आगामी बजट के लिए व्यापारियों ने सरकार के समक्ष रखी ये मांगें

नई दिल्ली : देश के गैर कॉर्पोरेट क्षेत्र में लगभग 7 करोड़ छोटे व्यवसाय को मोदी सरकार से बड़ी उम्मीदें हैं। आजादी के बाद के किसी भी सरकार ने व्यावसायिक समुदाय को अपनी प्राथमिकता में नहीं रखा, हालांकि यह हमेशा दोहराया गया था कि व्यापारी अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इस चुनाव में कॉन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट )के आह्वान पर देश के पूरे व्यापारिक समुदाय ने एकमत से वोट बैंक के रूप में में भाजपा और उसके सहयोगी दलों को वोट और समर्थन दिया है और इस दृष्टि से व्यापारियों की यह स्पष्ट रूप से आकांक्ष है कि मोदी सरकार निश्चित रूप से व्यापारिक मुद्दों को अपनी प्राथमिकता पर रखेगी। ये बातें कैट के राष्ट्रीय महामंत्री प्रवीन खंडेलवाल कही।

खंडेलवाल ने कहा कि हमें उम्मीद है कि बीजेपी मेनिफेस्टो और पीएम मोदी द्वारा की गई घोषणाओं के अनुसार सरकार जल्द ही खुदरा व्यापार के लिए राष्ट्रीय व्यापार नीति तैयार करेगी और देश में व्यापार के पर्याप्त  अवसरों को सुनिश्चित करने के साथ राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन करेगी जो देश के व्यापारियों और सरकार के बीच एक सेतु का काम करेगा। उन्होंने कहा कि जीएसटी का सरलीकरण और युक्तिकरण एक और मुख्य मुद्दा है। कैट ने मांग की है कि जीएसटी के तहत रिटर्न दाखिल करने की प्रक्रिया को और अधिक सरल बनाया जाना चाहिए ताकि एक साधारण व्यापारी भी इसका पालन कर सके। मासिक रिटर्न के बजाय त्रैमासिक रिटर्न होना चाहिए। जीएसटी के तहत अलग-अलग टैक्स स्लैब की समीक्षा की जानी चाहिए, क्योंकि कई आइटम एक-दूसरे को ओवरलैप कर रहे हैं। कच्चे माल पर कर की दर उसके तैयार उत्पादों की कर दर से अधिक नहीं होनी चाहिए।

ऑटो पार्ट्स, एलुमिनियम बर्तन और सीमेंट, मार्बल , पेंट आदि जैसी वस्तुओं को 28% कर स्लैब से बाहर निकाला जाना चाहिए और किफायती आवास को बढ़ावा देने के हर तरह के कंस्ट्रक्शन के सामान को कम कर स्लैब में रखा जाना चाहिए। जीएसटी समितियों का गठन जिला स्तर पर किया जाना चाहिए और व्यापारियों को जीएसटी परिषद में प्रतिनिधित्व दिया जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि व्यापारियों और उपभोक्ताओं द्वारा डिजिटल भुगतान को अपनाने और स्वीकार करने को प्रोत्साहित करने के लिए कार्ड भुगतान लेनदेन पर लगाए गए बैंक शुल्क को सरकार द्वारा सीधे बैंकों को सब्सिडी दी जानी चाहिए ताकि व्यापारियों या उपभोक्ताओं पर कोई वित्तीय भार न हो। डिजिटल भुगतान के अधिक उपयोग के लिए प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए। बोझिल प्रक्रिया के कारण व्यापारियों को बैंकों से आसान वित्त नहीं मिल रहा है। मुद्रा योजना को अधिक प्रभावी बनाया जाना चाहिए और मूल योजना के अनुसार और प्रधानमंत्री की घोषणा के अनुसार, व्यापारियों को ऋण देने के लिए एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस इंस्टीटूशन को व्यापारियों को लोन देने के लिए अधिकृत कर दिया जाना चाहिए और बैंकों को निर्देश दिया जाना चाहिए कि वे एनबीएफसी और माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस को पर्याप्त वित्त उधार दें, जिससे उनकी उधार देने की क्षमता में वृद्धि होगी । मुद्रा के लिए सेबी जैसा एक अलग नियामक होना चाहिए। लगभग 4% छोटे व्यवसाय बैंकों और वित्तीय संस्थानों से ऋण प्राप्त करने में सक्षम हैं और बाकी व्यापारी निजी धन उधारदाताओं या अन्य अनौपचारिक स्रोतों पर निर्भर हैं।

