आरएसएस से संबंधित संस्था ने सार्वजनिक उपक्रमों को बेचने का किया विरोध

नई दिल्ली : एक तरफ सरकार कई पीएसयूज में विनिवेश की तैयारी पूरी कर चुकी है तो वहीं दूसरी तरफ   आरएसएस से संबंधित स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने एयर इंडिया, बीएसएनएल और बीपीसीएल जैसी सरकारी कंपनियों के विनिवेश का विरोध किया है।

मंच ने इस बारे में कहा है कि रणनीतिक विनिवेश के इस कदम का इस्तेमाल भ्रष्ट अधिकारी कुछ विशेष कारोबारी घरानों को फायदा पहुंचाने में कर सकते हैं। एसजेएम की राष्ट्रीय समिति ने इन कंपनियों की रणनीतिक बिक्री के विरोध में रिजॉल्यूशन पास किया है। एसजेएम का कहना है कि भारत को अपनी राष्ट्रीय संपत्तियां बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों नहीं बेचनी चाहिए। विनिवेश की मौजूदा योजना कुछ कारोबारी घरानों, सलाहकारों, नौकरशाहों के षड्यंत्र का हिस्सा है।  नीति आयोग की रिपोर्ट को खारिज किया जाना चाहिए। सार्वजनिक उपक्रमों का मूल्यांकन अगले पांच साल में जीडीपी को दोगुना करने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

मंच का कहना है कि सार्वजनिक उपक्रमों को लेकर बनाई गई रिपोर्ट निजी हितों  को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। एसजेएम ने इस बात से सहमति जताई कि कारोबार करना सरकार का काम नहीं है, लेकिन साथ ही विनिवेश के नाम पर अपनी राष्ट्रीय संपत्तियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों बेचना गलत है। मंच का कहना है कि सरकार ने बीपीसीएल की बिक्री की बात कही और राष्ट्रीय भावना और कठिन परिश्रम से तैयार संपत्ति को विदेशी कंपनियों के हाथ में नहीं जाने देना चाहिए।

नई दिल्ली एक तरफ सरकार कई पीएसयूज में विनिवेश की तैयारी पूरी कर चुकी है तो वहीं दूसरी तरफ   आरएसएस से संबंधित स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने एयर इंडिया, बीएसएनएल और बीपीसीएल जैसी सरकारी कंपनियों के विनिवेश का विरोध किया है।

मंच ने इस बारे में कहा है कि रणनीतिक विनिवेश के इस कदम का इस्तेमाल भ्रष्ट अधिकारी कुछ विशेष कारोबारी घरानों को फायदा पहुंचाने में कर सकते हैं। एसजेएम की राष्ट्रीय समिति ने इन कंपनियों की रणनीतिक बिक्री के विरोध में रिजॉल्यूशन पास किया है। एसजेएम का कहना है कि भारत को अपनी राष्ट्रीय संपत्तियां बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों नहीं बेचनी चाहिए। विनिवेश की मौजूदा योजना कुछ कारोबारी घरानों, सलाहकारों, नौकरशाहों के षड्यंत्र का हिस्सा है।  नीति आयोग की रिपोर्ट को खारिज किया जाना चाहिए। सार्वजनिक उपक्रमों का मूल्यांकन अगले पांच साल में जीडीपी को दोगुना करने के लक्ष्य को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

मंच का कहना है कि सार्वजनिक उपक्रमों को लेकर बनाई गई रिपोर्ट निजी हितों  को ध्यान में रखकर तैयार की गई है। एसजेएम ने इस बात से सहमति जताई कि कारोबार करना सरकार का काम नहीं है, लेकिन साथ ही विनिवेश के नाम पर अपनी राष्ट्रीय संपत्तियों को बहुराष्ट्रीय कंपनियों के हाथों बेचना गलत है। मंच का कहना है कि सरकार ने बीपीसीएल की बिक्री की बात कही और राष्ट्रीय भावना और कठिन परिश्रम से तैयार संपत्ति को विदेशी कंपनियों के हाथ में नहीं जाने देना चाहिए।

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