फैसला लिया है। नॉन बैंकिंग फाइनेंशियल कॉरपोरेशन और बैंक मर्जर को लेकर सेंट्रल बैंक केस-टू-केस बेस पर फैसला लेगा। आपको बता दें कि आईडीएफसी बैंक, बंधन बैंक को 2015 में फुल बैंक का लाइसेंस मिला था। आईडीएफसी बैंक का आखिरकार कैपिटल फर्स्ट के साथ मर्जर करना पड़ा। जब रघुराम राजन रिजर्व बैंक के गवर्नर थे, तब उन्होंने ‘ऑन टैप’ का नियम लाया था। इसके तहत कभी भी बैंकों को लाइसेंस जारी करने की नीति अपनाई गई।

मौद्रिक नीति समिति
आरबीआई हर दूसरे महीने मौद्रिक नीति की समीक्षा करता है। मौद्रिक नीति की समीक्षा में अर्थव्यवस्था की स्थिति को देखते हुए नीतिगत ब्याज दरें घटाने या बढ़ाने का फैसला किया जाता है। यह फैसला केंद्रीय बैंक की मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) लेती है। मौद्रिक नीति समिति ( एमपीसी), भारत सरकार द्वारा गठित एक समिति है, जिसका गठन ब्याज दर निर्धारण को अधिक उपयोगी एवं पारदर्शी बनाने के लिए 27 जून, 2016 को किया गया था। मौद्रिक नीति वह उपाय है, जिसके द्वारा केंद्रीय बैंक ब्याज दरों पर नियंत्रण कर अर्थव्यवस्था में मुद्रा के प्रवाह को नियंत्रित करता है, मूल्य स्थिरता बनाए रखता है और उच्च विकास दर के लक्ष्य प्राप्ति का प्रयास करता है।

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