खंडेलवाल ने कहा कि सरकार डिजिटलाइजेशन पर जोर दे रही है जो एक स्वागत योग्य कदम है। ऐसे समय में जब ज्यादातर सभी सरकारी विभाग ऑनलाइन कार्य कर रहे हैं और कानूनों का अनुपालन भी ऑनलाइन है। लेकिन यह एक तथ्य है कि केवल 35% छोटे व्यवसायों ने अब तक अपने आपको कम्प्यूटरीकृत किया है। ऐसी स्थिति में बाकी व्यापारियों को कंप्यूटर से जोड़ना आवश्यक है और इसलिए सरकार को व्यापारियों को कंप्यूटर और अन्य संबद्ध उपकरणों की खरीद के लिए 50% सब्सिडी प्रदान करनी चाहिए और बैंकों द्वारा आसान किस्त प्रदान करने पर 50% शेष राशि का वित्त पोषण किया जा सकता है। इस तरह देश के खुदरा व्यापार के मौजूदा व्यापार प्रारूप को उन्नत और आधुनिक बनाया जा सकता है और कानूनों का पालन आसान और सुगम होगा। यह भी सुझाव दिया गया है कि अनौपचारिक अर्थव्यवस्था को औपचारिक अर्थव्यवस्था में परिवर्तित करने एवं प्रोत्साहित करने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।

उन्होंने यह भी कहा कि कई लाइसेंसों के स्थान पर किसी भी व्यवसाय के संचालन के लिए एक लाइसेंस होना चाहिए और वार्षिक नवीनीकरण की प्रक्रिया को समाप्त कर दिया जाना चाहिए। यदि व्यवसाय की प्रकृति बदल दी जाती है या व्यवसाय का संविधान बदल दिया जाता है तो ही नवीकरण होना चाहिए । यह व्यापार करने में आसानी के लिए एक कदम आगे होगा। खंडेलवाल ने कहा कि देश में वाणिज्यिक बाजारों में उचित बुनियादी ढांचे का अभाव है और इसलिए बाजारों में आवश्यक बुनियादी ढांचा प्रदान करने के लिए एक तंत्र विकसित किया जाना चाहिए। सरकार को विदेश में व्यापार को समझने एवं अध्ययन करने के लिए व्यापारिक दौरे के लिए व्यापार संघों को प्रोत्साहित करना और सहायता करना चाहिए जिससे देश में अच्छी व्यापारिक प्रथाओं को लागू किया जा सके।

उन्होंने कहा कि ई कॉमर्स भविष्य का एक प्रगतिशील बाजार है और इसलिए ई कॉमर्स पॉलिसी को तुरंत रोल आउट किया जाना चाहिए जो कि एमएनसी और घरेलू ई कॉमर्स दोनों कंपनियों पर भी लागू होना चाहिए। प्रत्येक ई-कॉमर्स कंपनी का पंजीकरण चाहे वह बड़ा हो या छोटा, अनिवार्य होना चाहिए। ई कॉमर्स बाजार को सभी के लिए एक समान अवसर देने वाला बनाना जरूरी है। भारत में ई कॉमर्स व्यवसाय के लिए एक स्वतंत्र नियामक होना चाहिए। कैश ऑन डिलीवरी की प्रवृत्ति को रोका जाना चाहिए और सभी भुगतानों का भुगतान डिजिटल भुगतान के माध्यम से होना चाहिए।

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