दक्षिण की तरह उत्तर कोलकाता में भी कम हुआ मतदान

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : चुनाव यानी लोकतंत्र का महापर्व। पिछले लगभग 4 महीने से बंगाल में चले आ रहे लोकतंत्र के इस महापर्व का समापन गुरुवार काे आठवें चरण के चुनाव के साथ हुआ। हालांकि हर बार की तरह इस बार भी कोलकाता ने मतदान में मायूस किया है। इसे कोरोना का असर कहें या फिर उत्साह में कमी, लेकिन पिछली बार की तुलना में इस बार कोलकाता में मतदान काफी कम हुआ है। चाहे गत 27 अप्रैल को हुए दक्षिण कोलकाता के चुनाव हों या फिर गुरुवार को हुए उत्तर कोलकाता के चुनाव, दोनों ही दिनों कोलकाता के लोग मतदान के लिए कम ही निकलें।
उत्तर कोलकाता की 7 सीटों के लिए कम निकलें लोग
चौरंगी : इस क्षेत्र में इस बार 51.98% मतदान हुआ जबकि 2016 के विधानसभा चुनाव में 56.20% मतदान हुआ था। इस बार यहां लगभग 4% कम मतदान हुआ।
इंटाली : यूं तो इंटाली में लोगों की लम्बी कतारें दिखी, लेकिन इसके बावजूद पिछली बार की तुलना में मतदान का प्रतिशत कम ही रहा। इस बार इंटाली में 65.79% लोगों ने मतदान किया जबकि 2016 में यह संख्या 70.68% थी। यहां भी 5% कम मतदान हुआ है।
जोड़ासांको : मिनी इंडिया कहे जाने वाले जोड़ासांको में इस बार सबसे कम मतदान हुआ। जोड़ासांको में 48.45% मतदान हुआ जबकि 2016 में 53.72% मतदान हुआ था। पिछली बार की तुलना में इस बार यहां लगभग 6% कम मतदान हुआ है।
काशीपुर-बेलगछिया : यहां हिन्दीभा​षियों के साथ ही अल्पसंख्यकों की भी अच्छी आबादी है। हालांकि यहां भी लगभग 7% मतदान कम हुआ है। 2016 में यहां 64.84% मतदान हुआ था जबकि इस बार 58.17% मतदान हुआ है।
मानिकतला : यहां लगभग 9% कम मतदान हुआ है। इस बार यहां 60.92% मतदान हुआ जबकि 2016 के विधानसभा चुनाव में 69.70% मतदान हुआ था।
श्यामपुकुर : 2016 के विधानसभा चुनाव में यहां 68.30% मतदान हुआ था जबकि इस बार 56.53% मतदान हुआ है। यहां लगभग 6% मतदान कम हुआ है।
बेलियाघाटा : यहां मतदान का प्रतिशत तो काफी अच्छा रहा, लेकिन पिछली बार की तुलना में मतदान कम ही रहा। 2016 के विधानसभा चुनाव में यहां 66.38% मतदान हुआ था जबकि इस बार 60.87% मतदान हुआ है। यहां भी लगभग 5% कम मतदान हुआ है।
दक्षिण कोलकाता में भी कम हुआ था मतदान
गत 27 अप्रैल को हुए दक्षिण कोलकाता की 4 सीटों के चुनाव में भी मतदान कम हुए। रासबिहारी में मात्र 59.8 % मतदान हुए थे जबकि वर्ष 2016 में यहां 67.12 % मतदान हुए थे। इसी तरह हिन्दीभाषी बहुल भवानीपुर में इस बार 61.36 % मतदान हुए जो 2016 की तुलना में कम हैं। 2016 में यहां 66.86% मतदान हुए थे। वहीं बालीगंज में इस बार 61 % वोट हुए जो कि 2016 में 63.86 % थे। हालांकि कोलकाता पोर्ट में पिछली बार की तुलना में अधिक वोट पड़े। इस बार यहां 64.41 % मतदान हुए जबकि 2016 में 63.42 % मतदान हुए थे।
कम मतदान का कारण कोरोना ?
राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि कोलकाता में हमेशा ही मतदान कम होता है। जिलों की तुलना में कोलकाता में मतदान का प्रतिशत हमेशा ही कम रहता है। हालांकि इस बार कोरोना ने और अधिक असर डाला है। कहा जा रहा है कि जिस कदर पिछले कुछ दिनों में कोलकाता में कोरोना के मामले बढ़े हैं, उस कारण लोग वोट देने के लिए कम ही निकलें।

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