अमेरिका व चीन के बीच बढ़ते तनाव से दुनियाभर में आर्थिक गतिविधियां प्रभावित

नई दिल्ली : कोरोना महामारी के कारण अमेरिका का काफी नुकसान हुआ है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर लगातार आक्रामक रुख अपना रहे हैं, जिसे कारण दोनों देशो के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। एंजेल ब्रोकिंग लिमिटेड के चीफ एनालिस्ट ( नॉन-एग्री कमोडिटी एंड करेंसी) प्रथमेश माल्या का कहना है कि  दो महाशक्तियों के बीच बढते तनाव के कारण दुनिया भर की आर्थिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं।

सोना

सोने की कीमतें सोमवार को 1.04 प्रतिशत घटकर 1711.2 डॉलर प्रति औंस पर आ गईं। सोने की कीमतों में गिरावट की वजह व्यावसायिक गतिविधियों के फिर शुरू होने के बाद निवेशकों का जोखिमपूर्ण असेट क्लास में निवेश करने की ओर रुख करना है। वैश्विक अर्थव्यवस्था यू.एस. और चीन के बीच उभरते तनाव के कारण काफी प्रभावित हो रही है। हालांकि, आर्थिक डेटा दिखाता है कि सेफ-हैवन संपत्ति सोने की गिरावट को सीमित करता है। महामारी की वजह से वैश्विक आर्थिक परिस्थितियों पर असर पड़ा था और जैसे-जैसे कई देशों ने लॉकडाउन के नियमों में नरमी बरती, रिकवरी की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

चांदी 

सोमवार को स्पॉट सिल्वर की कीमतें 0.58 प्रतिशत घटकर 17.1 डॉलर प्रति औंस पर बंद हुई। एमसीएक्स पर कीमतें 0.9 प्रतिशत घटकर 47821 रुपए प्रति किलो बंद रही।

क्रूड ऑइल

सोमवार को डब्ल्यूटीआई क्रूड की कीमतें 3.3 प्रतिशत बढ़कर 34.4 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुई। कच्चे तेल उत्पादकों की ओर से आक्रामक उत्पादन कटौती ने कच्चे तेल की बढ़ती वैश्विक मांग ने कीमतों को सपोर्ट दिया। मई-2020 से जून-2020 तक ओपेक और उसके सहयोगी अपनी उत्पादन गतिविधियों को प्रति दिन 9.7 मिलियन बैरल कम करने पर सहमत हैं। ओपेक+ जून 2020 में फिर से मिलेगा और तय करेगा कि तेल की कीमतों को कम करने के लिए कम उत्पादन को जारी रखना है या नहीं।

कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि कोविड-19 से जुड़ी लॉकडाउन संबंधी पाबंदियों को शिथिल करने के कारण भी है, लेकिन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं यू.एस. और चीन के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्रूड की कीमतों का लाभ सीमित हो गया।

बेस मेटल्स

सोमवार को एलएमई बेस मेटल्स की कीमतें सकारात्मक रुख के साथ बंद हुईं, हालांकि, अमेरिका और चीन के बीच तनाव के बढ़ने से बाजार लगातार चिंताओं से घिरा रहा। चीन की ओर से शुरू की गई प्रोत्साहन योजनाओं से औद्योगिक धातुओं की मांग को बढ़ावा मिलेगा क्योंकि इसमें बुनियादी ढांचे पर बड़े पैमाने पर खर्च शामिल है। बेस मेटल्स की बढ़ती मांग के कारण कीमतों को सपोर्ट मिला है क्योंकि बढ़ती मांग से चीन सबसे प्रमुख बेस मेटल उपभोक्ता बन गया है।

राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के मुताबिक, हांगकांग भी अमेरिकी प्रतिबंधों की वजह बन सकता है और इससे महाशक्ति राष्ट्रों के रिश्तों में और खटास आ सकती है। यह बेस मेटल्स के लाभ को सीमित कर सकता है।

कॉपर

सोमवार को एलएमई कॉपर की कीमतें 1.4 फीसदी बढ़कर 5,362 डॉलर प्रति टन पर बंद हुईं। प्रमुख धातु की कीमतों को चीन का सपोर्ट है क्योंकि उम्मीद की जा रही है कि कॉपर की मांग बढ़ेगी, लेकिन अमेरिका और चीन के बिगड़ते संबंधों और मंदी के डर से आने वाले दिनों में तांबे की कीमतों पर असर पड़ सकता है।

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