यूक्रेन में फंसी गोबरडांगा की स्वागता, 3 साल पहले गयी थी डॉक्टरी की पढ़ाई करने

पिता को बताया धमाकों की आवाज से टूटी थी आज उसकी नींद
बारासात : यूक्रेन में फंसे कई भारतीयों में से एक बंगाल के उत्तर 24 परगना के गोबरडांगा की निवासी एमबीबीएस छात्रा स्वागता साधुखां भी हैं। गुरुवार को जहां स्वागता ने परिवार से बात कर बताया है कि वह बमों और गोलियां की आवाजें सुनी जा रही है वहीं गोबरडांगा में अब उसके बुजुर्ग माता-पिता की काटो तो खून नहीं जैसी अवस्था हो गयी है। उनकी बस एक ही गुहार है कि किसी तरह से बेटी सुरक्षित घर लौट आये। मिली जानकारी के अनुसार गोबरडांगा गर्ल्स हाईस्कूल की मेधावी छात्रा थीं स्वागता जो कि यूक्रेन में डॉक्टरी की अपनी पढ़ाई कर रही है। उसके पिता देवाशिष साधूखां बानीपुर होम में सुपरवाइजर हैं जबकि मां हाउस वाइफ हैं। यह छोटा सा परिवार सालों से गोबरडांगा के बेरगुम 1 नंबर ग्राम पंचायत के नकपुल लक्ष्मीपुर में रहता है। स्वागता से यूक्रेन में फंसे होने के खतरे को लेकर जहां उसका परिवार ​चिंता में डूबा है वहीं गांववाले भी अपनी इलाके की बेटी को सुरक्षित यहां लौटा लाने की प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। परिवार का कहना है कि वह यूक्रेन के कियेभ में अपनी कुछ भारतीय छात्र साथियों के साथ वहीं अटक गयी है और वहां हवाई सेवा ठप पड़ने से फिलहाल उनके सामने परिस्थितियां चुनौतिपूर्ण है। स्वागता के साथ उसका एक साथी कीर्तिसोम चौधरी भी वहीं अटक गये हैं जो कि पंजाब का रहने वाला है। बेटी से हुई बातचीत के बाद पिता देवाशिष का कहना है कि बेटी ने बताया कि बम धमाकों की आवाज से इसदिन उसकी नींद टूटी है और उसे पता चला है कि वहां रूस का हमला हो चुका है, उसने कहा है कि फिलहाल वह ठीक है मगर परिवार इस बात को मान नहीं पा रहा है। स्वागता के परिवार का कहना है कि भारतीयों की वापसी को लेकर सरकार जल्द कुछ कदम उठाये और उनकी सुरक्षा को सुनिश्चित करे, यही उनकी मांग है।

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