आईएचजीएफ के 49वें वर्चुअल मेले में देश- विदेश के 1500 से ज्यादा प्रतिनिधि लेंगे हिस्सा

नई दिल्ली : आईएचजीएफ 49वां वर्चुअल मेला शुरू करने जा रहा है, जिसमें दुनियाभर के हस्तशिल्प निर्यातक हिस्सा लेंगे। मेले का आयोजन 13 से 16 जुलाई 2020 तक होगा। हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच) के चेयरमैन रवि के पासी ने बताया कि कोविड महामारी ने वैश्विक रुप से लोगों की यात्राओं पर लगाम लगा दी है। इस समय कोई भी एक देश से दूसरे देश यात्रा करने में समर्थ नहीं हैं। ऐसे में ईपीसीएच ने वर्चुअल मेले का आयोजन किया जा रहा है।

देश के 70 लाख से ज्यादा कारीगर, निर्यातक हस्तशिल्प से जुड़े हैं, जो मेले में हिस्सा लेंगे। हस्तशिल्प सेक्टर में अधिकतर स्वदेशी कच्चे माल का इस्तेमाल होता है, ये कम लागत से बनते है और कारीगरों के हाथों की कारीगरी और सदियों से चली आ रही समृद्ध परंपरा भी जीवित रहती है। ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने कहा कि इस आयोजन में 1500 से ज्यादा सदस्य निर्यातक कई श्रेणियो में उत्पाद जैसे हाउसवेयर, बाथरूम एसेसरीज, लॉन, गार्डेन, गहने और एसेसरीज, फर्नीचर,फर्नीचर हार्डवेयर एंड एसेसरीज, होम फर्निशिंग एंड मेडअप्स, कालीन, रग्स और फ्लोरिंग्स, फैशनज्वैलरी एंड एसेसरीज, सजावटी गिफ्ट जैसे कॉरपोरेट गिफ्ट, क्रिसमस एंड फेस्टिव डेकोर, हस्तनिर्मित पेपर, गिफ्ट रैप, रिबन, सॉफ्ट टॉय्ज, मोमबत्तियां, अगरबत्ती, पॉटपोरी, सुंगधित वस्तुएं, अरोमैटिक्स, योग-ध्यान और हीलींग आइटम वगैरह प्रदर्शित करेंगे ।

ईपीसीएच के महानिदेशक राकेश कुमार ने बताया कि भले ही ये नया माध्यम है, पर उम्मीद है कि इसमें पूरी दुनिया से बड़ी संख्या में लोग हिस्सा लेगें। विदेशी ग्राहकों के साथ ही थोकविक्रेता, वितरक, चेन स्टोर्स, डिपार्टमेंटल स्टोर्स, फुटकर विक्रेता, मेल आर्डर कंपनीज, ब्रांडओनर्स, बाइंग हाउसेस, डिजाइनर और ट्रेंड फोरकार्स्टर्स भी शामिल होंगे और अपनी जरुरत के हिसाब से व्यापारिक गतिविधियों में हिस्सा भी लेंगे। ग्राहकों को आमंत्रित करने के लिए ईपीसीएच ने व्यापक प्रचार प्रसार की रणनीति बनाई है और इसमें ईमेलर्स, ऑनलाइन बैनर्स, सोशल मीडिया, टेलीकॉलिंग के साथ ही आयोजन के प्रचार के लिए दुनिया भर में फैले दूतावासों और भारतीय मिशन को भी शामिल किया गया है।

ये देश लेंगे हिस्सा
कुमार ने बताया कि कई देशों ने रजिस्ट्रेशन करा लिया है, जिनमें आस्ट्रेलिया, ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, ब्राजील, कनाडा, चाड, चिली, चीन, चेक रिपब्लिक, डेनमार्क, इक्वाडोर, मिस्त्र,फिजी, फ्रांस, जर्मनी, ग्रीस, हॉन्गकॉन्ग, आयरलैंड, इजराइल, इटली, जापान, कुवैत, लेबनान, लिथुवानिया, लक्ज़मबर्ग, मारीशस, नामीबिया, नेपाल, नीदरलैंड, न्यूकैलेडोनिया, न्यूजीलैंड,नार्वे, ओमान, फिलीपींस, पुर्तगाल, पुअर्टोरिको, रूस, सउदी अरब, सर्बिया एंड मॉटेनेग्रो, सिंगापुर, दक्षिणी अफ्रीका, स्पेन, स्वीडन, स्विटज़रलैंड, ताइवान, थाईलैंड, तुर्की, युगांडा, संयुक्त अरब अमीरात, यूके, अमरीका, उरुग्वे और कई अन्य देशों के ग्राहक शामिल हैं।

