सरकारी सुविधाएं लेते समय किया था मुफ्त इलाज का वादा

निजी अस्पतालों व नर्सिंग होमों के खिलाफ पीआईएल
सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : सरकारी सुविधा लेते समय निजी अस्पतालों और नर्सिंग होमों ने एक निर्धारित संख्या में आम लोगों का मुफ्त में इलाज करने का वादा किया था। वादा वादा ही रह गया इस पर अमल नहीं किया गया। इसका हवाला देते हुए हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस प्रकाश श्रीवास्तव और जस्टिस राजर्षि भारद्वाज के डिविजन बेंच में एक पीआईएल दायर की गई है।
उत्पल राय ने यह पीआईएल दायर की है। इसमें कहा गया है कि आरटीआई से मिली जानकारी के मुताबिक महानगर में ऐसे 45 निजी अस्पताल और नर्सिंग होम हैं जिन्होंने स्थापना के लिए या इसके विस्तार के लिए सरकार से सुविधाएं ली थी। किसी ने एक रुपए के वार्षिक लीज पर जमीन ली थी तो किसी ने आर्थिक मदद ली थी। पर मुफ्त चिकित्सा कहीं नहीं मिल रही है। उन्होंने पीआईएल दायर करने से पहले वेस्ट बंगाल क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट रेगुलेटरी कमिशन के चेयरमैन को इस बाबत पत्र दिया था। इसमें कहा गया है कि वेस्ट बंगाल क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट रेगुलेटरी एक्ट की धारा 7(3)(एस) में कहा गया है कि किसी भी निजी अस्पताल और नर्सिंग होम ने अगर सरकार से मदद ली है तो उसे आउटडोर में 20 फीसदी और इनडोर में 10 फीसदी मरीजों का मुफ्त इलाज करना पड़ेगा। इस पीआईएल में कहा गया है कि आम लोगों को इस सुविधा की जानकारी ही नहीं है। इसी का फायदा उठाते हुए निजी अस्पताल और नर्सिंग होम इस तरह की सुविधांए नहीं दे रहे हैं। एडवोकेट जनरल ने इसकी सुनवायी के दौरान यह माना कि क्लिनिकल इस्टैबलिशमेंट एक्ट में इस तरह का प्रावधान है।

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