अमेरिका-चीन का व्यापार युद्ध भारत के लिए अवसर: पनगढ़िया

न्यूयॉर्कः अमेरिका और चीन के व्यापारिक रिश्तों में बढ़ता तनाव भारत के लिए एक ‘अवसर’ की तरह है। ऐसी में भारत उन बहुराष्ट्रीय कंपनियों को देश में निवेश के लिए आकर्षित कर सकता है जो चीन के बाहर वैकल्पिक स्थान की तलाश में हैं। यहां भारतीय महावाणिज्य दूतावास में एक परिचर्चा में प्रख्यात अर्थशास्त्री अरविंद पनगढ़िया ने ये बातें कहीं। पिछले साल मार्च में ट्रंप सरकार ने चीन से आयातित इस्पात एवं एल्युमीनियम उत्पादों पर भारी शुल्क लगाने की घोषणा की थी। इसके बाद अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध शुरू हो गया।

कुछ दीजिए व उसके बदले उनसे कुछ लीजिएः पनगढ़िया ने कहा कि अमेरिका, भारत को अपने बाजार को खोलने के लिए कह रहा है। यह भारत के लिए अच्छी चीज है। मैं इसे एकतरफा खोल देता लेकिन यहां अमेरिका के साथ बातचीत करने का अवसर बन रहा है। उन्हें कुछ दीजिए और उसके बदले उनसे कुछ लीजिए। आंकड़ों को स्थानीय स्तर पर रखने जैसे कुछ मुश्किल मुद्दे हैं लेकिन हार्ली डेविडसन मोटरसाइकिल जैसे मुद्दे को सुलझाया जा सकता है। हार्ली डेविडसन से शुल्क हटाइए। दिक्कत क्या है? 70 साल के संरक्षणवाद के बाद आप कितने लंबे वक्त तक अपने ग्राहकों को दंडित कीजिएगा। भारत में आज के समय में वाहनों पर शुल्क लगभग 100 प्रतिशत है। इससे किसको लाभ हो रहा है। कुछ शुल्कों का कोई मतलब नहीं है।’ शुल्क की बजाय भारत अपने लाभ के लिये विनिमय दर का उपयोग कर सकता है। उन्होंने कहा, ‘रुपये को थोड़ा और कमजोर होने दीजिए, इससे आपके निर्यातकों के लिए द्वार खुलेंगे जबकि इससे शुल्क में कमी से होने वाले नुकसान की भरपाई भी होगी। हमने 1990 के दशक में ठीक ऐसा ही किया था। मैं इसे पूरी तरह से भारत के हित में देखता हूं।

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