महानगर में 55% तक पुरुष हैं इनफर्टिलिटी के शिकार : डॉ. दस्तीदार

सन्मार्ग संवाददाता
कोलकाता : महानगर समेत देश भर में मेल इनफर्टिलिटी के मामले दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं। कोलकाता में लगभग 55% तक पुरुष इनफर्टिलिटी के शिकार बताये जा रहे हैं। घाेष दस्तीदार इंस्टीट्यूट फॉर फर्टिलिटी रिसर्च (जीडीआईएफआर) के डायरेक्टर व कोलकाता के सीनियर गायनोकोलॉजिस्ट डॉ. सुदर्शन घोष दस्तीदार ने सन्मार्ग से इस बारे में कहा, ‘रोजाना हमारे आईवीएफ सेंटर में 50-55% मामले मेल इनफर्टिलिटी के आते हैं। वहीं लगभग 45-50% मामले फिमेल इनफर्टिलिटी के होते हैं जबकि तकरीबन 10% मामले ऐसे होते हैं ​जिसमें इनफर्टिलिटी का कारण समझ में नहीं आता है।’
गर्म इलाकों में काम करने वाले पुरुषों में अधिक शिकायत
गर्म तापमान वाले इलाकों जैसे कि केमिकल प्लांट, पेस्टीसाइड्स का इस्तेमाल किये जाने वाले खेतों, ब्लास्ट फर्नेस, इंजन वाले कमरे आदि स्थानों पर काम करने वाले पुरुषों में मेल इनफर्टिलिटी की शिकायत अधिक सामने आती है। डॉ. दस्तीदार के अनुसार, इन इलाकों में काम करने वाले पुरुषों के स्पर्म में गड़बड़ी देखी जाती है। अत्यधिक तापमान इन पुरुषों के स्पर्म पर असर डालता है जिस कारण ऐसे पुरुषों को कुछ समय के लिए किसी दूसरे स्थान पर काम करने की हम सलाह देते हैं। लगातार एक जगह पर बैठकर काम करने वाले पुरुषों में भी यह समस्या देखी जाती है।
इस तरह का लाइफस्टाइल भी है अहम कारण
डॉ. सुदर्शन घोष दस्तीदार ने बताया कि कुछ विशेष तरह का लाइफस्टाइल अपनाने वाले पुरुषों में मेल इनफर्टिलिटी की अधिक समस्या देखने को मिलती है। इनमें मुख्य तौर पर हेवी स्मोकर, अत्यधिक शराब पीने वाले, काफी मानसिक तनाव से ग्रसित लोग शामिल हैं। इसके अलावा मोटापा भी पुरुषों में इनफर्टिलिटी का अहम कारण है। देखा गया है कि 90 से 100 किलो के वजन वाले पुरुषों के स्पर्म में गड़बड़ी आ जाती है और वे इनफर्टिलिटी के शिकार हो जाते हैं। दरअसल, ऐसे लोगों का बीएमआई (बाॅडी मास इनडेक्स) 35 या उससे अधिक हो जाने के कारण पुुरुषों के स्पर्म में समस्या आ जाती है। अगर केवल उक्त तरह की आबादी पर सर्वे किया जाये तो पता चलेगा कि 80% तक पुरुषों में इनफर्टिलिटी की समस्या मिलेगी। हालांकि आम आबादी पर सर्वे करने से 50-55% तक पुरुषों में यह समस्या देखी जाती है।
तनावपूर्ण जीवन से दूरी बनाना जरूरी
प्रख्यात डॉ. संजय गुप्ता इस बारे में कहते हैं, ‘पुरुषों में इनफर्टिलिटी बढ़ने के अहम कारणों में है उनका तनावपूर्ण जीवन। इसके अलावा मोटापा, डायबिटीज, फैटी लीवर डिसीज, नींद में कमी जैसी समस्याएं भी इनफर्टिलिटी बढ़ाती हैं। अगर 2 साल के अंदर टेस्टिस पेट से नीचे नहीं उतरता है तो ऐसे में इनफर्टिलिटी की समस्या आती है। इसके अलावा टेस्टिस में चोट लगने पर अथवा किसी तरह का जेनेटिक डिफेेक्ट होने पर भी स्पर्म में समस्या आती है। इस कारण तनावमुक्त जीवन की काफी आवश्यकता है।’

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