अब भ्रामक विज्ञापनों पर लगेंगे लगाम

नई दिल्ली : संसद में पारित उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत हाल ही में जिला मजिस्ट्रेट कोर्ट का आदेश आया कि एडवर्टाइजिंग स्टैंडर्ड्स काउंसिल ऑफ इंडिया (एएससीआई ) के फैसले सदस्यों के साथ-साथ गैर-सदस्यों पर भी लागू होते हैं। अब तक बड़ी संख्या में विज्ञापनदाताओं ने गलत धारणा के तहत एएससीआई का सदस्य बनने से परहेज किया है कि इससे उन्हें एएससीआई के फैसलों का पालन नहीं करना होगा।

दिल्ली जिला अदालत (तीस हजारी) ने एक फैसले में प्रिमोर्डियल सिस्टम्स लिमिटेड वर्सेस एएससीआई के मामले में विज्ञापन स्व-नियामक एएससीआई के पक्ष में फैसला दिया है। शिकायतकर्ता विज्ञापनदाता (प्रिमोर्डियल सिस्टम्स) ने तर्क दिया कि एएससीआई का गैर-सदस्य होने के नाते एएससीआई द्वारा निर्धारित स्व-नियमन कोड उन पर लागू नहीं होता और विज्ञापनदाता एएससीआई के अधिकार क्षेत्र के तहत नही आता। अदालत ने कहा कि एएससीआई को अधिकार है कि वह एएससीआई के स्वतंत्र उपभोक्ता शिकायत परिषद (सीसीसी) द्वारा भ्रामक माने जाने वाले विज्ञापनों को संशोधित करने या हटाने के लिए विज्ञापनदाता को सुझाव दे। अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा कि भले ही शिकायतकर्ता एएससीआई का सदस्य नहीं है लेकिन विज्ञापन के क्षेत्र में काम कर रहा है। विज्ञापन के लिए एएससीआई ने एक सेल्फ-रेगुलेशन कोड बनाया है और इसके उल्लंघन की शिकायतें भी वह सुनता है। इस प्रकार यदि एएससीआई की सिफारिश के मुताबिक विज्ञापन एजेंसी या टेलीविज़न चैनल शिकायतकर्ता के विज्ञापन को प्रसारित करने से इनकार कर देता है तो वे ऐसा करने के हकदार हैं। इस प्रकार शिकायतकर्ता के वकील के तर्क में कोई दम नहीं है कि वह एएससीआई का सदस्य नहीं है और इस तरह शिकायतकर्ता उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता है।

अदालत ने आगे कहा कि एएससीआई का गठन विज्ञापनों के लिए स्व-नियामक निकाय के रूप में किया गया है। एएससीआई द्वारा बनाए गए नियम और समय-समय पर उनमें किए गए बदलाव इसको वैधानिक रूप देता है। माननीय सर्वोच्च न्यायालय ने पहले ही माना है एएससीआई प्रोग्राम कोड के उल्लंघन के संबंध में विशिष्ट शिकायतों को देखता है, इसलिए प्रथम दृष्टया यह नहीं कहा जा सकता कि शिकायत की सुनवाई नियत प्रक्रिया के तहत नहीं है। इस मामले में अदालत ने यह माना कि एएससीआई के पास निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार विज्ञापनों को विनियमित करने का अधिकार है।

एएससीआई के चेयरमैन डी. शिवकुमार ने कहा कि यह दिल्ली की अदालत द्वारा पारित एक बहुत ही महत्वपूर्ण फैसला है, क्योंकि यह स्पष्ट करता है कि सभी विज्ञापनदाता एएससीआई के दिशानिर्देशों के दायरे में आते हैं। यह पूरे विज्ञापन उद्योग को एक स्पष्ट संदेश भी देता है कि सही विज्ञापन में निवेश करना कारगर है, क्योंकि भ्रामक विज्ञापन काम नहीं करने वाला। स्पष्ट तौर पर उपभोक्ताओं के लिए यह एक बड़ी जीत है, क्योंकि विज्ञापन उद्योग के सदस्य भले ही वे एएससीआई के सदस्य न हों, अब उन्हें भ्रामक विज्ञापनों से धोखा नहीं दे सकते।

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