आज नेशनल लॉकडाउन के तहत देशभर में 60 हजार बाजार बंद

नई दिल्ली : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जनता कर्फ्यू के आह्वान को समर्थन देते हुए देश भर के लगभग 7 करोड़ से अधिक व्यापारियों कारोबार बंद रखा और लगभग 40 करोड़ कर्मचारी ने घर पर रहकर जनता कर्फ्यू में शामिल हुए।   लगभग 60 हजार व्यापारिक बाजार पूरे तौर पर बंद रहे, आज कोई कारोबार नहीं हुआ और लगभग 1 करोड़ ट्रांसपोर्ट, लगभग 4 करोड़ हॉकर्स तथा लगभग 2 करोड़ लघु उद्योगों ने भी अपना कारोबार बंद रखा और जनता कर्फ्यू में शामिल हुए।

इस मुहीम में कैट के साथ आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट वेलफेयर एसोसिएशन, आल इंडिया हॉकर्स फेडरेशन, लघु उद्योग भारती, एमएसएमई डेवलपमेंट फोरम, आल इंडिया लेडीज एंटररप्रेन्योर्स एसोसिएशन, आल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस, भारतीय किसान मंच आदि राष्ट्रीय संगठनों से सम्बंधित लोग भी कर्फ्यू में शामिल हुए। राजधानी दिल्ली में कैट द्वारा आयोजित व्यापारियों के तीन दिवसीय व्यापार बंद भी आज जनता कर्फ्यू में तब्दील हो गया और दिल्ली के सभी प्रमुख छोटे बड़े बाजार पूरे तौर पर बंद रहे और कोई कारोबार नहीं हुआ । दिल्ली में व्यापार बंद कल भी जारी रहेगा और कल शाम को दिल्ली के व्यापारी नेता आगे के बारे में निर्णय लेंगे ।

 व्यापार बंद होने से आज लगभग 15 हजार करोड़ का नुकसान

कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी.भरतिया ने बताया कि आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र भेजकर कोरोना वायरस पर काबू पाने के लिए सरकार के प्रयासों को अभूतपूर्व बताते हुए उनसे आग्रह किया की कोरोना वायरस से देश को सामूहिक संक्रमण से बचाने के लिए एहतियात के तौर पर केंद्र सरकार 31 मार्च तक देश में  नेशनल लॉकडाउन घोषित करे, पत्र में कैट ने कहा है कि बढ़ते कोरोना वायरस के मामले चिंताजनक है। सरकार ने अपनी तरफ से कोरोना से बचाव के सभी उपाय अपना रही है, लेकिन फिर भी सामूहिक संक्रमण से देश को बचाना जरूरी है। अनेक राज्यों में आंशिक लॉकडाउन है, नेशनल लॉकडाउन में देश व्यापारी सरकार के साथ हैं।

कैट ने बताया कि दवा की दुकाने, डेयरी उत्पाद बेचने वाले तथा रिहायशी कॉलोनियों के किराना एवं जनरल स्टोरों को लॉकडाउन से मुक्त रखा जा सकता है, जिससे लोगों को अपनी रोजमर्रा की जरूरतों को पूरा करने में कोई परेशानी न हो । कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल  ने कहा कि स्वास्थ्य के साथ साथ कोरोना वायरस देश की अर्थव्यवस्था पर भी विपरीत प्रभाव डाल रहा है और खास तौर पर ऐसे समय में जब वर्तमान वित्तीय वर्ष 31 मार्च को समाप्त हो रहा है ।

कैट ने व्यापार में होने वाले नुकसान को कम करने के लिए दिए सुझाव

इसको देखते हुए कैट ने प्रधानमंत्री से आग्रह किया है की आय कर एवं जीएसटी के अंतर्गत सभी प्रकार की रिटर्न फाइलिंग और कर देयता को 30 जून तक के लिए बढ़ाया जाए वहीँ बैंकों के लोन एवं ईएमआई की वापिसी की अवधि को भी 30  जून तक बढ़ाया जाए। किसी भी व्यापारी का कोई खाता एनपीए न घोषित हो, इसके लिए बैंकों को निर्देश दिए जाएँ । आगे बढ़ाई गई अवधि पर कोई भी ब्याज नहीं लिया जाए । देश भर में सप्लाई चेन को सुचारु रूप से जारी रखने के लिए बैंकों द्वारा व्यापारियों को रियायती दर पर कोरोना कैश लोन दिया जाए । वर्तमान वित्तीय वर्ष को विशेष परिस्थितियों में 30 अप्रैल तक बढ़ाया जाए तथा व्यापारियों को किसी भी लॉक डाउन की अवधि के दौरान अपने कर्मचारियों को दी जाने वाली तनख्वाह में सरकार द्वारा सब्सिडी दी जाए ।

 

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