कंपनियां, डिपार्टमेंटल स्टोर्स के ग्राहकों ने भी बड़ी संख्या में आयोजन में हिस्सा लेंगे, जिनमें अमरीका के कॉस्ट प्लस वर्ल्ड मार्केट, एंथ्रोपॉलोजी, रैल्फ लॉरेन, डब्ल्यूकेएनडी- डब्ल्यूवाईएफआर, अर्बन आउटफिटर्स, मडपाई, क्रैकर बैरेल, टीजेएक्स, विस्टेरिया, बेडबाथ एंड बियॉंड, जर्मनी की चीबो, मार्को पोलो, इम्प्रेशनन, दक्षिण अफ्रीका की पिक एंड पे, इजराइल की फॉक्सहोम, नीदरलैंड्स की रिविएरा मैसन, एडलमैन बी.वी, फ्रांस की कैरेफोर, ऑस्ट्रेलिया की बनिंग्स वेयरहाउस, यूके के टेस्को, रॉस, नेक्सट, स्विटजरलैंड की माइग्रोस और कनाडा की किफ किफ इम्पोर्ट्स शामिल हैं।

वहीं भरतीय रिटेल ब्रांड्स में बॉम्बे स्टोर लिमिटेड, सिनर्जी लाइफ स्टाइल, फैब इंडिया ओवरसीड प्राइवेट लिमिटेड, गुडअर्थ डिजाइन स्टूडियो प्राइवेट लिमिटेड, रिलायंस रिटेल, वॉलमार्ट, एशियन पेंट्स लिमिटेड, रेमंड लिमिटेड, स्लीपवेल, प्राक्सिस होम रिटेल लिमिटेड (होमटाउन), ट्रेंट लिमिटेड (वेस्टसाइड), अर्बन लैडर, आदित्य बिड़ला फैशन एंड रिटेल हिस्सा लेंगे।

पूर्वोत्तर राज्यों के लिए विशेष थीम
कुमार ने बताया कि जम्मू कश्मीर और पूर्वोत्तर राज्यों के हस्तशिल्प को प्रस्तुत करने के लिए विशेष थीम रखा गया है, पूर्वोत्तर पैवेलियन में 20 से ज्यादा हस्तशिल्पी और उद्यमी ऐसी ईकोफ्रैंडली कलाकृतियों का प्रदर्शन करेंगे जो प्राकृतिक चीजों से बनी होती है जैसे बांस, टेराकोटा, प्राकृतिक फाइबर्स, ईरी सिल्क, मूगा सिल्क, ब्लैक पॉटरी आदि। ये चीजें देश के पूर्वोत्तर राज्यों में प्रचुरता से पाई जाती हैं। ईको फ्रैंडली क्राफ्ट्स की अगर बात की जाय तो देश का पूर्वोत्तर भाग इस मामले में सबसे समृद्ध है। देश के पूर्वोत्तर भाग में असम, नागालैंड, अरुणाचल प्रदेश, मणिपुर, मेघालय, मीजोरम, सिक्कम और त्रिपुरा शामिल हैं। ईपीसीएच के निरंतर अथक प्रयासों की वजह से देश के पूर्वोत्तर क्षेत्र से होने वाला निर्यात वर्ष 2018-19 में 1323.39 करोड़ रुपये तक पहुंच गया।

जम्मू-कश्मीर का पेपर मैशे, क्रिउल कढ़ाई, पश्मीना शॉल, नामदास तकिया के गिलाफ और घर की अन्य सजावटी वस्तुओं, कालीन, नक्काश चांदी के सामानों, विलो बास्केट, तांबे और ब्रास के सामान, गुजरात की कलात्मक टेक्सटाइल, जम्मू-कश्मीर के कानी शॉलों, बिहारी की मिथिला पेंटिग्स, नई दिल्ली की हॉर्न फैशन ज्वैलरी, राजस्थान की मीनाकारी और गोल्ड लीफ क्राफ्ट, महाराष्ट्र की वरली आर्ट को आयोजन का प्रमुख आकर्षण बनाया जाएगा।

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